कौन हैं महेश केवट? जिन पर बीजेपी ने राज्यसभा की तीसरी सीट का लगाया दांव
Amresh Kushwaha | Jun 08, 2026, 13:04 IST
बीजेपी राज्यसभा उम्मीदवार महेश केवट
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में बीजेपी ने महेश केवट को तीसरी सीट के लिए मैदान में उतारकर मुकाबला दिलचस्प बना दिया है। जानिए उनका पूरा सियासी सफर और निष्कासन से जुड़ा विवाद...
मध्य प्रदेश में तीसरी राज्यसभा सीट की लड़ाई अब महज एक चुनावी औपचारिकता नहीं रह गई है, बल्कि यह एक दिलचस्प राजनीतिक थ्रिलर में तब्दील हो चुकी है। इस पूरी कहानी के केंद्र में एक संख्या है- 11, कभी यही 11 नंबर महेश केवट को भारतीय जनता पार्टी (BJP) से बाहर ले गया था। वहीं, आज लगभग यही नंबर उन्हें राज्यसभा तक पहुंचाने का माध्यम बन सकता है।
बता दें कि इसी (11) नंबर के करीब बीजेपी को राज्यसभा में तीसरी सीट पाने के लिए वोटों की जरूरत है।
गणित विषय में स्नातक (Graduate in Mathematics) महेश केवट इस सियासी जोड़-तोड़ और अंकगणित को बखूबी समझते हैं। शायद यही वजह है कि भाजपा नेतृत्व ने भी उनके इस अनुभव पर इतना बड़ा दांव लगाया है।
महेश केवट का जन्म 28 अगस्त 1973 को निवाड़ी जिले के ओरछा धाम में हुआ था। बीएससी (मैथ) की पढ़ाई करने वाले महेश केवट ने अपना सामाजिक और राजनीतिक सफर बहुत जल्दी शुरू कर दिया था।
1984 में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में मुख्य शिक्षक के तौर पर काम करना शुरू किया और 1992 तक सेवा दी थी। इसके बीच 1990 से 1992 तक वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के ब्लॉक संयोजक और विश्व हिंदू परिषद (VHP) की निवाड़ी प्रखंड कार्यकारिणी में सचिव भी रहे। साल 1995 में महेश केवट ने भाजपा की मुख्यधारा की राजनीति में कदम रखा था।
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भाजपा उन्हें एक ऐसे जमीनी कार्यकर्ता के रूप में पेश कर रही है, जिसने स्थानीय स्तर से उठकर राष्ट्रीय मंच तक का सफर तय किया है। वे वर्ष 1998 तक जिला कार्यसमिति सदस्य रहे। इसके बाद, 1999 से 2004 तक भाजपा के मांझी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष और 2004 से 2007 तक प्रदेश मंत्री रहे।
चुनावी राजनीति की बात करें तो वर्ष 2000 के स्थानीय निकाय चुनाव में वे पार्षद चुने गए और 2000 से 2005 तक नगर परिषद ओरछा के उपाध्यक्ष रहे। इसके बाद उन्होंने टीकमगढ़ जिले में वर्ष 2008 से 2010 तक जिला मंत्री और 2012 से 2016 तक जिला उपाध्यक्ष के रूप में संगठन को मजबूत किया। वर्ष 2016 से जून 2021 तक वे भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य भी रहे।
महेश केवट की उम्मीदवारी राजनीतिक गलियारों में इसलिए भी सबसे बड़ी चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि करीब चार साल पहले उनका नाम एक बड़े विवाद से जुड़ा था। वर्ष 2022 में महेश केवट और भाजपा के 10 अन्य कार्यकर्ताओं (कुल 11 लोग) को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। उन पर आरोप था कि निवाड़ी नगर परिषद अध्यक्ष के चुनाव में इन नेताओं ने कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था।
ऐसे में प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर इन सभी 11 लोगों को छह साल के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से बाहर कर दिया गया था।
महेश केवट का राजनीतिक सफर जितना असरदार रहा है, उतना ही स्थानीय चर्चा का भी हिस्सा रहा है। हाल ही में उन्हें मछुआरा कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया। यह जिम्मेदारी उन्हें 6 मई को मिली थी।
इससे पहले 27 जून 2022 के विवाद की पृष्ठभूमि में यह आदेश आया था। इस कदम से ओरछा और निवाड़ी के भाजपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी दिखने लगी थी। लोग सवाल कर रहे थे कि जब उन्हें छह साल के लिए निष्कासित किया गया था, तो फिर यह पद कैसे मिला।
जब इस पूरे विवाद और निष्कासन के बारे में महेश केवट से पूछा गया, तो उन्होंने 27 जून 2022 को जारी किए गए निष्कासन पत्र को पूरी तरह फर्जी बताया था। उनका कहना था कि कांग्रेस पार्टी बस भ्रम फैला रही है। वे पिछले 30 सालों से पार्टी के समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ता रहे हैं।
राजनीति में समय का पहिया बेहद अजीब ढंग से घूमता है। जो महेश केवट कभी कांग्रेस के पक्ष में वोटिंग करने के आरोप में भाजपा से बाहर किए गए थे, आज वही कांग्रेस के खिलाफ भाजपा का सबसे बड़ा तीसरा दांव बनकर उभरे हैं।
संगठन विरोधी आरोपों के बाद उनकी पार्टी में वापसी हुई और उनके निष्कासन को रद्द कर दिया गया था। इसके बाद उन्हें मध्य प्रदेश मछुआरा कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था। यहीं से उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा मिला और अब भाजपा ने उन्हें सीधे राज्यसभा की लड़ाई में उतार दिया है।
