एमपी की प्रॉपर्टी गाइडलाइन को मंजूरी, 1 अप्रैल से 16% तक बढ़ेंगी कीमतें
मध्य प्रदेश में जमीन और मकान खरीदने वालों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। प्रदेश में प्रॉपर्टी की नई गाइडलाइन को मंजूरी दे दी गई है। अब 1 अप्रैल से जमीन और मकानों की सरकारी कीमतें करीब 16 प्रतिशत तक बढ़ जाएंगी। नई गाइडलाइन लागू होने के बाद रजिस्ट्री के दौरान ज्यादा स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क देना पड़ सकता है। यह फैसला भोपाल स्थित आईजी पंजीयन कार्यालय में आयोजित केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की बैठक में लिया गया। बैठक में प्रदेश के सभी जिलों से आए प्रस्तावों पर चर्चा की गई और उन्हें मंजूरी दे दी गई।
पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें...MP ESB Exam: एडमिट कार्ड की तारीख से एक दिन पहले ही हो गई परीक्षा
कर्मचारी चयन मंडल (ESB) की एएसआई और प्रधान आरक्षक भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। अभ्यर्थी जब सेंटर पर पहुंचे तो उनका पेपर एक दिन पहले ही हो चुका था, जबकि एडमिट कार्ड में तारीख एक दिन बाद की दर्ज है। जबलपुर स्थित परीक्षा केंद्र के अभ्यर्थियों ने मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की इस बड़ी चूक की शिकायत अधिकारियों से की है। इस संबंध में ईएसबी कार्यालय में भी पत्र दिया गया है। वहीं अधिकारी इस गड़बड़ी पर कुछ भी कहने से बचते नजर आ रहे हैं। उधर ईएसबी ने पोर्टल पर इस परीक्षा दे चुके अभ्यर्थियों के लिए ऑब्जेक्शन लिंक ओपन कर दी है। इस पर अभ्यर्थी प्रश्न संबंधी आपत्ति दर्ज कर पाएंगे। ईएसबी द्वारा 26 मार्च को यह लिंक जारी करने से परीक्षा से वंचित अभ्यर्थियों की मुश्किल और बढ़ गई है।
पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें...बिजली का बिल 4.80% महंगा, विद्युत नियामक आयोग ने जारी किया टैरिफ
मध्य प्रदेश की जनता को एक बड़ा झटका लगा है, क्योंकि राज्य में बिजली की दरों में 4.80% की बढ़ोतरी की घोषणा की गई है। एमपी विद्युत नियामक आयोग (MPERC) ने 2026-27 के लिए यह वृद्धि की है। बिजली कंपनियों ने पिछले वित्तीय वर्ष में 6044 करोड़ रुपए के घाटे का सामना किया, और इस घाटे को कवर करने के लिए बिजली दरों में यह बढ़ोतरी की गई है। पिछले साल केवल 3.46% की मामूली बढ़ोतरी की गई थी, जबकि कंपनियों ने 7.52% की वृद्धि की मांग की थी।
पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें...सीएम एक्शन के बाद सस्पेंड बैंक CEO पीएस धनवाल को हाईकोर्ट से भी राहत नहीं, स्टे से इनकार
सीधी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) पीएस धनवाल के लिए यह घटना एक बड़ा झटका है। दरअसल, वे कुछ ही दिनों में रिटायर होने वाले थे। अचानक निलंबन की कार्रवाई से उनके सर्विस रिकॉर्ड और प्रतिष्ठा पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस कारण उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया। वे चाहते थे कि रिटायरमेंट से पहले निलंबन हटाया जाए और उनका कार्यकाल सामान्य रूप से पूरा हो सके।
पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें...प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार: CMO के खिलाफ EOW ने दर्ज की एफआईआर
प्रधानमंत्री आवास योजना में डबरा नगर पालिका के तत्कालीन सीएमओ प्रदीप भदौरिया पर आरोप है कि उन्होंने कई हितग्राहियों के खातों में निर्धारित राशि से अधिक राशि डाली, जिससे शासन को 1.31 करोड़ रुपए की आर्थिक क्षति हुई। ईओडब्ल्यू ने इस भ्रष्टाचार मामले को गंभीरता से लिया है और एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें...आईएएस वंदना वैद्य के फार्महाउस का नाम FIR में मत लिखना, उस रात TI पर था उच्च स्तर से दबाव और धमकी
