छिंदवाड़ा कांड के बाद भी नहीं जागे जिम्मेदार, फफूंद वाली दवा के बाद अब माउथ वॉश में मिला कीड़ा

Aman Vaishnav | Jan 10, 2026, 12:22 IST
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छिंदवाड़ा में कोल्ड सिरप से 25 बच्चों की मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग बेपरवाह है। भोपाल के जेपी जिला अस्पताल में मरीजों को दी जा रही दवाओं में फफूंद और कीड़े मिलने की शिकायतों ने सबको चौंका दिया है।

NEWS IN SHORT

  • छिंदवाड़ा में कफ सिरप से25 बच्चों की मौत के बाद भी दवाओं की गुणवत्ता पर लापरवाही।
  • भोपाल के जेपी अस्पताल में मरीज को मिली फफूंद लगी डिक्लोफेनाक टैबलेट।
  • माउथ वॉश की शीशी में कीड़े जैसी संदिग्ध आकृति मिलने से मचा हड़कंप।
  • सीएमएचओ ने मामले की जांच के लिए 5 सदस्यीय टीम बनाई।
  • अस्पताल के ड्रग स्टोर में सीलन और नमी बनी दवाओं के लिए बड़ा खतरा।

News In Detail

मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में कोल्ड सिरप कांड से 25 बच्चों की जान चली गई थी। इस बड़ी घटना के बाद भी अस्पतालों में दवाओं की निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। जेपी जिला अस्पताल में महज तीन दिन के भीतर दो गंभीर मामले सामने आए हैं। यह स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

दवा में फफूंद और माउथ वॉश में कीड़े

3 जनवरी को मरीज सतीष सेन ने फफूंद लगी दवा की शिकायत दर्ज कराई थी। यह मामला अभी शांत नहीं हुआ था कि 6 जनवरी को नया केस सामने आया। मनीष नामक युवक को दिए गए माउथ वॉश में कीड़े जैसी आकृति मिली। मरीज गले के संक्रमण के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा था।

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शक के घेरे में आई ये दवाएं

अस्पताल से मरीजों को आमतौर पर दी जाने वाली दवाओं पर संदेह बढ़ा है। इसमें दर्द की गोली (डिक्लोफेनाक 50mg) की टैबलेट शामिल है। इसके अलावा क्लोरहेक्सिडिन माउथ वॉश आईपी 0.2 प्रतिशत की गुणवत्ता पर भी सवाल हैं। माउथ वॉश का सैंपल अब लैब में जांच के लिए भेजा गया है।

सीएमएचओ ने बैठाई विशेष जांच टीम

सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने दोनों शिकायतों को गंभीरता से लिया है। उन्होंने पांच सदस्यीय विशेष जांच टीम का गठन कर दिया है। इस टीम में फूड एंड ड्रग विभाग के अधिकारी भी शामिल किए गए हैं। टीम अस्पताल की फार्मेसी और ड्रग स्टोर के पूरे स्टॉक की जांच करेगी।

दावों और हकीकत में बड़ा विरोधाभास

इस मामले में विभाग के दावों में विरोधाभास नजर आ रहा है। सीएमएचओ का दावा है कि डिक्लोफेनाक टैबलेट का स्टॉक दिसंबर में खत्म हो गया था। दूसरी ओर अस्पताल स्टाफ ने शिकायतकर्ता से दवा की स्ट्रिप लेकर जांच की बात मानी है। जांच रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है।

नमी और सीलन ने बढ़ाई मुसीबत

अस्पताल के स्टोर स्टाफ ने भंडारण की समस्या की ओर इशारा किया है। जेपी अस्पताल के ड्रग स्टोर की दीवारों में लगातार सीलन बनी रहती है। स्टोर में नमी होने की शिकायतें पहले भी सिविल सर्जन को दी गई थीं। यही नमी दवाओं में फफूंद लगने का मुख्य कारण मानी जा रही है।

सूत्र Knowledge

दवा लेते समय बरतें ये सावधानियां

  • दवा लेने से पहले देखें कि स्ट्रिप पर कहीं नमी तो नहीं है या उसका रंग फीका तो नहीं पड़ गया है।
  • दवा के स्ट्रिप को रोशनी में रखकर देखें। दवा सब-स्टैंडर्ड या खराब भी हो सकती है।
  • माउथ वॉश लेते समय एक बार अच्छे से उसकी जांच कर लें।
  • दवाई लेते समय एक्सपायरी डेट का खासकर ध्यान रखें।

आगे क्या

  • अस्पताल के स्टोर में नमी और सीलन को फफूंद का मुख्य कारण माना गया है। अब प्रशासन पर ड्रग स्टोर के इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार का दबाव होगा।
  • सरकार इन खराब दवाओं को पूरे प्रदेश में रिकॉल (वापस मंगवाना) कर सकती है।
  • 5 सदस्यीय जांच टीम की रिपोर्ट के बाद लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है।
  • भविष्य में दवाओं के स्टॉक की हर हफ्ते फिजिकल चेकिंग अनिवार्य की जा सकती है।

निष्कर्ष

छिंदवाड़ा में 25 मासूमों की मौत के बाद उम्मीद थी कि मध्यप्रदेश स्वास्थ्य विभाग दवाओं की सुरक्षा को लेकर अभेद्य दीवार खड़ी करेगा। जेपी अस्पताल के ताजा मामलों ने इन उम्मीदों को धराशायी कर दिया है। यदि राजधानी के मुख्य जिला अस्पताल में नमी और सीलन के बीच दवाएं जहर बन रही हैं, तो दूरदराज के ग्रामीण इलाकों की स्थिति की कल्पना करना और भी डरावना है।

कफ सिरप कांड के बारे में जानने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।

छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड: देशभर में सिरप की जांच अब जरूरी, अब तक 25 मौतें

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