नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव के नोटिफिकेशन विवाद में इंदौर हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत

Sanjay Gupta | Apr 11, 2026, 12:55 IST
Share
mp nagarpalika election notification case
mp nagarpalika election notification case

नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव के नोटिफिकेशन विवाद में इंदौर हाईकोर्ट से सरकार को राहत मिली है। हाल ही में लगी याचिकाओं में कोर्ट ने बिना पक्ष सुने अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

मध्यप्रदेश में नगर पालिका, परिषद के अध्यक्षों के बिना चुनाव नोटिफिकेशन के पद संभालने को लेकर उठा कानूनी विवाद हाईकोर्ट के पास है। ग्वालियर हाईकोर्ट में श्योपुर नगर पालिका के केस में सरकार बुरी तरह उलझी है।

इसमें अधिकारियों की जांच तक के आदेश ग्वालियर बेंच... मुख्य सचिव अनुराग जैन को दे चुकी है। साथ ही बार-बार समय लेने पर हाईकोर्ट ने यहां तक टिप्पणी कर दी कि मध्यप्रदेश सरकार बेंच हंटिंग कर रही है और कोर्ट से छल कर रही है। वहीं, अब इस मामले में एमपी हाईकोर्ट की इंदौर बेंच से सरकार को राहत मिली है।

इंदौर हाईकोर्ट में दायर हैं 15 याचिकाएं

इंदौर हाईकोर्ट में एक या दो नहीं, बल्कि 8 जिलों के नगर पालिका अध्यक्षों के वित्तीय अधिकार और चुनाव को चुनौती देने वाली 15 याचिकाएं लगी हैं।

इनमें से 4 याचिकाओं में हाईकोर्ट पहले ही अंतरिम राहत दे चुका है। साथ ही इन अध्यक्षों के वित्तीय अधिकार पर रोक लगा दी गई है। वहीं, 11 अन्य मामलों में इस पर सुनवाई हुई है। इसमें अब जस्टिस प्रणय वर्मा ने आदेश जारी कर अगली सुनवाई 19 मई तय की है।

हाईकोर्ट ने सरकार को ऐसे दी राहत

बाद में लगी याचिकाओं को लेकर हाईकोर्ट इंदौर में याचिकाकर्ताओं द्वारा मौजूदा अध्यक्षों के चुनाव को चुनौती देते हुए इनके अधिकारों के उपयोग पर रोक की मांग की थी।

इस पर हाईकोर्ट बेंच ने आदेश में कहा है कि यह चुनाव हुए चार साल हो गए हैं। ऐसे में बिना संबंधित पक्षकारों (अध्यक्षों) का पक्ष जाने बिना अंतरिम राहत नहीं दी जा सकती है। इस तरह आठ जिलों की नगर पालिका के अध्यक्षों को और सरकार को राहत मिल गई है।

इंदौर हाईकोर्ट से ही शुरू हुआ था विवाद

इस विवाद की शुरुआत मध्यप्रदेश में श्योपुर के साथ ही बड़वानी जिले के पानसेमल से हुई थी। पानसेमल में राधिका सतोते ने नगर पालिका अध्यक्ष शैलेष भंडारकर के निर्वाचन को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा कि चुनाव का नोटिफिकेशन ही नहीं हुआ था।

इस पर 2 मई 2024 को हाईकोर्ट इंदौर ने अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार पर रोक लगा दी। इस केस में 25 सितंबर 2025 को याचिकाकर्ता ने मध्यप्रदेश नगर पालिका संशोधन एक्ट 2025 पेश किया और कहा कि बिना नोटिफिकेशन चुनाव मान्य ही नहीं है।

इंदौर-उज्जैन संभाग के इन जिलों की याचिकाएं

इंदौर और श्योपुर केस के बाद इंदौर-उज्जैन संभाग के आठ जिलों की विभिन्न नगर पालिकाओं को लेकर 15 याचिकाएं दायर हो गई हैं। इन सभी पर 6 अप्रैल को सुनवाई हुई थी। इस पर अब अंतरिम आदेश पारित हुआ है।

यह याचिकाएं उज्जैन, खरगोन, देवास, धार, आगर-मालवा, रतलाम, राजगढ़ और बड़वानी जिले की हैं।

बड़वानी के पानसेमल की याचिका को छोड़कर बाकी जिलों की याचिकाएं मार्च 2026 में ही दायर हुई हैं।

जावरा (रतलाम), नागदा (उज्जैन), सोनकच्छ (देवास) के मामलों में हाईकोर्ट ने वित्तीय अधिकारों के उपयोग पर पहले अंतरिम राहत देते हुए अध्यक्षों के अधिकारों पर रोक लगा दी थी।

