दीपावली पर 24 घंटे अलर्ट पर रहेंगे प्रदेशभर के अस्पताल, गंभीर मरीजों को एयर एंबुलेंस सुविधा मिलेगी: एमपी सरकार की खास तैयारी

Arohi Raj | Sootr Creatives | Nov 04, 2026, 09:24 IST
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MP में दीपावली पर अस्पतालों में 24 घंटे इमरजेंसी व्यवस्था रहेगी। गंभीर बर्न मरीजों को एयर एंबुलेंस की मदद से दूसरे राज्या या जिले में भेजा जाएगा।
MP में दीपावली पर अस्पतालों में 24 घंटे इमरजेंसी व्यवस्था रहेगी। गंभीर बर्न मरीजों को एयर एंबुलेंस की मदद से दूसरे राज्या या जिले में भेजा जाएगा।

दीपावली पर पटाखों से होने वाले हादसों को देखते हुए एमपी सरकार ने खास तैयारी की है। त्योहार के दौरान प्रदेशभर के सरकारी अस्पताल 24 घंटे अलर्ट पर रहेंगे। इसके लिए अस्पतालों में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की 24 घंटे ड्यूटी लगाई जाएगी। इसका मकसद आपात स्थिति में मरीजों को तुरंत इलाज देना है।

खबरों के मुताबिक, दीपावली पर पटाखों और कार्बाइड गन से जलने की घटनाएं होती हैं। कई बार इन हादसों में लोग गंभीर रूप से झुलस जाते हैं। ऐसे मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पतालों तक पहुंचाया जाएगा।

एयर एंबुलेंस से पहुंचेगा बड़ा इलाज

रिपोर्ट के अनुसार, गंभीर बर्न मरीजों को एयर एंबुलेंस से अस्पताल भेजा जाएगा। इसका मकसद उच्च उपचार केंद्रों तक समय पर पहुंचना है। बर्न इंजूरी के मरीजों के लिए यह सबसे अहम पल होता है। सड़क से लंबा सफर कई बार मरीज की हालत को और बिगाड़ सकता है।

ग्रीन पटाखों का काला सच: कम प्रदूषण, पर खतरा बरकरार, अल्ट्राफाइन कणों से स्वास्थ्य को गंभीर जोखिम | The Dark Truth of Green Crackers: Less Pollution, But Danger Remains, Serious Health Risks from Ultrafine Particles
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दीपावली पर पटाखे फोड़ने को लेकर हर साल प्रदूषण और पर्यावरण सुरक्षा की बहस होती है। बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए ग्रीन पटाखों को पारंपरिक आतिशबाजी के विकल्प के रूप में पेश किया गया है। दावा किया जाता है कि ये सामान्य पटाखों की तुलना में कम धुआं और कम प्रदूषण फैलाते हैं।
दीपावली पर पटाखे फोड़ने को लेकर हर साल प्रदूषण और पर्यावरण सुरक्षा की बहस होती है। बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए ग्रीन पटाखों को पारंपरिक आतिशबाजी के विकल्प के रूप में पेश किया गया है। दावा किया जाता है कि ये सामान्य पटाखों की तुलना में कम धुआं और कम प्रदूषण फैलाते हैं।

मरीज को बाहर भेजने का फैसला कलेक्टर करेंगे

दीपावली पर पटाखों से जलने के कुछ मामले गंभीर हो सकते हैं। ऐसे मरीजों को बेहतर इलाज की जरूरत पड़ सकती है। इसके लिए उन्हें बड़े अस्पतालों में भेजा जा सकता है। कुछ मरीजों को दूसरे जिले या राज्य में भी ले जाना पड़ सकता है।

वहीं, सरकार ने इसके लिए विशेष व्यवस्था तय की है। मरीज को दूसरे जिले या राज्य में भेजने से पहले कलेक्टर की मंजूरी जरूरी होगी। इसके लिए जिला कलेक्टर से अप्रूवल लेना होगा। इस व्यवस्था से गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। जरूरत पड़ने पर उन्हें उच्च उपचार केंद्रों तक पहुंचाया जा सकेगा।

दिवाली पर पटाखा जलाते समय 13 साल के बच्चे की अंगुली उड़ी, पेट से चिपकाया हाथ, 21 दिन बाद सर्जरी | 13-year-old boy's finger blown off while lighting Diwali firecracker, hand attached to stomach, surgery after 21 days
दिवाली के पटाखे ने छीनी 13 साल के बच्चे की अंगुली, 21 दिन बाद होगी सर्जरी; पेट से चिपकाया हाथ
30 Oct 2026 ,
By Jyoti Mahender Bhardwaj
दिवाली पर पटाखे जलाने की खुशी एक 13 साल के बच्चे के लिए जिंदगीभर का दर्द बन गई। राजस्थान के हिंडौन में बम जलाकर फेंकते समय बच्चे की दाईं हाथ की तर्जनी अंगुली पटाखे में ही रह गई और तेज धमाके के साथ उड़ गई। यह वही अंगुली थी, जिससे बच्चा पेंसिल पकड़कर लिखता था। गंभीर चोट के बाद उसे पहले स्थानीय अस्पताल और फिर जयपुर रेफर किया गया। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उसका हाथ पट्टियों की मदद से पेट से चिपका दिया। अब बच्चे को सर्जरी के लिए 21 दिन का इंतजार करना पड़ रहा है।
दिवाली पर पटाखे जलाने की खुशी एक 13 साल के बच्चे के लिए जिंदगीभर का दर्द बन गई। राजस्थान के हिंडौन में बम जलाकर फेंकते समय बच्चे की दाईं हाथ की तर्जनी अंगुली पटाखे में ही रह गई और तेज धमाके के साथ उड़ गई। यह वही अंगुली थी, जिससे बच्चा पेंसिल पकड़कर लिखता था। गंभीर चोट के बाद उसे पहले स्थानीय अस्पताल और फिर जयपुर रेफर किया गया। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उसका हाथ पट्टियों की मदद से पेट से चिपका दिया। अब बच्चे को सर्जरी के लिए 21 दिन का इंतजार करना पड़ रहा है।

पहली बार बर्न इंजरी के लिए लागू इमरजेंसी प्रोटोकॉल

राज्य सरकार ने दीपावली पर जलने की घटनाओं को देखते हुए खास तैयारी की है। पहली बार बर्न इंजरी के लिए इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू किया गया है। इसके तहत अस्पताल 24 घंटे अलर्ट रहेंगे। गंभीर मरीजों को एयर एंबुलेंस से बड़े अस्पताल पहुंचाया जाएगा। दूसरे जिले या राज्य में इलाज के लिए भेजने की व्यवस्था भी तय की गई है।

लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव शुभा रंजन शमी ने निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं।

सरकार का मकसद हादसों के बाद मरीजों को समय पर इलाज देना है। दीपावली के दिन भी अस्पतालों में डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ मौजूद रहेंगे। गंभीर मरीजों को जरूरत के अनुसार बड़े उपचार केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा।

इमरजेंसी प्रोटोकॉल का मतलब क्या है?

इमरजेंसी प्रोटोकॉल का मतलब है कि इलाज के लिए पहले से नियम तय होंगे। मरीज को कब और किस अस्पताल भेजना है, यह तय रहेगा। इससे इलाज में देरी नहीं होगी। मरीज को अस्पतालों के चक्कर भी कम लगाने पड़ेंगे। गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को लंबे इलाज की जरूरत पड़ती है। उन्हें ठीक होने के बाद भी समय-समय पर जांच करानी पड़ती है।

हादसा के समय पीड़ित परिजनों को क्या करना होगा?

