जेल में रहे निष्कासित नेता को अब बीजेपी ने बनाया रीवा उपाध्यक्ष, पूर्व विस अध्यक्ष के भतीजे को मिला जिला महामंत्री का पद
Dablu Kumar | Sept 25, 2025, 15:22 IST
Dablu Kumar
एमपी के रीवा में बीजेपी से निष्कासित मनीष चंद्र शुक्ला को जिला उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के भतीजे को जिला महामंत्री बना दिया गया है।
मध्यप्रदेश में बीजेपी ने 62 संगठनात्मक जिलों में से अब तक 30 से ज्यादा जिलों की कार्यकारिणी घोषित कर चुकी है। हालांकि, कार्यकारिणी घोषणा के बाद लगातार पार्टी कार्यकर्ताओं में टेंशन देखने को मिल रहा है।
ताजा मामला रीवा से जुड़ा हुआ है। यहां जनपद CEO से मारपीट के मामले में 4 महीने जेल में रहे और बीजेपी से निष्कासित मनीष चंद्र शुक्ला को जिला उपाध्यक्ष बना दिया गया है। वहीं, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम के भतीजे विवेक गौतम को जिला महामंत्री बना दिया। अब इस पूरे मामले को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में चर्चा जारी है। हालांकि, मामले की जानकारी भी अभी ही सामने आई है। जिस पर चर्चा शुरू हो गई है।
हाल ही में तीन नेताओं ने अपने पदों से इस्तीफा दिया है और इन इस्तीफों से यह साफ हो रहा है कि बीजेपी में परिवारवाद को लेकर कुछ बदलाव हो रहे हैं।
मंडला जिले में पीएचई मंत्री संपतिया उइके की बेटी श्रद्धा कवरेती को जिला मंत्री बनाया गया था, लेकिन उन्होंने 7 सितंबर को कार्यकारिणी घोषित होने के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनका कहना था कि वह वर्तमान में टिकरवाड़ा ग्राम पंचायत की सरपंच हैं और केवल सामान्य कार्यकर्ता के रूप में ही जिम्मेदारी निभाना चाहती हैं।
मंडला जिले की कार्यकारिणी में पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते की बहन प्रिया धुर्वे को जिला उपाध्यक्ष बनाया गया था। हालांकि, उन्होंने पार्टी का आभार व्यक्त किया, लेकिन अपने सामाजिक कार्यों और पार्टी को पर्याप्त समय न दे पाने के कारण इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा 9 सितंबर को हुआ।
मऊगंज जिले में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम के बेटे राहुल गौतम को महामंत्री नियुक्त किया गया था। हालांकि, 2 सितंबर को राहुल ने इस्तीफा भेज दिया, जिसमें उन्होंने लिखा कि संगठन में पद कम हैं और निष्ठावान कार्यकर्ता ज्यादा हैं, इसलिए किसी अन्य कार्यकर्ता को यह पद दिया जाए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल पार्टी नेताओं को जोर देकर कहा था कि राजनीति में जमीदारी प्रथा को खत्म करना होगा और परिवारवाद की राजनीति का अब कोई स्थान नहीं है। लगता है, मोदी जी की ये बात अब जमीन पर उतरने लगी है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण बन रही है मध्यप्रदेश बीजेपी।
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने प्रधानमंत्री की इस बात पर अमल करते हुए प्रदेश के मंत्री-विधायकों के रिश्तेदारों से इस्तीफे लेना शुरू कर दिए हैं, ताकि पार्टी में पारदर्शिता बनी रहे।
अब, ये साफ होता नजर आ रहा है कि मध्यप्रदेश में बीजेपी परिवारवाद के खिलाफ अपनी राजनीतिक पंक्ति में नई दिशा देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
पिछले कुछ दिनों में बीजेपी ने जिन तीन बड़े नेताओं के परिवार के सदस्यों से इस्तीफा लिया है, उससे यह साफ है कि बीजेपी में परिवारवाद को खत्म करने की कोशिश हो रही है।
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बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इन नेताओं से बात करके उनके परिवार के सदस्यों को पार्टी से इस्तीफा देने पर सहमति बनाई है। यह साफ है कि खंडेलवाल आगे भी इस मामले पर नजर बनाए रखेंगे। यह नियम अब सत्ता से जुड़े राजनीतिक पदों पर भी लागू किया जा सकता है।
इन तीन इस्तीफों के बाद ग्वालियर, भोपाल, इंदौर और सागर जिलों के बड़े नेताओं को यह चुपके से संकेत दिया गया है कि वे अपने परिवार के सदस्यों को जिला कार्यकारिणी में शामिल कराने के लिए जिलाध्यक्ष और पर्यवेक्षकों पर दबाव न डालें। अगर ऐसा हुआ तो पार्टी उन नेताओं से इस्तीफा भी ले सकती है।
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प्रदेश में जिलाध्यक्षों के चुनाव को 9 महीने हो चुके हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों में पार्टी केवल कुछ जिलों की कार्यकारिणी घोषित कर पाई है। बाकी जिलों की कार्यकारिणी अब तक घोषित नहीं हुई है, जबकि पार्टी में कुल 62 जिलों की संगठनात्मक इकाइयां हैं।
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बीजेपी में कुछ नेता अपने परिवार के सदस्य जैसे बेटे और बेटियों को पार्टी में पद दिलाने के लिए जोर लगा रहे हैं। ग्वालियर में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे देवेंद्र प्रताप (रामू) तोमर और सागर में केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक की बेटी निवेदिता रत्नाकर को जिला महामंत्री बनाने के लिए काफी दबाव डाला जा रहा है। इसी तरह भोपाल और इंदौर में भी कई नेता अपने बेटों को पद दिलाने के लिए सक्रिय हैं। यही कारण है कि इन जिलों की कार्यकारिणी घोषित करने में देरी हो रही है।
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भाजपा प्रदेश संगठन परिवारवाद के खिलाफ सख्त रवैया अपनाए हुए हैं। इससे पीछे बीजेपी की कोशिश है कि जमीन तैयार करने में खून-पसीना बहाने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका मिल सके। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने कोभी पार्टी में परिवारवाद विस्तार पर नियंत्रण करने कहा था। पार्टी लगातार आम कार्यकर्ताओं को अहमियत देने में लगी हुई है।
ताजा मामला रीवा से जुड़ा हुआ है। यहां जनपद CEO से मारपीट के मामले में 4 महीने जेल में रहे और बीजेपी से निष्कासित मनीष चंद्र शुक्ला को जिला उपाध्यक्ष बना दिया गया है। वहीं, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम के भतीजे विवेक गौतम को जिला महामंत्री बना दिया। अब इस पूरे मामले को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में चर्चा जारी है। हालांकि, मामले की जानकारी भी अभी ही सामने आई है। जिस पर चर्चा शुरू हो गई है।
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इन नेताओं ने दिया इस्तीफा
संपतिया उइके की बेटी ने दिया इस्तीफा
फग्गन सिंह कुलस्ते की बहन ने दिया इस्तीफा
गिरीश गौतम के बेटे दे चुके हैं इस्तीफा
पीएम की बात पर हो रहा अमल
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने प्रधानमंत्री की इस बात पर अमल करते हुए प्रदेश के मंत्री-विधायकों के रिश्तेदारों से इस्तीफे लेना शुरू कर दिए हैं, ताकि पार्टी में पारदर्शिता बनी रहे।
अब, ये साफ होता नजर आ रहा है कि मध्यप्रदेश में बीजेपी परिवारवाद के खिलाफ अपनी राजनीतिक पंक्ति में नई दिशा देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
गिरीश गौतम के बेटे और मंत्री संपतिया उइके की बेटी से लिया इस्तीफा
मध्य प्रदेश में अब बीजेपी नेताओं के परिवारों और रिश्तेदारों को पार्टी के प्रदेश और जिला संगठनों में अब पद मिलना मुश्किल होगा। अगर गलती से उन्हें पद दिया भी गया, तो पार्टी उनसे इस्तीफा ले लेगी। हाल ही में मऊगंज में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम के बेटे से इस्तीफा लिया गया और इसके बाद पीएचई मंत्री संपतिया उइके की बेटी और पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते की बहन को भी जिला कार्यकारिणी से हटा दिया गया।
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बड़े नेताओं को भी दिया गया संकेत
इन तीन इस्तीफों के बाद ग्वालियर, भोपाल, इंदौर और सागर जिलों के बड़े नेताओं को यह चुपके से संकेत दिया गया है कि वे अपने परिवार के सदस्यों को जिला कार्यकारिणी में शामिल कराने के लिए जिलाध्यक्ष और पर्यवेक्षकों पर दबाव न डालें। अगर ऐसा हुआ तो पार्टी उन नेताओं से इस्तीफा भी ले सकती है।
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जिलाध्यक्षों के चुनाव को 9 महीने पूरे
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कार्यकारिणी घोषित करने में क्यों हो रही देरी
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भाजपा प्रदेश संगठन परिवारवाद के खिलाफ सख्त रवैया अपनाए हुए हैं। इससे पीछे बीजेपी की कोशिश है कि जमीन तैयार करने में खून-पसीना बहाने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका मिल सके। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने कोभी पार्टी में परिवारवाद विस्तार पर नियंत्रण करने कहा था। पार्टी लगातार आम कार्यकर्ताओं को अहमियत देने में लगी हुई है।
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