कांग्रेस का संगठन महामंत्री फॉर्मूला फिर मैदान में, 71 जिलों में नियुक्ति, क्या दोहराएगा पुरानी नाकामी?
Ramanand Tiwari | Mar 13, 2026, 23:31 IST
Photograph: (THESOOTR)
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने 71 जिलों में संगठन महामंत्री नियुक्त किए गए हैं । कांग्रेस का मानना है कि इससे जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूती मिलेगी।
News In Short
- कांग्रेस ने जिलों में 71 संगठन महामंत्री नियुक्त किए हैं।
- पदाधिकारियों की ट्रेनिंग 16 मार्च से भोपाल में शुरू होगी।
- संगठन महामंत्री स्थानीय स्तर पर पार्टी को मजबूत करेंगे।
- पिछली गलतियों से सबक लेते हुए नया प्रयोग किया गया है।
News In Detail
दिलचस्प बात यह है कि ऐसा ही प्रयोग कमलनाथ सरकार के समय भी किया गया था, लेकिन स्पष्ट रणनीति और स्थानीय भागीदारी के अभाव में वह मॉडल ज्यादा सफल नहीं हो पाया था।
अब कांग्रेस नेतृत्व ने फिर वही फॉर्मूला अपनाया है, ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह प्रयोग इस बार संगठन को मजबूती देगा या फिर पुरानी कहानी दोहराएगा।
जिलों में ‘संगठन महामंत्री’ बनाकर नई रणनीति
इन पदाधिकारियों का काम होगा...
- संगठन की गतिविधियों को जिलों में सक्रिय करना।
- जिलाध्यक्ष के साथ तालमेल बनाकर पार्टी को मजबूत करना।
- कांग्रेस की नीति और कार्यक्रमों को कार्यकर्ताओं तक पहुंचाना।
- विधानसभा चुनाव की तैयारियों में स्थानीय टीम को संगठित करना।
- कांग्रेस का मानना है कि इससे जमीनी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में मदद मिलेगी।
16 मार्च से भोपाल में शुरू होगा ट्रेनिंग अभियान
मुख्य कार्यक्रम इस प्रकार हैं...
- 16 मार्च (सोमवार): 71 जिलों के संगठन महामंत्रियों की ट्रेनिंग।
- 17 मार्च: वोटर लिस्ट प्रबंधन से जुड़े करीब 250 पदाधिकारियों की ट्रेनिंग।
- 23 मार्च: प्रकोष्ठ, विभाग और मोर्चा संगठनों के अध्यक्षों व जिलाध्यक्षों की ट्रेनिंग।
कमलनाथ सरकार में भी हुआ था ऐसा प्रयोग
कई जिलों में नियुक्तियां सीधे भोपाल से तय कर दी गईं, जिससे स्थानीय स्तर पर असंतोष भी सामने आया। संगठन में स्पष्ट जिम्मेदारियां तय नहीं होने के कारण यह मॉडल ज्यादा प्रभावी साबित नहीं हो पाया।
इस बार जिलाध्यक्षों को दी गई चयन की छूट
- जिसे संगठन का अनुभव हो।
- कांग्रेस की नीति और विचारधारा की समझ हो।
- कार्यकर्ताओं के साथ संवाद स्थापित कर सके।
ट्रेनिंग के बाद जिलों में भेजे जाएंगे ‘ट्रेंड नेता’
कांग्रेस का दावा- संगठन को मिलेगी मजबूती
बड़ा सवाल: प्रयोग सफल होगा या फिर पुरानी कहानी?
कांग्रेस पहले भी इस तरह का प्रयोग कर चुकी है, लेकिन परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। ऐसे में अब देखना होगा कि 71 जिलों में बनाया गया यह नया संगठनात्मक ढांचा वास्तव में कांग्रेस को मजबूत करता है या फिर यह भी कागजी कवायद बनकर रह जाता है।
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