जले हुए हिस्से को बहते ठंडे पानी से 10 से 20 मिनट तक धोएं। बर्फ, तेल, मक्खन या घरेलू लेप न लगाएं, इससे घाव और बिगड़ता है। घाव को साफ कपड़े से ढकें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। यह सामान्य जानकारी है, इलाज डॉक्टर ही तय करेंगे। अस्पताल में हादसे का सही समय और कारण बताना मदद करता है।

दिवाली पर बच्चों को कार्बाइड गन से दूर रखें: आंखों की रोशनी छिनने का गंभीर खतरा | Keep Children Away From Carbide Guns This Diwali: Serious Risk of Losing Eyesight
इस दिवाली बच्चों को कार्बाइड गन से रखें दूर, पलभर में छिन सकती है आंखों की रोशनी, पिछले साल भी कई बच्चे हुए थे शिकार
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Madhya Pradesh: दिवाली का त्योहार जैसे-जैसे पास आ रहा है, वैसे-वैसे भोपाल में खतरनाक और बैन पटाखों का काला कारोबार भी तेज होने लगा है। इस गन से पिछले साल कई बड़े हादसे हुए थे। इसके बाद भी लोग सबक नहीं ले रहे हैं। धड़ल्ले से प्रतिबंधित कार्बाइड गन (Banned Carbide Gun) खरीद रहे हैं।
Madhya Pradesh: दिवाली का त्योहार जैसे-जैसे पास आ रहा है, वैसे-वैसे भोपाल में खतरनाक और बैन पटाखों का काला कारोबार भी तेज होने लगा है। इस गन से पिछले साल कई बड़े हादसे हुए थे। इसके बाद भी लोग सबक नहीं ले रहे हैं। धड़ल्ले से प्रतिबंधित कार्बाइड गन (Banned Carbide Gun) खरीद रहे हैं।

सुरक्षा के लिए ये करें

बच्चों को पटाखे खुद बनाने या चलाने से दूर रखें। कार्बाइड गन या अनजान पटाखे खरीदने से बचें, खासकर ऑनलाइन वीडियो देखकर। पटाखे हमेशा खुले मैदान में और बड़ों की देखरेख में चलाएं। पटाखे जलाते समय पास में पानी की बाल्टी और साफ पानी रखें।

यह खबर क्यों जरूरी है?

दीपावली पर पटाखों से हर साल कई लोग झुलस जाते हैं। इन हादसों से कई परिवारों की खुशियां मातम में बदल जाती हैं। जले हुए मरीजों को समय पर इलाज मिलना बहुत जरूरी है। सही अस्पताल मिलने से मरीज की जान बच सकती है।

अगर सरकार का यह आदेश लागू होता है, तो लोगों को राहत मिलेगी। खासकर बच्चों और गरीब परिवारों को इसका फायदा होगा। ऐसे परिवारों के लिए बेहतर इलाज मिलना आसान होगा। इसलिए इस आदेश की आधिकारिक कॉपी देखना जरूरी है।

पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली से पहले लिया अहम फैसला | No complete ban on firecrackers, Supreme Court takes important decision before Diwali
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By Aman Vaishnav
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FAQs

  1. दीपावली पर झुलसे मरीजों को एयर एंबुलेंस से कहां भेजा जाएगा?
    अति गंभीर बर्न मरीजों को उच्च उपचार केंद्रों तक एयर एंबुलेंस से भेजा जाएगा, जिससे समय पर इलाज सुनिश्चित किया जा सके।
  2. इमरजेंसी प्रोटोकॉल के तहत कलेक्टर की मंजूरी के बिना क्या मरीज दूसरे राज्य जा सकेगा?
    जी हां, दूसरे जिले या राज्य के अस्पताल में मरीज ले जाने के लिए कलेक्टर की मंजूरी आवश्यक होगी, इसलिए परिजनों को प्रशासन से संपर्क बनाए रखना होगा।
  3. त्योहार के दौरान सरकारी अस्पताल में झुलसे मरीजों का इलाज कैसे होगा?
    त्योहार के दौरान डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ 24 घंटे ड्यूटी पर रहेंगे, जिससे झुलसे मरीजों को तत्काल चिकित्सा सहायता मिल सके।
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