OBC आरक्षण केस से एडवोकेट और एंटी हिन्दू पार्टी के सांसद पी विल्सन को एमपी सरकार ने हटाया, बनाई नई टीम
Sourabh Bhatnagar | Oct 08, 2025, 14:35 IST
MP-Govt-appoints-team-OBC-reservation-Supreme-Court
मध्य प्रदेश सरकार ने 27% OBC आरक्षण मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपनी पैरवी करने के लिए एक नई टीम नियुक्त की है। एंटी हिन्दू पार्टी डीएमके के सांसद पी. विल्सन को पैरवी से हटा दिया है।
मध्य प्रदेश में 27% OBC आरक्षण के मुद्दे को लेकर राज्य सरकार ने एक नई टीम बनाई है। सरकार ने सीनियर एडवोकेट और डीएमके सांसद पी विल्सन (senior advocate P Wilson) को हटाकर अब सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष रखने के लिए एक और टीम नियुक्त की है। पहले, विल्सन को सरकार की ओर से हर सुनवाई पर 5.5 लाख रुपए देने थे, क्योंकि वे OBC आरक्षण पर सरकार का पक्ष रख रहे थे।
अब सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में पेश होने के लिए एक और तगड़ी टीम बनाई गई है। इस टीम में शामिल हैं:
इस मामले के बाद मध्य प्रदेश सरकार से ओबीसी आरक्षण जैसे केस में एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है...
![9c8cc387-5b9]()
![Image]()
आरक्षण और ओबीसी मामलों (27 फीसदी OBC आरक्षण) के वरिष्ठ वकील रामेश्वर सिंह लोधी ने सरकार के इस फैसले पर कहा कि जिन चार वकीलों को ओबीसी आरक्षण के मामले में सरकार की ओर से अपना पक्ष रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वे अपने आप में पूरी तरह सक्षम हैं और देश के नामी वकील हैं। हमें सरकार के इस फैसले पर पूरा भरोसा है।
डीएमके सांसद पी विल्सन से जुड़ी हालिया 'हिंदू विरोधी' टिप्पणी का विवाद हाल ही में एक शपथ पत्र के बाद सामने आया। इसमें मध्य प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी आरक्षण मामले की पैरवी के लिए विल्सन को नियुक्त किया था, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हुई।
OBC आरक्षण से जुड़ी ये खबरें भी पढ़े...
27 फीसदी ओबीसी आरक्षण केस हाईकोर्ट में फिर से मामला भेजने की उठी बात, अब कल होगी सुनवाई, शासन ने समय मांगा
सोशल मीडिया पर आलोचना: आलोचकों ने विल्सन की नियुक्ति पर सवाल उठाया, क्योंकि उनकी पार्टी, डीएमके, अतीत में सनातन धर्म और हिंदू धर्म के बारे में विवादित टिप्पणियों के लिए जानी जाती है।
अभिषेक सिंह का आरोप: राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के प्रवक्ता अभिषेक सिंह ने एक्स पर मध्य प्रदेश सरकार के इस कदम की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएमके सनातन धर्म की तुलना डेंगू-मलेरिया से करती है, और एक हिंदू विरोधी वकील को ओबीसी आरक्षण के मामले में पैरवी के लिए नियुक्त करना विरोधाभासी है।
नेहा दास का सवाल: डॉ. नेहा दास ने भी एक्स पर एक नोटिस साझा किया, जिसमें विल्सन को प्रति सुनवाई ₹5.5 लाख का भुगतान करने की जानकारी थी। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार से पूछा कि सनातन विरोधी पार्टी के सदस्य को क्यों नियुक्त किया गया।
डीएमके के सदस्य पहले भी सनातन धर्म को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं, जैसे कि उदयनिधि स्टालिन की डेंगू और मलेरिया से तुलना वाली टिप्पणी।
पी. विल्सन ने खुद सीधे तौर पर कोई हिंदू विरोधी टिप्पणी नहीं की है, लेकिन उनकी पार्टी की विचारधारा और अतीत में दिए गए बयानों के कारण उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाए गए।
उन्हें वकील के तौर पर वर्ष 1989 में तमिलनाडु बार काउंसिल में नामांकित किया गया।
बी.एससी (लॉयोला कॉलेज, चेन्नई)
एल.एल.बी (मद्रास लॉ कॉलेज)
मामले में द सूत्र के बड़े सवाल, जवाब दो सरकार
| |
- आर. वेंकटरमानी (अटॉर्नी जनरल)
- तुषार मेहता (सॉलिसिटर जनरल)
- केएम नटराज (एडिशनल सॉलिसिटर जनरल)
- प्रशांत सिंह (एडवोकेट जनरल)
बड़े सवाल ये भी...
- क्या यह नियुक्ति सरकार की नीतिगत चूक का परिणाम है या किसी विशेष दबाव में लिया गया निर्णय?
- आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई? एक एंटी-हिंदू पार्टी से जुड़े सांसद और वकील, विल्सन, को इस केस में शामिल कर बीजेपी सरकार ने खुद अपने लिए मुश्किलें क्यों बढ़ा लीं?
- जब यह मामला सीधे तौर पर ओबीसी हितों और हिंदू समाज की सामाजिक समानता से जुड़ा था, तब विल्सन की नियुक्ति के दौरान सरकार के जिम्मेदार अधिकारी और विधि विभाग ने इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया?