बाकी मामलों में शासन से जवाब मांगा गया था। इनमें जावरा की एक और नगर पालिका बड़ावदा परिषद, बागली (देवास), पडाल्याखुर्द (खरगोन), तराना (उज्जैन), बाबड़ी (राजगढ़), खाचरौद (उज्जैन), मंडलेश्वर (खरगोन), बरोड (आगर-मालवा), सैलाना (रतलाम), सतवास (देवास) और कुक्षी (धार) शामिल हैं।

ग्वालियर हाईकोर्ट में क्या चल रहा है

ग्वालियर हाईकोर्ट में केस गंभीर स्थिति में हैं। निचले स्तर पर जवाब तैयार करने में हुई चूक के कारण अधिकारी और सरकार उलझ गए हैं। अब इसमें बार-बार समय मांगने के कारण सरकार से नाराज होकर हाईकोर्ट ने सीधे 13 जुलाई की तारीख लगा दी है।

वहीं इसी तरह के 15 केस इंदौर हाईकोर्ट में हैं। मामला नोटिफिकेशन का ही है। मध्यप्रदेश के 98 नगर पालिका और 247 नगर परिषद के अध्यक्षों की कुर्सी और अधिकार संकट में हैं।

क्या हुई थी गफलत

तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान के समय स्थानीय निकाय में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का मामला सुप्रीम कोर्ट गया था। बाद में राहत मिलने पर राज्य चुनाव आयोग ने जल्दबाजी में नगर निगम चुनाव और पंचायत चुनाव कराए थे।

चुनाव के बाद नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों के महापौरों और पार्षदों के परिणाम की अधिसूचनाएं जारी हुईं थी। वहीं, निर्वाचित अध्यक्षों के लिए अधिसूचना राज्य सरकार के शहरी विकास और आवास विभाग द्वारा जारी नहीं की गई थी।

इसका खुलासा तब हुआ जब 22 अप्रैल 2024 को पानसेमल (बड़वानी) को लेकर याचिका दायर हुई और वित्तीय अधिकारों पर रोक लग गई थी। इसके बाद श्योपुर मामले ने सरकार को हिला दिया था।

श्योपुर मामले में सीएस, संभागायुक्त सभी उलझे

श्योपुर मामले ने सरकार को सबसे ज्यादा उलझा दिया। यह केस अब सरकार के लिए बड़ी समस्या बन गया है। दरअसल, श्योपुर केस में पहले शासन पक्ष की ओर से जवाब दिया गया कि नोटिफिकेशन हुआ ही नहीं, इसलिए चुनाव याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।

इस पर हाईकोर्ट ने आश्चर्य जताया और वित्तीय अधिकार रोक दिए। सरकार अपील में और सुप्रीम कोर्ट तक गई, लेकिन राहत नहीं मिली।

फिर सरकार ने बदला जवाब

इसके बाद सरकार ने अचानक रुख बदला और दूसरा जवाब पेश किया कि नोटिफिकेशन की जरूरत ही नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने जिम्मेदार अधिकारियों को फटकार लगाई।

कहा गया कि शासकीय अधिवक्ता से गलती हुई और जवाब गलत तैयार किया गया था। इस पर हाईकोर्ट और सख्त हो गया और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा।

चंबल आयुक्त से लेकर मुख्य सचिव तक से जवाब मांगा गया। वहीं, जवाब नहीं मिलने पर एक अप्रैल को ग्वालियर हाईकोर्ट ने इसे सरकार की बेंच हंटिंग प्रैक्टिस करार दिया और कहा कि देरी कर सरकार कोर्ट के साथ छल कर रही है।

ये खबर भी पढ़िए...

श्योपुर केस देख, इंदौर हाईकोर्ट में 8 जिलों के नगर पालिका अध्यक्षों के खिलाफ लगी याचिकाएं

एमपी में नगर पालिका अध्यक्षों के वित्तीय अधिकार पर संकट, हाईकोर्ट के फैसले से मचा हड़कंप!

गुना में नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव, कांग्रेस ने दर्ज की राघौगढ़ नगर पालिका अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर जीत

नगर पालिका चुनाव में खुलते-खुलते रह गई बीजेपी की गुटबाजी, कलेक्टर की सख्ती आई काम

Tags:
  • सुप्रीम कोर्ट
  • मध्यप्रदेश
  • शिवराज सिंह चौहान
  • इंदौर हाईकोर्ट
  • एमपी हाईकोर्ट
  • मध्यप्रदेश सरकार
  • ग्वालियर हाईकोर्ट
  • श्योपुर
  • पंचायत चुनाव
  • नगर निगम चुनाव
  • राज्य चुनाव आयोग
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता

By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar

नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि

By Neel Tiwari

20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

By Sandeep Kumar

मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

By Arun Tiwari

पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई