एमपी उच्च शिक्षा पर दावों की चमक फीकी, लाखों सीटें खाली तो गुणवत्ता का मॉडल कहां?
Ramanand Tiwari | Jul 25, 2026, 09:00 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. एमपी के कॉलेजों में 2.85 लाख सीटें खाली हैं। प्रवेश घटने से गुणवत्ता और नीतियों पर सवाल उठे हैं। सरकारी और निजी कॉलेज छात्रों के इंतजार में हैं। विशेषज्ञ सीट पुनर्गठन और सरल प्रवेश प्रक्रिया चाहते हैं।
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- प्रदेश के कॉलेजों में 2.85 लाख सीटें खाली हैं।
- कई कॉलेज छात्रों से प्रवेश के लिए संपर्क कर रहे हैं।
- फैकल्टी और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों की कमी बड़ी समस्या है।
- बड़े शहरों में नए प्रवेश लगभग थम गए हैं।
- विशेषज्ञों ने सीट पुनर्गठन और सरल प्रक्रिया सुझाई है।
सवाल यह है कि जब सरकार लगातार गुणवत्ता सुधार, मॉनिटरिंग और नई योजनाओं की बात कर रही है, तब छात्र सरकारी और निजी कॉलेजों से दूरी क्यों बना रहे हैं? क्या व्यवस्था में कहीं ऐसी कमी है, जिसे स्वीकार करने से बचा जा रहा है?
छात्र नहीं पहुंच रहे तो किस बात की गुणवत्ता?
कॉलेजों की हालत ऐसी कि अब खुद कर रहे संपर्क
बैठकें लगातार, लेकिन नतीजा आखिर कहां है?
सिर्फ सीटें नहीं, व्यवस्था भी सवालों के घेरे में
बड़े शहरों में सबसे ज्यादा चिंता
क्या फिर बढ़ेगी प्रवेश की तारीख?
बदलती पसंद या सरकारी नीति की कमजोरी?
सबसे बड़ा सवाल
प्राध्यापक संघ के अध्यक्ष की राय
छात्रो के अनुसार, जिन पाठ्यक्रमों में वर्षों से बड़ी संख्या में सीटें खाली रह जाती हैं, वहां सीटों की संख्या कम करने और जिन वोकेशनल एवं प्रोफेशनल कोर्सों में मांग अधिक है, उनमें सीटें बढ़ाने की आवश्यकता है।
आनंद शर्मा का कहना है कि उच्च शिक्षा विभाग की केंद्रीकृत (Centralized) प्रवेश प्रक्रिया काफी जटिल है। इसकी वजह से विद्यार्थियों को समय पर पसंदीदा विषय और कॉलेज में प्रवेश लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
शर्मा ने सुझाव दिया कि कॉलेज स्तर पर प्राचार्यों को अधिक अधिकार दिए जाएं, ताकि स्थानीय आवश्यकता और उपलब्ध सीटों के अनुसार प्रवेश प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाया जा सके।
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