एमपी में नियमों की अनदेखी: बिना पंजीयन सड़कों पर उतरीं बसें, जानें पूरा विवाद
Manya Jain | Jun 15, 2026, 16:16 IST
mp bus registration vivad 2440 buses
MP में 1 सितंबर 2025 के बाद 2440 बसों का पंजीयन बिना टाइप अप्रूवल के हुआ। बस ऑनर्स एसोसिएशन ने CM यादव से जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्यप्रदेश में 1 सितंबर 2025 के बाद 2440 बसों का पंजीयन किया गया।
- आरोप है कि इन बसों के पंजीयन के समय जरूरी टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट मौजूद नहीं था।
- इसमें स्कूल बसें, यात्री बसें और निजी बसें सभी शामिल हैं।
- बस ऑनर्स एसोसिएशन ने बस मालिकों को दोषी नहीं माना।
- एसोसिएशन ने पंजीयन करने वाले अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है।
MP BUS OWNERS ASSOCIATION LETTER TO CM
2440 बसों का नियम विरुद्ध पंजीयन
इनमें एक हजार 487 यात्री बसें, 745 शैक्षणिक संस्थाओं की बसें, 141 स्कूल बसें और 67 निजी बसें शामिल हैं। इन सभी का पंजीयन बिना अनिवार्य टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट (Type Approval Certificate) के किया गया।
क्या बदला था नियम में
पहलेबस बॉडी बनानेवाला निर्माताखुद फॉर्म22बी भरकर पंजीयनकरा लेता था। अबयह फॉर्म खत्म करदिया गयाहै। नए नियम के तहत13 या अधिकयात्री क्षमतावाली हर बस कोसरकार कीमान्यता प्राप्तटेस्टिंग एजेंसी सेटाइप अप्रूवलसर्टिफिकेट लेनाअनिवार्य है।
यहसर्टिफिकेट एआईएस:052(AIS:052 –Automotive IndustryStandard for busbody) मानकों केतहत मिलता हैऔर इसकाप्रमाण पत्र फॉर्म53 या 153होता है।
नया नियम क्या कहता है
फिर भी हुए पंजीयन, उठे सवाल
इंदौर सबसे आगे, 387 बसें
| जिला | बसों की संख्या |
|---|---|
| इंदौर | 387 |
| नीमच | 247 |
| देवास | 220 |
| उज्जैन | 192 |
| आगर मालवा | 168 |
| भोपाल | 166 |
बस मालिक नहीं, अफसर हैं जिम्मेदार
विभाग ने क्या कहा
स्कूल बसों पर सबसे ज्यादा चिंता
CM यादव से कार्रवाई की मांग
FAQ
- टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट क्या होता है और यह क्यों जरूरी है?
टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट एक सरकारी दस्तावेज है जो बताता है कि वाहन सभी सुरक्षा और तकनीकी मानकों पर खरा उतरता है। केंद्र सरकार ने मार्च 2024 में इसे बस पंजीयन के लिए अनिवार्य किया। बिना इसके पंजीयन नियम विरुद्ध माना जाता है। - इस विवाद में बस मालिकों की क्या जिम्मेदारी है?
बस ऑनर्स एसोसिएशन का कहना है कि मालिक दस्तावेज जमा करते हैं, पंजीयन की जांच अधिकारी की जिम्मेदारी है। अधूरे दस्तावेजों पर पंजीयन रोकना अफसर का काम था। इसलिए एसोसिएशन बस मालिकों को दोषी नहीं मानती। - इन बसों की वैधता अब क्या होगी?
परिवहन आयुक्त ने सभी जिला परिवहन अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। जांच पूरी होने के बाद सरकार इन बसों की वैधता पर फैसला करेगी। यदि पंजीयन रद्द हुए तो बस संचालकों को दोबारा प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।
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