‘करप्शन, कर्ज और बेरोजगारी से घिरा एमपी’: जीतू पटवारी का हमला, बोले-सीएम का नैरेटिव पूरी तरह बिगड़ा
Ramanand Tiwari | Mar 27, 2026, 22:23 IST
Photograph: (the sootr)
मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, जीतू पटवारी ने सरकार पर भ्रष्टाचार, बढ़ते कर्ज और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री का नैरेटिव पूरी तरह से बिगड़ चुका है।
मध्यप्रदेश की सियासत में आरोपों का पारा चढ़ा हुआ है। द सूत्र की विशेष चर्चा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, किसान संकट और प्रशासनिक नियंत्रण जैसे मुद्दों को उठाते हुए कहा कि प्रदेश में सरकार की छवि अब निगेटिव हो चुकी है। मुख्यमंत्री का नैरेटिव पूरी तरह बिगड़ गया है। पटवारी ने आरोप लगाया कि सत्ता में जवाबदेही खत्म हो चुकी है और व्यवस्था तानाशाही की ओर बढ़ रही है।
प्रश्न 1: सरकार पर लगातार करप्शन के आरोप लग रहे हैं, क्या ठोस आधार है?
उत्तर: देखिए, अब ये आरोप नहीं रहे, ये तथ्य बन चुके हैं। एक मंत्री को ससुर से 100 एकड़ जमीन मिलती है, बड़े स्तर पर संपत्तियां सामने आती हैं। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती। इससे साफ है कि सरकार भ्रष्टाचार पर पर्दा डाल रही है।
प्रश्न 2: आप कह रहे हैं कि ‘वल्लभ भवन करप्शन का अड्डा’ बन गया है, ये कितना गंभीर आरोप है?
उत्तर: यह बिल्कुल गंभीर है और हकीकत है। फैसले पारदर्शिता से नहीं, दबाव और प्रभाव में हो रहे हैं। जब सत्ता के केंद्र पर ही सवाल उठे, तो पूरी व्यवस्था संदिग्ध हो जाती है।
प्रश्न 3: मुख्यमंत्री के नेतृत्व पर भी आपने सवाल उठाए हैं?
उत्तर: आज स्थिति ये है कि मुख्यमंत्री का कंट्रोल नजर नहीं आता। प्रशासन बेलगाम है, फैसलों में स्पष्टता नहीं है। यही वजह है कि उनका नैरेटिव पूरी तरह नेगेटिव हो चुका है।
प्रश्न 4: किसान और कृषि वर्ष को लेकर आपकी क्या चिंता है?
उत्तर: सरकार कृषि वर्ष की बात करती है, लेकिन जमीन पर किसान परेशान है। आत्महत्या के मामले सामने आ रहे हैं, समर्थन मूल्य और राहत पर ठोस काम नहीं दिखता। ये सिर्फ घोषणाओं की सरकार बनकर रह गई है।
प्रश्न 5: बेरोजगारी को लेकर सरकार के दावों पर आपका क्या कहना है?
उत्तर: युवाओं के साथ मजाक हो रहा है। कभी लाखों नौकरियों की घोषणा होती है, लेकिन भर्तियां पूरी नहीं होतीं। परीक्षाएं अटकती हैं, रिजल्ट लटकते हैं, युवा दर-दर भटकने को मजबूर है।
प्रश्न 6: आरोप लगता है कि कांग्रेस मुद्दे उठाकर शांत हो जाती है?
उत्तर: ये पूरी तरह गलत है। तानाशाही व्यवस्था में विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश होती है। हमने विधानसभा से सड़क तक हर मुद्दा उठाया है, चाहे नर्सिंग घोटाला, इंदौर की घटना हो या अन्य घोटाले।
प्रश्न 7: अगर आपकी सरकार होती तो क्या अलग करते?
उत्तर: कांग्रेस की परंपरा रही है जवाबदेही तय करना। इतिहास उठाकर देख लीजिए, बड़े से बड़े मामलों में कार्रवाई हुई है। हमारी कथनी और करनी में अंतर नहीं होता, जबकि भाजपा में यही सबसे बड़ी समस्या है।
मध्यप्रदेश में सियासी बहस अब “नैरेटिव” की लड़ाई में बदलती दिख रही है। जहां एक ओर सरकार अपने कामकाज को सामने रख रही है। वहीं, विपक्ष लगातार छवि, नीतियों और प्रशासनिक क्षमता पर सवाल उठा रहा है।
कांग्रेस के भीतर गुटबाजी के सवाल पर भी पटवारी ने स्पष्ट संदेश दिया। उनका कहना है कि पार्टी के अंदर किसी तरह का आंतरिक मतभेद नहीं है, बल्कि यह धारणा बाहरी तौर पर बनाई जा रही है। उनके अनुसार, कांग्रेस
संगठनात्मक मजबूती, प्रतिभा संवर्धन और कैडर निर्माण जैसे अभियानों के जरिए जमीनी स्तर पर खुद को सशक्त कर रही है। पार्टी एकजुटता के साथ आगे बढ़ रही है और यही उसकी राजनीतिक ताकत का आधार है।
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मुख्य बातें (Key Points):
- एक मंत्री को ससुर द्वारा 100 एकड़ जमीन देने का मामला- भ्रष्टाचार पर सवाल
- विश्वास सारंग से जुड़े कथित “जखीरे” को लेकर आरोप
- “वल्लभ भवन करप्शन का अड्डा बन चुका है”-पटवारी
- प्रदेश पर बढ़ता कर्ज, आर्थिक स्थिति पर चिंता
- किसान परेशान, आत्महत्या के मामले-सरकार पर सवाल
- युवाओं को रोजगार के वादे, लेकिन भर्ती प्रक्रिया अधूरी
- “सीएम का कंट्रोल खत्म, सिस्टम बेलगाम”-कांग्रेस का आरोप
इंटरव्यू: द सूत्र से बातचीत में जीतू पटवारी के तीखे सवाल-जवाब
उत्तर: देखिए, अब ये आरोप नहीं रहे, ये तथ्य बन चुके हैं। एक मंत्री को ससुर से 100 एकड़ जमीन मिलती है, बड़े स्तर पर संपत्तियां सामने आती हैं। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती। इससे साफ है कि सरकार भ्रष्टाचार पर पर्दा डाल रही है।
प्रश्न 2: आप कह रहे हैं कि ‘वल्लभ भवन करप्शन का अड्डा’ बन गया है, ये कितना गंभीर आरोप है?
उत्तर: यह बिल्कुल गंभीर है और हकीकत है। फैसले पारदर्शिता से नहीं, दबाव और प्रभाव में हो रहे हैं। जब सत्ता के केंद्र पर ही सवाल उठे, तो पूरी व्यवस्था संदिग्ध हो जाती है।
प्रश्न 3: मुख्यमंत्री के नेतृत्व पर भी आपने सवाल उठाए हैं?
उत्तर: आज स्थिति ये है कि मुख्यमंत्री का कंट्रोल नजर नहीं आता। प्रशासन बेलगाम है, फैसलों में स्पष्टता नहीं है। यही वजह है कि उनका नैरेटिव पूरी तरह नेगेटिव हो चुका है।
प्रश्न 4: किसान और कृषि वर्ष को लेकर आपकी क्या चिंता है?
उत्तर: सरकार कृषि वर्ष की बात करती है, लेकिन जमीन पर किसान परेशान है। आत्महत्या के मामले सामने आ रहे हैं, समर्थन मूल्य और राहत पर ठोस काम नहीं दिखता। ये सिर्फ घोषणाओं की सरकार बनकर रह गई है।
प्रश्न 5: बेरोजगारी को लेकर सरकार के दावों पर आपका क्या कहना है?
उत्तर: युवाओं के साथ मजाक हो रहा है। कभी लाखों नौकरियों की घोषणा होती है, लेकिन भर्तियां पूरी नहीं होतीं। परीक्षाएं अटकती हैं, रिजल्ट लटकते हैं, युवा दर-दर भटकने को मजबूर है।
प्रश्न 6: आरोप लगता है कि कांग्रेस मुद्दे उठाकर शांत हो जाती है?
उत्तर: ये पूरी तरह गलत है। तानाशाही व्यवस्था में विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश होती है। हमने विधानसभा से सड़क तक हर मुद्दा उठाया है, चाहे नर्सिंग घोटाला, इंदौर की घटना हो या अन्य घोटाले।
प्रश्न 7: अगर आपकी सरकार होती तो क्या अलग करते?
उत्तर: कांग्रेस की परंपरा रही है जवाबदेही तय करना। इतिहास उठाकर देख लीजिए, बड़े से बड़े मामलों में कार्रवाई हुई है। हमारी कथनी और करनी में अंतर नहीं होता, जबकि भाजपा में यही सबसे बड़ी समस्या है।
मध्यप्रदेश में सियासी बहस अब “नैरेटिव” की लड़ाई में बदलती दिख रही है। जहां एक ओर सरकार अपने कामकाज को सामने रख रही है। वहीं, विपक्ष लगातार छवि, नीतियों और प्रशासनिक क्षमता पर सवाल उठा रहा है।
कांग्रेस के भीतर गुटबाजी के सवाल पर भी पटवारी ने स्पष्ट संदेश दिया। उनका कहना है कि पार्टी के अंदर किसी तरह का आंतरिक मतभेद नहीं है, बल्कि यह धारणा बाहरी तौर पर बनाई जा रही है। उनके अनुसार, कांग्रेस
संगठनात्मक मजबूती, प्रतिभा संवर्धन और कैडर निर्माण जैसे अभियानों के जरिए जमीनी स्तर पर खुद को सशक्त कर रही है। पार्टी एकजुटता के साथ आगे बढ़ रही है और यही उसकी राजनीतिक ताकत का आधार है।
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