टाइगर स्टेट एमपी में जगह की किल्लत, एक हजार बाघों के लिए छोटे पड़ रहे जंगल, बढ़ रहा खूनी संघर्ष
Anjali Dwivedi | Apr 13, 2026, 14:38 IST
MP Tiger Reserve Area Shortage
मध्य प्रदेश में बाघों की संख्या एक हजार पहुंच गई है, लेकिन नौ टाइगर रिजर्व का क्षेत्रफल जरूरत से काफी कम है। जगह की कमी से बाघों में आपसी संघर्ष और इंसानों पर हमलों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
टाइगर स्टेट के नाम से मशहूर मध्य प्रदेश ने बाघों के संरक्षण में शानदार मुकाम हासिल किया है। यही सफलता अब एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही है। प्रदेश में बाघों का कुनबा इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि अब उनके रहने के लिए जंगल छोटे पड़ने लगे हैं। बाघों की बढ़ती आबादी और सिमटते दायरे ने वन विभाग और वन्यजीव एक्सपर्ट्स की चिंता बढ़ा दी है।
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बाघ आकलन- 2022 के आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश में 785 बाघ थे, लेकिन एक ताजा अनुमान के मुताबिक अब यह संख्या एक हजार तक पहुंच गई है। तेजी से बढ़ती इस आबादी के सामने सबसे बड़ा संकट जगह का है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एक नर बाघ को अपना क्षेत्र (Territory) बनाने के लिए कम से कम 50 और अधिकतम 100 वर्ग किमी का इलाका चाहिए। वहीं मादा बाघ के लिए 15 से 20 वर्ग किमी की जरूरत होती है।
इस गणित के हिसाब से 1000 बाघों के लिए न्यूनतम 50 हजार वर्ग किमी सुरक्षित जंगल चाहिए, जबकि प्रदेश के सभी 9 टाइगर रिजर्वों का कुल क्षेत्रफल महज 16 हजार 233.939 वर्ग किमी ही है।
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क्षेत्रफल की इस भारी कमी का नतीजा आपसी संघर्ष के रूप में दिख रहा है। बीते 10 सालों में आपसी लड़ाई के कारण 50 से ज्यादा बाघ और तेंदुए अपनी जान गंवा चुके हैं। जब ताकतवर बाघ अपनी टेरेटरी बना लेते हैं, तो कमजोर बाघ और तेंदुए जंगल छोड़कर आबादी वाले इलाकों की ओर रुख करते हैं।
इस वजह से मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ गया है, जिसमें अब तक सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके अलावा, जंगलों में शिकार के लिए शाकाहारी वन्यजीवों की कमी भी बाघों को रिजर्व से बाहर जाने पर मजबूर कर रही है।
MP के
प्रदेश के प्रमुख टाइगर रिजर्वों में बाघों की संभावित संख्या और उपलब्ध क्षेत्रफल का आंकड़ा कुछ इस प्रकार है-
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बाघों का कुनबा पहुंचा एक हजार के पार
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एक नर बाघ को अपना क्षेत्र (Territory) बनाने के लिए कम से कम 50 और अधिकतम 100 वर्ग किमी का इलाका चाहिए। वहीं मादा बाघ के लिए 15 से 20 वर्ग किमी की जरूरत होती है।
इस गणित के हिसाब से 1000 बाघों के लिए न्यूनतम 50 हजार वर्ग किमी सुरक्षित जंगल चाहिए, जबकि प्रदेश के सभी 9 टाइगर रिजर्वों का कुल क्षेत्रफल महज 16 हजार 233.939 वर्ग किमी ही है।
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इंसान और वन्यजीवों के बीच बढ़ता खूनी संघर्ष
इस वजह से मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ गया है, जिसमें अब तक सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके अलावा, जंगलों में शिकार के लिए शाकाहारी वन्यजीवों की कमी भी बाघों को रिजर्व से बाहर जाने पर मजबूर कर रही है।
रिजर्व के एक्सपर्ट्स क्या कहना हैं
बाघ मामलों के एक्सपर्ट डॉ. अनिरूद्ध मजूमदार का कहना है कि बाघों की क्षमता का सटीक आकलन कठिन है, लेकिन टेरेटरी के लिए जमीन की जरूरत अनिवार्य है। वहीं, पूर्व वन अधिकारी आरके दीक्षित बताते हैं कि वर्षों से बाघों की संख्या तो बढ़ी, लेकिन उस अनुपात में रिजर्व का क्षेत्रफल (Area) नहीं बढ़ाया गया। हालांकि, हाल ही में मोहन सरकार ने दो नए रिजर्व बनाने का फैसला लिया है, लेकिन मौजूदा बाघों की संख्या को देखते हुए यह कदम पर्याप्त नहीं लग रहा है। मांग की जा रही है कि सुरक्षित वनों का दायरा तुरंत बढ़ाया जाना चाहिए।
MP के टाइगर रिजर्व और बाघों की वर्तमान स्थिति
| टाइगर रिजर्व | क्षेत्रफल (वर्ग किमी) | संभावित बाघ (2026) |
| बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व | 1536.938 | 170 से 202 |
| कान्हा टाइगर रिजर्व | 2162.48 | 155 से 180 |
| डॉ. विष्णु वाकणकर | 1271.463 | 121 से 151 |
| सतपुड़ा टाइगर रिजर्व | 2133.31 | 120 से 172 |
| पन्ना टाइगर रिजर्व | 1598.10 | 100 से 110 |
| पेंच टाइगर रिजर्व | 1179.63 | 70 से 90 |
| संजय टाइगर रिजर्व | 2361.511 | 50 से 60 |
| रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व | 2339.12 | 19 से 25 |
| माधव टाइगर रिजर्व | 1651.387 | 8 से 10 |
| कुल (9 रिजर्व) | 16 हजार 233.939 | अनुमानित एक हजार |
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