एमपी में भर्ती सिस्टम पर CAG की कड़ी टिप्पणी : 44 में से 16 परीक्षाएं अटकी, हजारों पद खाली
Ramanand Tiwari | Feb 26, 2026, 24:19 IST
Photograph: (the sootr)
CAG रिपोर्ट ने मध्यप्रदेश में सरकारी भर्ती प्रक्रिया में हुई देरी को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। 44 में से 16 परीक्षाएं अटकी हैं और हजारों पद खाली पड़े हैं। सुधार के लिए केरल मॉडल अपनाने की सिफारिश की गई है।
BHOPAL. मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए चिंता की खबर है। साल 2018 से 2023 के बीच प्रस्तावित 44 परीक्षाओं में से सिर्फ 28 ही हो सकीं। 16 परीक्षाओं के लिए तो विज्ञापन तक जारी नहीं हो पाया। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने अपनी रिपोर्ट में एमपी लोक सेवा आयोग (MPPSC) और सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी को इसका बड़ा कारण बताया है।
राज्य लोक सेवा आयोग विभिन्न विभागों से खाली पदों का ब्योरा मांगता है। इसी आधार पर सिविल सेवा, वन सेवा और इंजीनियरिंग सेवाओं की भर्ती प्रक्रिया शुरू होती है। लेकिन CAG की जांच में सामने आया कि कई विभागों ने पदों की जानकारी भेजने में 31 से 68 महीने तक की देरी कर दी।
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रिपोर्ट में जिन विभागों का उल्लेख है, उनमें शामिल हैं: ऊर्जा विभाग,औद्योगिक नीति, निवेश प्रोत्साहन विभाग,जेल विभाग,मध्यप्रदेश आवास एवं अधोसंरचना विकास बोर्ड लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग। इन विभागों ने कुल 101 खाली पदों की सूचना देने में अत्यधिक देरी की। नतीजा यह हुआ कि आयोग सिर्फ 25 पदों पर ही भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ा सका।
CAG ने यह भी पाया कि देरी सिर्फ विभागों की तरफ से नहीं थी। 2018-19 से 2022-23 के बीच: 12,336 पदों के लिए 56 परीक्षाओं से जुड़े, 94 विज्ञापन जारी किए गए। इनमें से 30 विज्ञापन जारी करने में आयोग ने औसतन 136 दिन लगा दिए। यानी प्रक्रिया दोनों तरफ से धीमी रही।
उच्च शिक्षा विभाग में सहायक प्राध्यापक के 2,371 पदों की अधिसूचना फरवरी 2016 में निकली थी। लेकिन परीक्षा आयोजित होने में करीब 4 साल लग गए। दिव्यांगजन आरक्षण को लेकर बार-बार संशोधन किए गए। स्पष्ट आंतरिक व्यवस्था के अभाव में भर्ती प्रक्रिया आरक्षण विवादों में उलझती रही।
CAG का सुझाव:
CAG ने भर्ती प्रक्रिया तेज करने के लिए केरल लोक सेवा आयोग का मॉडल अपनाने की सिफारिश की है। केरल में खाली पदों की सूचना और विज्ञापन प्रक्रिया के लिए एक महीने की तय समयसीमा है।
सामान्य प्रशासन विभाग का कहना है कि सुधार के लिए एक नया ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया जा रहा है। इस पोर्टल पर: विभाग सीधे खाली पद अपलोड करेंगे आयोग को तुरंत जानकारी मिलेगी । विज्ञापन जारी करने में समय बचेगा सरकार का दावा है कि इससे भर्ती प्रक्रिया में तेजी आएगी।
भर्ती में देरी का सीधा असर लाखों अभ्यर्थियों पर पड़ता है। उम्र सीमा, तैयारी का समय और करियर प्लान—सब प्रभावित होते हैं। CAG की रिपोर्ट ने सिस्टम की कमियों को सामने ला दिया है। अब देखना होगा कि सुधार की घोषणाएं जमीनी स्तर पर कितनी जल्दी असर दिखाती हैं।
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एमपी में सरकारी भर्तियों की सुस्ती सिर्फ प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल है। समन्वय, स्पष्ट समयसीमा और पारदर्शी प्रक्रिया ही समाधान की कुंजी हैं। अगर सुधार लागू होते हैं, तो भर्ती कैलेंडर पटरी पर आ सकता है—वरना इंतजार लंबा ही रहेगा।
विभाग समय पर नहीं भेजते खाली पदों की जानकारी
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किन विभागों पर सवाल?
आयोग भी देरी से अछूता नहीं
आरक्षण और कोटा विवाद से भी अटकी भर्ती
मुख्य तथ्य एक नजर में
- 2018-23 के बीच 44 में से 28 परीक्षाएं आयोजित
- 16 परीक्षाओं के विज्ञापन जारी नहीं,
- 101 पदों की सूचना भेजने में 31-68 माह की देरी
- 12,336 पदों के लिए 94 विज्ञापन
- 30 विज्ञापन जारी करने में औसतन 136 दिन
- 2,371 सहायक प्राध्यापक पदों की भर्ती में 4 साल
CAG का सुझाव: केरल मॉडल अपनाएं
सरकार क्या कर रही है?
युवाओं के लिए क्या मतलब?
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