MP में एक्शन का कॉपी-पेस्ट फॉर्मूला, हादसे दर हादसे, फिर भी नहीं चेत रही सरकार
CHAKRESH | Sept 08, 2026, 12:42 IST
MP में सरकारी लापरवाही
मध्य प्रदेश में लगातार हो रहे हादसों और प्रशासनिक लापरवाही के बावजूद सरकार का रवैया नहीं बदला है। हर घटना के बाद केवल निचले कर्मचारियों पर कार्रवाई और जांच समितियों के नाम पर मामले को ठंडा करने का एक ही ढर्रा अपनाया जा रहा है।
हादसे दर हादसे, मौत दर मौत… लगता है मध्य प्रदेश के लोगों की यही कहानी है। मजाल है जिम्मेदारों के सिर पर जूं भी रेंगी हो या आत्मा कलेसी हो… साल 2025 से आज तक प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में सरकारी लापरवाही मौत बनकर सामने आई है, लेकिन एक्शन का पैटर्न एक सा ही नजर आता है।
द सूत्र (thesootr) ने सभी बड़े हादसों में सरकारी कार्रवाई की समीक्षा में पाया कि हर घटना के तुरंत बाद निचले स्तर के कर्मचारियों (जैसे कॉन्ट्रैक्ट वर्कर, संविदा, सब-इंस्पेक्टर, पायलट और ऑपरेटर) पर तुरंत सस्पेंशन या बर्खास्तगी की कार्रवाई होती है, लेकिन बड़े अधिकारियों और जिम्मेदार नेताओं की जवाबदेही पर बात ही नहीं होती।
जांच रिपोर्ट सबसे बड़ा हथियार बन गई है। जांच के नाम पर मामले को लटका दीजिए। टाइम काटिए, ताकि लोगों की स्मृति से मामले की गंभीरता विस्मृत होती जाए… और बस…
चलिए द सूत्र (thesootr) की इस रिपोर्ट में देखते हैं कैसे हादसे दर हादसे एक ही पैटर्न को फॉलो किया गया है…
1. सागर-
मामला: 6 सितंबर 2026 को सागर जिले की बंडा तहसील के गोगरा खुर्द, नौरोज और पाटन गांवों में जहरीली शराब पीने से मौतें शुरू हुईं। यह मामला लगातार बढ़ता गया। शुरुआत में 10 मौतें बताई गईं, फिर यह आंकड़ा 12 मौतों से बढ़कर 28 मौतों तक और अब 112 मरीज अस्पताल में भर्ती होने तक पहुंच गया। कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने तो 50 मौतों का दावा किया है और एसपी को जेल भेजने की मांग की।
कारण: अवैध और नकली शराब जिसमें मिलावट की आशंका है, जिसकी अभी जांच जारी है।
जिम्मेदार: शराब ठेकेदार समेत 30 लोगों पर केस दर्ज हुआ है। 14 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। आबकारी विभाग की लापरवाही और स्थानीय शराब माफिया की भूमिका सामने आ रही है।
कार्रवाई:
वर्तमान स्थिति: एसपी अनुराग सुजानिया की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि इससे पहले मुरैना में भी उनके कार्यकाल में 24 मौतें हुई थीं। विपक्ष उन्हें हटाने की मांग कर रहा है, लेकिन अभी तक उन पर कार्रवाई नहीं हुई।
मामला: बालाघाट के बैगा आदिवासी बहुल बिरसा ब्लॉक क्षेत्र (मछुरदा, कोरका, मातला, कोंडेकसा, अडोरी, बोंदारी गांव) में जुलाई 2026 से खसरा, मलेरिया और कुपोषण के मिले-जुले असर से बच्चों की मौतें हुईं। सरकारी आंकड़ा शुरू में सिर्फ 8 मानता रहा, जबकि वास्तविक आंकड़ा कम से कम 19 आदिवासी बच्चों तक पहुंच गया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तो 30 मौतों का दावा किया है।
कारण- 6 महीने से पोषण आहार का वितरण न होना, टीकाकरण में कमी, जिससे बच्चे कुपोषण के साथ मलेरिया-डेंगू-टाइफाइड की चपेट में आए। प्रदेश भर में इस साल 8 महीनों में ही खसरे के 1,450 से ज्यादा मामले मिले।
जिम्मेदार: स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही — समय पर सूचना मिलने के बावजूद सीएमएचओ और स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति की गंभीरता नहीं समझी और ठोस कदम नहीं उठाए। पोषण आहार वितरण में लापरवाही भी सामने आई।
कार्रवाई:
वर्तमान स्थिति: यह मामला अभी भी सक्रिय है- राहुल गांधी और कांग्रेस लगातार केंद्र व राज्य सरकार को घेर रहे हैं। हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है, और मृत बच्चों के परिवारों को आर्थिक मदद की मांग उठ रही है।
मामला: 30 अप्रैल 2026 की शाम जबलपुर के बरगी बांध (नर्मदा बैकवाटर) में एक 20 साल पुरानी क्रूज बोट, जिसमें 41 यात्री सवार थे, अचानक आए तूफान और तेज हवाओं के कारण पलट गई थी। इसमें 28 लोगों को बचा लिया गया, लेकिन 4 दिन के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद कुल 13 मौतें हुईं (8 महिलाएं, 4 बच्चे शामिल)।
कारण- बोट बिना बीमा और मंजूरी के चल रही थी, ओवरलोडेड थी और क्रूज का एक इंजन पहले से खराब था जिसकी सूचना पायलट ने पहले ही प्रबंधन को दी थी- फिर भी सिर्फ अस्थायी मरम्मत कर बोट को दोबारा चलाया गया था।
जिम्मेदार: शुरुआती जांच में तकनीकी लापरवाही और इंजन की खराबी की पूर्व-चेतावनी को नजरअंदाज करना सामने आया था। जिन अधिकारियों ने क्रूज की फिटनेस रिपोर्ट को मंजूरी दी, उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में है।
कार्रवाई:
वर्तमान स्थिति: पायलट, हेल्पर और टिकट इंचार्ज नौकरी से निकाले जा चुके हैं; न्यायिक जांच आयोग अपनी रिपोर्ट अंतिम चरण में तैयार कर रहा है। ऊपरी स्तर के अधिकारियों (जिन्होंने फिटनेस मंजूरी दी) पर अभी कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है- पर्यटन राज्यमंत्री ने कहा था कि जिम्मेदारी अंतिम रिपोर्ट के बाद ही तय होगी।
मामला: दिसंबर 2025-जनवरी 2026 में इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में सीवेज लीक होकर नगर निगम की मुख्य पेयजल पाइपलाइन में मिल गया था। इससे कुल 36 मौतें हुईं थी (जिनमें से 24 मौतों का कारण सीधे दूषित पानी बताया गया, बाकी 12 का कारण अस्पष्ट रहा)। 398 से ज्यादा मरीज अस्पताल में भर्ती हुए थे।
कारण- सड़ी हुई/पुरानी पाइपलाइन जिसे समय पर नहीं बदला गया और एक स्ट्रक्चरल खराबी जिससे सीवेज की धारा मुख्य पाइपलाइन में मिल गई। बाद में कांग्रेस की जांच में इंदौर के 240 पानी के सैंपलों में से 98 फेल पाए गए, जिनमें ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला।
जिम्मेदार: जांच आयोग की 600 पन्नों की रिपोर्ट के अनुसार- यह राजनीतिक नहीं बल्कि प्रशासनिक चूक थी। दोषी ठहराए गए: सब इंजीनियर निवास बागरी, इंचार्ज टेक्निकल शरद सोनी, तत्कालीन एडिशनल कमिश्नर भव्या मित्तल। कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव और पार्षद कमल वाघेला की भूमिका भी जांच के दायरे में रही।
कार्रवाई: हाईकोर्ट ने 27 जनवरी 2026 को रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग बनाया था। दिलचस्प बात यह कि इस रिपोर्ट में सीनियर आईएएस अफसरों को क्लीन चिट दे दी गई थी। तत्कालीन निगम आयुक्त शिवम वर्मा और पूर्व निगमायुक्त प्रतिभा पाल दोनों को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया। साथ ही एमआईसी (मेयर इन काउंसिल) को भी क्लीन चिट दी गई। स्थानीय पार्षद कमल वाघेला को भी राहत मिली।
जांच रिपोर्ट: भागीरथपुरा कांड की रिपोर्ट तैयार होकर हाईकोर्ट में पेश हो चुकी है, लेकिन हाईकोर्ट ने रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है- याचिकाकर्ता एडवोकेट रितेश इनानी की जनहित याचिका पर भी कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा।
वर्तमान स्थिति: निचले स्तर के अधिकारी (सब इंजीनियर, टेक्निकल इंचार्ज, एडिशनल कमिश्नर) जिम्मेदार ठहराए गए हैं, लेकिन बड़े आईएएस अफसरों को क्लीन चिट मिल गई है- जिस पर सवाल उठ रहे हैं कि रिपोर्ट रैंडम आधार पर क्लीन चिट दे रही है। रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है, इसलिए आगे की न्यायिक/प्रशासनिक कार्रवाई अनिश्चित है।
5. छिंदवाड़ा-
मामला: सितंबर-अक्टूबर 2025 में छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बैतूल में कुल 24 बच्चों की मौत (बाद में आंकड़ा बढ़कर 26-30 तक पहुंचा) कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से हुई थी। मामूली सर्दी-जुकाम-बुखार वाले बच्चों को परासिया के एक सरकारी डॉक्टर ने अपने निजी क्लीनिक में यह सिरप लिखा था। जांच में सिरप में 46.28% डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) पाया गया, जबकि सुरक्षित सीमा सिर्फ 0.1% है - यह एक घातक नेफ्रोटॉक्सिक पदार्थ है जिससे बच्चों की किडनी फेल हो गई।
जिम्मेदार: मुख्य आरोपी डॉ. प्रवीण सोनी (जिन्होंने कमीशन के लिए सिरप लिखा था), तमिलनाडु की श्रीसन फार्मास्युटिकल्स कंपनी के मालिक रंगनाथन, और ज्योति सोनी, सौरभ जैन, राजेश सोनी, सतीश वर्मा, शैलेश सिंह पांड्या सहित कई मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव।
कार्रवाई:
वर्तमान स्थिति: डॉ. प्रवीण सोनी की एक के बाद एक कई जमानत याचिकाएं हाईकोर्ट से खारिज हो चुकी हैं- फरवरी 2026 में जमानत से इनकार, फिर जुलाई 2026 में दूसरी जमानत याचिका भी खारिज। वे अभी भी जेल में हैं। दो मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स को हालांकि 9 महीने बाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी।
द सूत्र (thesootr) ने सभी बड़े हादसों में सरकारी कार्रवाई की समीक्षा में पाया कि हर घटना के तुरंत बाद निचले स्तर के कर्मचारियों (जैसे कॉन्ट्रैक्ट वर्कर, संविदा, सब-इंस्पेक्टर, पायलट और ऑपरेटर) पर तुरंत सस्पेंशन या बर्खास्तगी की कार्रवाई होती है, लेकिन बड़े अधिकारियों और जिम्मेदार नेताओं की जवाबदेही पर बात ही नहीं होती।
जांच रिपोर्ट सबसे बड़ा हथियार बन गई है। जांच के नाम पर मामले को लटका दीजिए। टाइम काटिए, ताकि लोगों की स्मृति से मामले की गंभीरता विस्मृत होती जाए… और बस…
चलिए द सूत्र (thesootr) की इस रिपोर्ट में देखते हैं कैसे हादसे दर हादसे एक ही पैटर्न को फॉलो किया गया है…
1. सागर- जहरीली शराब कांड
मामला: 6 सितंबर 2026 को सागर जिले की बंडा तहसील के गोगरा खुर्द, नौरोज और पाटन गांवों में जहरीली शराब पीने से मौतें शुरू हुईं। यह मामला लगातार बढ़ता गया। शुरुआत में 10 मौतें बताई गईं, फिर यह आंकड़ा 12 मौतों से बढ़कर 28 मौतों तक और अब 112 मरीज अस्पताल में भर्ती होने तक पहुंच गया। कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने तो 50 मौतों का दावा किया है और एसपी को जेल भेजने की मांग की।
कारण: अवैध और नकली शराब जिसमें मिलावट की आशंका है, जिसकी अभी जांच जारी है।
जिम्मेदार: शराब ठेकेदार समेत 30 लोगों पर केस दर्ज हुआ है। 14 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। आबकारी विभाग की लापरवाही और स्थानीय शराब माफिया की भूमिका सामने आ रही है।
कार्रवाई:
- सस्पेंड: सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, सहायक जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते, बंडा सर्कल की आबकारी सब-इंस्पेक्टर रोशनी उरेती, गोगरा चौकी प्रभारी निलंबित।
- तबादला/अटैच: उपायुक्त एवं संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी नीरजा श्रीवास्तव को ग्वालियर मुख्यालय में अटैच किया गया है।
- बंडा एसडीएम आरती यादव को हटाकर कलेक्टर कार्यालय में अटैच किया गया है। साथ ही, संजय कुमार जैन नए एसडीएम बने हैं।
- 30 नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर, 14 गिरफ्तार आरोपियों को 6 दिन की पुलिस रिमांड में रखा गया है।
- मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए हैं।
वर्तमान स्थिति: एसपी अनुराग सुजानिया की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि इससे पहले मुरैना में भी उनके कार्यकाल में 24 मौतें हुई थीं। विपक्ष उन्हें हटाने की मांग कर रहा है, लेकिन अभी तक उन पर कार्रवाई नहीं हुई।
2. बालाघाट- कुपोषण/खसरा से बच्चों की मौत
मामला: बालाघाट के बैगा आदिवासी बहुल बिरसा ब्लॉक क्षेत्र (मछुरदा, कोरका, मातला, कोंडेकसा, अडोरी, बोंदारी गांव) में जुलाई 2026 से खसरा, मलेरिया और कुपोषण के मिले-जुले असर से बच्चों की मौतें हुईं। सरकारी आंकड़ा शुरू में सिर्फ 8 मानता रहा, जबकि वास्तविक आंकड़ा कम से कम 19 आदिवासी बच्चों तक पहुंच गया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तो 30 मौतों का दावा किया है।
कारण- 6 महीने से पोषण आहार का वितरण न होना, टीकाकरण में कमी, जिससे बच्चे कुपोषण के साथ मलेरिया-डेंगू-टाइफाइड की चपेट में आए। प्रदेश भर में इस साल 8 महीनों में ही खसरे के 1,450 से ज्यादा मामले मिले।
जिम्मेदार: स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही — समय पर सूचना मिलने के बावजूद सीएमएचओ और स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति की गंभीरता नहीं समझी और ठोस कदम नहीं उठाए। पोषण आहार वितरण में लापरवाही भी सामने आई।
कार्रवाई:
- मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. परेश उपलव को पद से हटाया गया, उनकी जगह डिंडोरी के सीएमएचओ डॉ. मनोज पांडे को नई जिम्मेदारी सौंपी गई।
- आईसीएमआर रिपोर्ट के बाद 2 अफसरों पर कार्रवाई।
- डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने गांवों का दौरा किया।
- केंद्र सरकार ने स्क्रीनिंग शुरू करवाई जिसमें 7,711 गंभीर कुपोषित बच्चे मिले, निगरानी तीन गांवों से बढ़ाकर लगभग 50 गांवों तक की गई।
वर्तमान स्थिति: यह मामला अभी भी सक्रिय है- राहुल गांधी और कांग्रेस लगातार केंद्र व राज्य सरकार को घेर रहे हैं। हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है, और मृत बच्चों के परिवारों को आर्थिक मदद की मांग उठ रही है।
3. जबलपुर- बरगी क्रूज हादसा
मामला: 30 अप्रैल 2026 की शाम जबलपुर के बरगी बांध (नर्मदा बैकवाटर) में एक 20 साल पुरानी क्रूज बोट, जिसमें 41 यात्री सवार थे, अचानक आए तूफान और तेज हवाओं के कारण पलट गई थी। इसमें 28 लोगों को बचा लिया गया, लेकिन 4 दिन के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद कुल 13 मौतें हुईं (8 महिलाएं, 4 बच्चे शामिल)।
कारण- बोट बिना बीमा और मंजूरी के चल रही थी, ओवरलोडेड थी और क्रूज का एक इंजन पहले से खराब था जिसकी सूचना पायलट ने पहले ही प्रबंधन को दी थी- फिर भी सिर्फ अस्थायी मरम्मत कर बोट को दोबारा चलाया गया था।
जिम्मेदार: शुरुआती जांच में तकनीकी लापरवाही और इंजन की खराबी की पूर्व-चेतावनी को नजरअंदाज करना सामने आया था। जिन अधिकारियों ने क्रूज की फिटनेस रिपोर्ट को मंजूरी दी, उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में है।
कार्रवाई:
- क्रूज पायलट महेश पटेल, हेल्पर छोटेलाल गोंड, टिकट काउंटर इंचार्ज बृजेंद्र की नौकरी से बर्खास्तगी, साथ ही एक मैनेजर सस्पेंड।
- हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर चालक व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे।
- राज्य सरकार ने रिटायर्ड जस्टिस संजय द्विवेदी की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग गठित किया, जिसे 3 महीने में रिपोर्ट सौंपनी थी।
- सभी नौकाओं-क्रूज का ऑडिट और क्यूआरटी/एसओपी बनाने के आदेश दिए गए थे।
- मृतकों के परिजनों को चार से पांच लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए मुआवजा।
वर्तमान स्थिति: पायलट, हेल्पर और टिकट इंचार्ज नौकरी से निकाले जा चुके हैं; न्यायिक जांच आयोग अपनी रिपोर्ट अंतिम चरण में तैयार कर रहा है। ऊपरी स्तर के अधिकारियों (जिन्होंने फिटनेस मंजूरी दी) पर अभी कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है- पर्यटन राज्यमंत्री ने कहा था कि जिम्मेदारी अंतिम रिपोर्ट के बाद ही तय होगी।
4. इंदौर- भागीरथपुरा दूषित पानी कांड
मामला: दिसंबर 2025-जनवरी 2026 में इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में सीवेज लीक होकर नगर निगम की मुख्य पेयजल पाइपलाइन में मिल गया था। इससे कुल 36 मौतें हुईं थी (जिनमें से 24 मौतों का कारण सीधे दूषित पानी बताया गया, बाकी 12 का कारण अस्पष्ट रहा)। 398 से ज्यादा मरीज अस्पताल में भर्ती हुए थे।
कारण- सड़ी हुई/पुरानी पाइपलाइन जिसे समय पर नहीं बदला गया और एक स्ट्रक्चरल खराबी जिससे सीवेज की धारा मुख्य पाइपलाइन में मिल गई। बाद में कांग्रेस की जांच में इंदौर के 240 पानी के सैंपलों में से 98 फेल पाए गए, जिनमें ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला।
जिम्मेदार: जांच आयोग की 600 पन्नों की रिपोर्ट के अनुसार- यह राजनीतिक नहीं बल्कि प्रशासनिक चूक थी। दोषी ठहराए गए: सब इंजीनियर निवास बागरी, इंचार्ज टेक्निकल शरद सोनी, तत्कालीन एडिशनल कमिश्नर भव्या मित्तल। कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव और पार्षद कमल वाघेला की भूमिका भी जांच के दायरे में रही।
कार्रवाई: हाईकोर्ट ने 27 जनवरी 2026 को रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग बनाया था। दिलचस्प बात यह कि इस रिपोर्ट में सीनियर आईएएस अफसरों को क्लीन चिट दे दी गई थी। तत्कालीन निगम आयुक्त शिवम वर्मा और पूर्व निगमायुक्त प्रतिभा पाल दोनों को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया। साथ ही एमआईसी (मेयर इन काउंसिल) को भी क्लीन चिट दी गई। स्थानीय पार्षद कमल वाघेला को भी राहत मिली।
जांच रिपोर्ट: भागीरथपुरा कांड की रिपोर्ट तैयार होकर हाईकोर्ट में पेश हो चुकी है, लेकिन हाईकोर्ट ने रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है- याचिकाकर्ता एडवोकेट रितेश इनानी की जनहित याचिका पर भी कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा।
वर्तमान स्थिति: निचले स्तर के अधिकारी (सब इंजीनियर, टेक्निकल इंचार्ज, एडिशनल कमिश्नर) जिम्मेदार ठहराए गए हैं, लेकिन बड़े आईएएस अफसरों को क्लीन चिट मिल गई है- जिस पर सवाल उठ रहे हैं कि रिपोर्ट रैंडम आधार पर क्लीन चिट दे रही है। रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है, इसलिए आगे की न्यायिक/प्रशासनिक कार्रवाई अनिश्चित है।
5. छिंदवाड़ा- कोल्ड्रिफ कफ सिरप कांड
मामला: सितंबर-अक्टूबर 2025 में छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बैतूल में कुल 24 बच्चों की मौत (बाद में आंकड़ा बढ़कर 26-30 तक पहुंचा) कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से हुई थी। मामूली सर्दी-जुकाम-बुखार वाले बच्चों को परासिया के एक सरकारी डॉक्टर ने अपने निजी क्लीनिक में यह सिरप लिखा था। जांच में सिरप में 46.28% डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) पाया गया, जबकि सुरक्षित सीमा सिर्फ 0.1% है - यह एक घातक नेफ्रोटॉक्सिक पदार्थ है जिससे बच्चों की किडनी फेल हो गई।
जिम्मेदार: मुख्य आरोपी डॉ. प्रवीण सोनी (जिन्होंने कमीशन के लिए सिरप लिखा था), तमिलनाडु की श्रीसन फार्मास्युटिकल्स कंपनी के मालिक रंगनाथन, और ज्योति सोनी, सौरभ जैन, राजेश सोनी, सतीश वर्मा, शैलेश सिंह पांड्या सहित कई मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव।
कार्रवाई:
- डॉ. प्रवीण सोनी गिरफ्तार, अक्टूबर 2025 से न्यायिक हिरासत में है।
- अपना मेडिकल स्टोर्स का ड्रग लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया था।
- 8 मेडिकल दुकानों के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए गए थे।
- एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन, तमिलनाडु में भी जांच की गई थी।
- पुलिस चार्जशीट में 11 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
वर्तमान स्थिति: डॉ. प्रवीण सोनी की एक के बाद एक कई जमानत याचिकाएं हाईकोर्ट से खारिज हो चुकी हैं- फरवरी 2026 में जमानत से इनकार, फिर जुलाई 2026 में दूसरी जमानत याचिका भी खारिज। वे अभी भी जेल में हैं। दो मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स को हालांकि 9 महीने बाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी।
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