मध्य प्रदेश में वायु प्रदूषण को लेकर सतना बना मिसाल, राजधानी का हाल अब भी बेहाल
Amresh Kushwaha | Jul 28, 2026, 15:45 IST
एमपी वायु प्रदूषण रिपोर्ट
मध्य प्रदेश में वायु प्रदूषण के आंकड़ों में बड़ा फर्क दिखा है। सतना में गंभीर प्रदूषण वाले दिन 30 से घटकर शून्य हो गए, जबकि पीथमपुर में 2025 में 33 दिन हवा खतरनाक रही। भोपाल में सुधार हुआ पर खतरा अभी बाकी है। लोकसभा में यह जानकारी सामने आई है...
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश के शहरों की हवा में पिछले तीन साल में बड़ा बदलाव आया है।
- सतना में गंभीर प्रदूषण वाले दिन 2023 के 30 से घटकर शून्य हो गए हैं।
- पीथमपुर में हालात बिगड़े, 2025 में 33 दिन हवा बेहद खतरनाक रही।
- भोपाल में सुधार हुआ, लेकिन 2025 में भी 8 दिन गंभीर प्रदूषण दर्ज किया गया।
- यह जानकारी लोकसभा में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने दी है।
सतना ने कैसे किया सुधार
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पीथमपुर बना सबसे प्रदूषित
इसका मतलब है कि साल में लगभग हर 11वें दिन हवा बेहद खतरनाक रही। उपलब्ध शहरों के आंकड़ों में पीथमपुर की स्थिति सबसे खराब है। लगातार तीन साल से यहां प्रदूषण के दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। इससे शहर के लोगों की सेहत पर सीधा असर पड़ रहा है।
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भोपाल में राहत, फिर भी खतरा
राजधानी अब भी गंभीर प्रदूषण से पूरी तरह मुक्त नहीं हो सकी है। सागर और रतलाम जैसे शहरों में भी हालात मिलेजुले रहे। सागर में गंभीर दिन 2023 के 8 से बढ़कर 2025 में 16 हो गए। रतलाम में यह आंकड़ा 5 दिन पर स्थिर रहा।
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सरकार का एनसीएपी प्लान
इस योजना के तहत देश के 24 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 130 शहरों को मदद दी गई है। इन शहरों को प्रदूषण कम करने के लिए 16 हजार 423 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि जारी हुई है। यह राशि शहरों के प्रदर्शन के आधार पर दी गई है।
इसका नतीजा है कि 108 शहरों में पीएम-10 (Particulate Matter 10) की मात्रा कम हुई है। इनमें से 72 शहरों में यह कमी 20 प्रतिशत से ज्यादा रही। वहीं 26 शहरों में यह सुधार 40 प्रतिशत से भी अधिक दर्ज हुआ। साल 2025-26 में 14 शहर तय वायु गुणवत्ता मानक तक पहुंच गए हैं। साल 2017-18 में ऐसे सिर्फ 6 शहर थे।
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उद्योगों पर सख्त निगरानी
कई उद्योगों को नियमित रूप से अनुपालन रिपोर्ट भी देनी होती है। सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले 17 उद्योगों में खास सिस्टम लगाया गया है। इसे ओसीईएमएस यानी ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (Online Continuous Emission Monitoring System) कहा जाता है। इससे प्रदूषण के आंकड़े सीधे बोर्ड तक पहुंच जाते हैं। नियम तोड़ने पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत कार्रवाई होती है।
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हरियाली बढ़ाने की योजना
इसके लिए राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण निधि से पैसा दिया जा रहा है। राष्ट्रीय हरित भारत मिशन के तहत 18 राज्यों को बड़ी मदद मिली है। यहां 1.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में वनीकरण होना है। इसके लिए 1,076 करोड़ रुपए से ज्यादा जारी किए गए हैं। वहीं प्रतिपूरक वनीकरण निधि से पिछले पांच साल में 6,769 करोड़ रुपए से ज्यादा राज्यों को मिले हैं।
जलवायु मिशन पर काम जारी
इसके अलावा जल जीवन मिशन और अटल भूजल योजना भी चल रही है। जल शक्ति अभियान और सतत कृषि मिशन भी इसी दिशा में काम कर रहे हैं। निकरा यानी एनआईसीआरए (National Innovations in Climate Resilient Agriculture) जैसी योजनाएं भी जारी हैं। सरकार का दावा है कि इन सब कोशिशों से आने वाले सालों में और सुधार दिखेगा।
FAQ
- मध्य प्रदेश में सबसे प्रदूषित शहर कौन सा है?
2025 के आंकड़ों के अनुसार पीथमपुर सबसे प्रदूषित शहर रहा। यहां 33 दिन हवा गंभीर श्रेणी में दर्ज हुई। यानी साल में लगभग हर 11वें दिन हवा बेहद खतरनाक रही। यह प्रदेश के बाकी शहरों की तुलना में सबसे खराब आंकड़ा है। - सतना में प्रदूषण कैसे कम हुआ?
सतना में 2023 में 30 दिन गंभीर प्रदूषण दर्ज हुआ था। इसके बाद 2024 और 2025 में यह आंकड़ा शून्य हो गया। लगातार दो साल तक शहर में एक भी गंभीर प्रदूषण वाला दिन नहीं आया। यह प्रदेश का सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है। - एनसीएपी योजना क्या है?
एनसीएपी यानी राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम केंद्र सरकार की योजना है। इसका मकसद देश के प्रदूषित शहरों में हवा की गुणवत्ता सुधारना है। इसके तहत 130 शहरों को प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन राशि दी गई है। इससे 108 शहरों में पीएम-10 की मात्रा में कमी आई है।
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