कांग्रेस की
भाजपा ने महेश केवट को कांग्रेस की कद्दावर उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ मैदान में उतार दिया है। इससे राज्यसभा चुनाव सीधे‑सीधे रोचक हो गया है। यह मुकाबला पहले आसान और सिर्फ नंबरों पर टिका लग रहा था, अब इस कदम के बाद वफादारी, क्रॉस वोटिंग और राजनीति संभालने की सबसे बड़ी परीक्षा बन गया है।
राज्यसभा चुनाव का पूरा शेड्यूल तय हो चुका है। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 8 जून है। नामांकन पत्रों की जांच 9 जून को होगी और नाम वापसी की अंतिम तारीख 11 जून रखी गई है। मतदान 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा। उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना भी होगी। यानी 18 जून की शाम तक तस्वीर साफ हो जाएगी।
मध्य प्रदेश विधानसभा में भाजपा विधायकों की संख्या के अनुसार दोनों सीटें पार्टी के खाते में आना लगभग तय माना जा रहा है।
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बता दें कि इसी (11) नंबर के करीब बीजेपी को राज्यसभा में तीसरी सीट पाने के लिए वोटों की जरूरत है।
गणित विषय में स्नातक (Graduate in Mathematics) महेश केवट इस सियासी जोड़-तोड़ और अंकगणित को बखूबी समझते हैं। शायद यही वजह है कि भाजपा नेतृत्व ने भी उनके इस अनुभव पर इतना बड़ा दांव लगाया है।
कौन हैं महेश केवट?
तीन दशकों का लंबा जमीनी राजनीतिक सफर
1984 में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में मुख्य शिक्षक के तौर पर काम करना शुरू किया और 1992 तक सेवा दी थी। इसके बीच 1990 से 1992 तक वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के ब्लॉक संयोजक और विश्व हिंदू परिषद (VHP) की निवाड़ी प्रखंड कार्यकारिणी में सचिव भी रहे। साल 1995 में महेश केवट ने भाजपा की मुख्यधारा की राजनीति में कदम रखा था।
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नगर परिषद से राष्ट्रीय मंच तक
चुनावी राजनीति की बात करें तो वर्ष 2000 के स्थानीय निकाय चुनाव में वे पार्षद चुने गए और 2000 से 2005 तक नगर परिषद ओरछा के उपाध्यक्ष रहे। इसके बाद उन्होंने टीकमगढ़ जिले में वर्ष 2008 से 2010 तक जिला मंत्री और 2012 से 2016 तक जिला उपाध्यक्ष के रूप में संगठन को मजबूत किया। वर्ष 2016 से जून 2021 तक वे भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य भी रहे।
विवादों में भी घिर चुके महेश केवट
पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में हुए थे निष्कासित
ऐसे में प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर इन सभी 11 लोगों को छह साल के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से बाहर कर दिया गया था।
महेश केवट की नियुक्ति पर उठे थे सवाल
इससे पहले 27 जून 2022 के विवाद की पृष्ठभूमि में यह आदेश आया था। इस कदम से ओरछा और निवाड़ी के भाजपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी दिखने लगी थी। लोग सवाल कर रहे थे कि जब उन्हें छह साल के लिए निष्कासित किया गया था, तो फिर यह पद कैसे मिला।
निष्कासन पत्र पर केवट का रुख और सफाई
निष्कासन से राज्यमंत्री के दर्जे तक की कहानी
संगठन विरोधी आरोपों के बाद उनकी पार्टी में वापसी हुई और उनके निष्कासन को रद्द कर दिया गया था। इसके बाद उन्हें मध्य प्रदेश मछुआरा कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था। यहीं से उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा मिला और अब भाजपा ने उन्हें सीधे राज्यसभा की लड़ाई में उतार दिया है।
कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन के सामने केवट की चुनौती
18 जून को होगा चुनाव
मध्य प्रदेश विधानसभा में भाजपा विधायकों की संख्या के अनुसार दोनों सीटें पार्टी के खाते में आना लगभग तय माना जा रहा है।
FAQ
- महेश केवट कौन हैं?
महेश केवट निवाड़ी जिले के ओरछा धाम के रहने वाले हैं और तीन दशकों से अधिक समय से BJP से जुड़े हैं। वे RSS, ABVP और VHP में काम कर चुके हैं और जमीनी स्तर पर लंबा संगठनात्मक अनुभव रखते हैं। - महेश केवट को BJP से क्यों निष्कासित किया गया था?
2022 में निवाड़ी नगर परिषद अध्यक्ष के चुनाव में महेश केवट सहित 11 भाजपा कार्यकर्ताओं पर आरोप लगा कि उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया। इस पर प्रदेश नेतृत्व ने सभी 11 लोगों को छह साल के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था।
कौन हैं मीनाक्षी नटराजन? जिनके लिए कांग्रेस ले रही पांच लाख परसेंट की जिम्मेदारी
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