MP कांग्रेस में राज्यसभा पर सियासी संग्राम: पटवारी के इनकार के बीच विंध्य की हिस्सेदारी से बढ़ा दबाव

Ramanand Tiwari | Mar 31, 2026, 23:19 IST
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Photograph: (THESOOTR)

BHOPAL. मध्य प्रदेश कांग्रेस में राज्यसभा सीट के लिए सियासी संग्राम तेज हो गया है। जीतू पटवारी के इनकार के बाद दावेदार बढ़े, विंध्य क्षेत्र की हिस्सेदारी पर भी विवाद।

news In Short

  • पटवारी के इनकार के बाद राज्यसभा सीट के दावेदार बढ़े।
  • सज्जन वर्मा ने दावेदारों के बीच तंज कसा।
  • विंध्य क्षेत्र ने प्रतिनिधित्व की मांग की।
  • क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए दबाव बढ़ा।
  • आलाकमान के लिए दावेदारों में से चयन मुश्किल।

News In Detail

मध्य प्रदेश कांग्रेस में राज्यसभा सीट को लेकर खींचतान अब खुलकर सामने है। एक तरफ प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने खुद को दौड़ से बाहर बताया है, तो दूसरी ओर कई नेता दावे ठोक रहे हैं। इसी बीच विंध्य क्षेत्र से ब्राह्मणों की मजबूत हिस्सेदारी की मांग ने सियासी गणित को और उलझा दिया है।

क्या है पूरा मामला?

राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस में दावेदारों की लंबी कतार बन चुकी है। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से नेता संगठन और आलाकमान के सामने अपनी पकड़ दिखाने में जुटे हैं। इससे पार्टी के भीतर संतुलन बनाना चुनौती बन गया है।

पटवारी के बयान ने क्या बदला?

प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पहले ही साफ कर चुके हैं कि वे राज्यसभा के दावेदार नहीं हैं। हालांकि, उनके नाम की चर्चा पहले चल रही थी, जिससे यह संकेत मिला कि पार्टी के अंदर कई स्तर पर नाम आगे बढ़ाए जा रहे थे। पटवारी के इनकार के बाद अब बाकी दावेदार और सक्रिय हो गए हैं।

सज्जन वर्मा का बयान, बढ़ी सियासत

पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने भी दावेदारी के बीच तंज कसते हुए माहौल गरमा दिया। उन्होंने कहा कि अगर उनके जैसे मजबूत नेटवर्क वाले नेता राज्यसभा पहुंचते हैं, तो “दूसरे नेताओं की दुकान बंद हो जाएगी।” इस बयान को पार्टी के अंदरूनी शक्ति संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है।

विंध्य की हिस्सेदारी ने बढ़ाया दबाव

रीवा संभाग सहित पूरे विंध्य क्षेत्र के ब्राह्मण नेताओं ने अब अपनी हिस्सेदारी को लेकर खुलकर आवाज उठाई है। रीवा, सीधी, सतना, सिंगरौली, मऊगंज और मैहर के नेताओं ने भोपाल में नेतृत्व से मुलाकात कर स्पष्ट संदेश दिया कि बिना उचित प्रतिनिधित्व के क्षेत्र में पार्टी को मजबूत करना मुश्किल होगा।

आलाकमान तक पहुंचा मुद्दा

प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से मुलाकात कर अपनी बात रखी। नेताओं ने संख्या के अनुपात में भागीदारी की बात करते हुए राज्यसभा में विंध्य क्षेत्र को मौका देने की मांग की।

क्यों अहम है विंध्य का फैक्टर?

विंध्य क्षेत्र लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ बना हुआ है। कांग्रेस यहां लगातार कमजोर रही है, ऐसे में क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक समीकरण साधना पार्टी के लिए जरूरी हो गया है। स्थानीय नेताओं का मानना है कि सही प्रतिनिधित्व से यहां स्थिति बदल सकती है।

कौन-कौन हैं रेस में?

राज्यसभा सीट के लिए जिन नामों की चर्चा तेज है। इनमें पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. विनोद शर्मा, ग्वालियर-चंबल, महाकौशल और बुंदेलखंड के कई वरिष्ठ नेता। इनके अलावा भी कई नेता अंदरखाने लॉबिंग में सक्रिय बताए जा रहे हैं।

विंध्य के नेताओं का तर्क...

  • लंबे समय से कुछ वर्गों की अनदेखी हो रही है।
  • संगठन और टिकट वितरण में संतुलन नहीं दिखा।
  • इसका सीधा फायदा भाजपा को मिल रहा है।
उनका मानना है कि अब संतुलन नहीं साधा गया तो नुकसान और बढ़ सकता है।

रणनीति या अंदरूनी दबाव?

राजनीतिक विश्लेषक इसे सिर्फ एक सीट की लड़ाई नहीं मान रहे। यह पार्टी के भीतर क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को लेकर बढ़ते दबाव का संकेत भी है। ऐसे में आलाकमान के लिए फैसला आसान नहीं होगा।

आगे क्या?

अब नजर इस बात पर है कि कांग्रेस नेतृत्व किस नाम पर मुहर लगाता है। क्या विंध्य को प्राथमिकता मिलेगी, या फिर किसी और समीकरण के तहत फैसला होगा- यह जल्द साफ हो सकता है। फिलहाल इतना तय है कि राज्यसभा की यह एक सीट, कांग्रेस के भीतर बड़े सियासी संकेत दे रही है।

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