इंदौर में मध्यप्रदेश वित्त निगम की एमडी व 2009 बैच की आईएएस वंदना वैद्य के फार्महाउस पर 10-11 मार्च की दरमियानी रात जुआकांड पकड़ा गया था। इसके बाद 11 मार्च को टीआई मानपुर लोकेंद्र सिंह हिहोरे के साथ ही एसआई मिथुन ओसारी और एएसआई रेशम गिरवाल को एसपी यांगचेन डोलकर भूटिया ने सस्पेंड कर दिया था। वहीं, अब सवाल उठ रहा है कि क्या इन अधिकारियों को आईएएस का नाम नहीं छिपाने के कारण उच्च अधिकारियों ने खुन्नस में हटाया था? क्या उस रात इनके द्वारा टीआई पर दबाव डाला गया था? ये सारे आरोप टीआई हिहोरे ने हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में लगाए हैं। इससे पूरी कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें...व्यापमं केस की फिर खुलेंगी फाइलें, सुप्रीम कोर्ट ने CBI और सरकार से मांगा जवाब
मध्यप्रदेश के सबसे चर्चित भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं के घोटाले, व्यापमं की जांच की आंच एक बार फिर तेज होने वाली है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और मध्यप्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। कोर्ट ने साफ तौर पर पूछा है कि शिकायतकर्ता द्वारा सौंपे गए 320 पन्नों के अहम दस्तावेजों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है।
पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें...KBC फेम तहसीलदार अमिता सिंह तोमर गिरफ्तार, श्योपुर बाढ़ घोटाले में हुई कार्रवाई
श्योपुर जिले में साल 2021 की बाढ़ में आई राहत राशि में भारी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। इस घोटाले के मास्टरमाइंड के रूप में तहसीलदार अमिता सिंह तोमर का नाम सामने आया। पुलिस ने उन्हें ग्वालियर से गिरफ्तार किया है, जहां वह छिपकर रह रही थीं। इस घोटाले में करीब ढाई करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा किया गया, जिससे बाढ़ पीड़ितों को राहत नहीं मिल पाई। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि तहसीलदार अमिता सिंह पहली बार कौन बनेगा करोड़पति से चर्चा में आई थी। साल 2011 में उन्होंने KBC में महानायक अमिताभ बच्चन के 14 सवालों के सहीं जवाब देकर 50 लाख रुपए जीते थे।
पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें...7 दिन में व्हाट्सएप पर बर्थ सर्टिफिकेट, भोपाल में सफल अब पूरे एमपी में लागू होगा डिजिटल मॉडल
मध्यप्रदेश में सरकार ने एक नई पहल शुरू की है, जिसमें जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) अब 7 दिन में व्हाट्सएप पर मिलेगा। यह कदम लोगों की परेशानियों को हल करने के लिए उठाया गया है। पहले जन्म प्रमाण पत्र पाने के लिए लोगों को अस्पताल के चक्कर काटने पड़ते थे और घंटों इंतजार करना पड़ता था। यह सुविधा सबसे पहले भोपाल के हमीदिया अस्पताल में शुरु की गई थी, जहां उसे जबरदस्त सफलता मिली। अब सरकार इसे पूरे प्रदेश में लागू करने की योजना बना रही है। इसका फायदा सीधे तौर पर लाखों परिवारों को होगा। इस व्यवस्था के तहत अब कोई भी परिवार घर बैठे ही अपने बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकेगा।
पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें...हफ्ते में दो दिन मंत्रालय में फरियाद सुनेंगे मंत्री, सांसद-विधायकों की भी होगी जनसुनवाई
एमपी टॉप न्यूज: भाजपा अब अपने मंत्रियों को जनता के प्रति और ज्यादा जिम्मेदार बनाने की तैयारी कर रही है। पार्टी में जनप्रतिनिधियों के व्यवहार और उनकी उपेक्षा से कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है। इसे ही दूर करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। सत्ता और संगठन स्तर पर चर्चा करने के बाद एक नई व्यवस्था लागू करने की योजना बनाई गई है।
पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें...टेंडर पाने की जिद में तड़पती सोम डिस्टिलरीज, कोर्ट से मिल रहे एक के बाद एक झटके, अब डिविजनल बेंच में टिकी नजर
मध्य प्रदेश की बड़ी खबरें: शराब सप्लाई के कई करोड़ के टेंडर के लिए सोम डिस्टिलरीज हर मुमकिन कानूनी दांव आजमा रही है। राहत अब तक दूर ही है। सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट की सिंगल बेंच तक झटके खाने के बाद अब कंपनी ने डिविजनल बेंच का दरवाजा खटखटाया है। फर्जीवाड़े के दाग के बीच टेंडर में घुसने की कोशिश को लेकर कोर्ट में भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
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