- क्या सरकार ने बैकग्राउंड जांच किए बिना यह फैसला लिया, या फिर यह लापरवाही जानबूझकर की गई?
- क्या बीजेपी की मध्य प्रदेश सरकार ने ओबीसी और हिंदू समाज के भरोसे के साथ समझौता किया है, या यह सिर्फ एक ‘तकनीकी गलती’ बताकर मामला दबा दिया जाएगा?
वकील ने किया बड़ा खुलासा, बोले- विल्सन के नाम पर सीएम की थी सहमति
9c8cc387-5b9
एडवोकेट धर्मेंद्र सिंह कुशवाहा ने कहा कि जब ओबीसी महासभा की बैठक हुई थी, तब पी. विल्सन के नाम पर खुद सीएम मोहन यादव ने सहमति दी थी और उस समय कोई विवाद नहीं हुआ था। ओबीसी महासभा ने इसलिए विल्सन के नाम को आगे बढ़ाया क्योंकि पी विल्सन आरक्षण मामलों के काफी अनुभवी वकील हैं। लेकिन 8 तारीख की पैरवी में इनको बुलाए बिना सरकार ने ऐसा कदम उठाया, जो सीधे तौर पर ओबीसी समुदाय के खिलाफ माना जा सकता है।
सरकार के फैसले पर पूरी भरोसा : लोधी
Image
आरक्षण और ओबीसी मामलों (27 फीसदी OBC आरक्षण) के वरिष्ठ वकील रामेश्वर सिंह लोधी ने सरकार के इस फैसले पर कहा कि जिन चार वकीलों को ओबीसी आरक्षण के मामले में सरकार की ओर से अपना पक्ष रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वे अपने आप में पूरी तरह सक्षम हैं और देश के नामी वकील हैं। हमें सरकार के इस फैसले पर पूरा भरोसा है।
वहीं इस मामले को लेकर एडवोकेट प्रशांत रत्न ने कहा कि फिलहाल उन्हें कोई जानकारी नहीं है। आदेश में केवल संशोधन लिखा है, इसलिए मैं इस मामले में अभी कुछ कहने की स्थिति में नहीं हूं।
क्यों शुरू हुआ था टी. विल्सन को लेकर विवाद
OBC आरक्षण से जुड़ी ये खबरें भी पढ़े...
27 फीसदी ओबीसी आरक्षण केस हाईकोर्ट में फिर से मामला भेजने की उठी बात, अब कल होगी सुनवाई, शासन ने समय मांगा
विवाद का कारण
अभिषेक सिंह का आरोप: राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के प्रवक्ता अभिषेक सिंह ने एक्स पर मध्य प्रदेश सरकार के इस कदम की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएमके सनातन धर्म की तुलना डेंगू-मलेरिया से करती है, और एक हिंदू विरोधी वकील को ओबीसी आरक्षण के मामले में पैरवी के लिए नियुक्त करना विरोधाभासी है।
नेहा दास का सवाल: डॉ. नेहा दास ने भी एक्स पर एक नोटिस साझा किया, जिसमें विल्सन को प्रति सुनवाई ₹5.5 लाख का भुगतान करने की जानकारी थी। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार से पूछा कि सनातन विरोधी पार्टी के सदस्य को क्यों नियुक्त किया गया।
क्यों हैं लोग नाराज
पी. विल्सन ने खुद सीधे तौर पर कोई हिंदू विरोधी टिप्पणी नहीं की है, लेकिन उनकी पार्टी की विचारधारा और अतीत में दिए गए बयानों के कारण उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाए गए।
कौन हैं डीएमके सांसद और सीनियर एडवोकेट पी विल्सन
- पूरा नाम: पुष्पनाथन विल्सन
- जन्म: 6 जून 1966, चेन्नई, तमिलनाडु
राजनीतिक करियर
- पी. विल्सन तमिलनाडु से राज्यसभा सांसद (DMK पार्टी) हैं।
- वे सितंबर 2019 में राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए और 2025 में पुनः निर्वाचित हुए।
- संसद में उन्होंने ग्रामीण विकास और पंचायती राज, महिला एवं बाल विकास, रक्षा, विधि व न्याय समेत कई समितियों में सदस्य के रूप में योगदान किया।
कानूनी करियर:
- 2009 में मद्रास हाई कोर्ट द्वारा 43 वर्ष की आयु में सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित हुए।
- 2012-2014 के बीच वे भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (South India) रहे—यह पद पाने वाले वे सबसे कम उम्र के व्यक्ति थे।
- 2008-2011 में तमिलनाडु के अतिरिक्त महाधिवक्ता भी रहे।
उन्हें वकील के तौर पर वर्ष 1989 में तमिलनाडु बार काउंसिल में नामांकित किया गया।
शिक्षा:
एल.एल.बी (मद्रास लॉ कॉलेज)
अन्य उल्लेखनीय बिंदु
- संसद में उनकी उपस्थिति दर 95% से भी अधिक है और वे 598 से अधिक चर्चाओं में हिस्सा ले चुके हैं।
- वे कई सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं के स्टैंडिंग काउंसिल रहे हैं।
- तमिलनाडु की राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर हमेशा मुखर रहते हैं।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman