व्यापमं केस की फिर खुलेंगी फाइलें, सुप्रीम कोर्ट ने CBI और सरकार से मांगा जवाब
Amresh Kushwaha | Mar 26, 2026, 14:44 IST
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सुप्रीम कोर्ट ने व्यापमं घोटाले में 320 पन्नों के अहम दस्तावेजों पर कार्रवाई न होने पर CBI और एमपी सरकार को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई 16 अप्रैल 2026 को होगी।
मध्यप्रदेश के सबसे चर्चित भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं के घोटाले, व्यापमं की जांच की आंच एक बार फिर तेज होने वाली है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और मध्यप्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।
कोर्ट ने साफ तौर पर पूछा है कि शिकायतकर्ता द्वारा सौंपे गए 320 पन्नों के अहम दस्तावेजों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने पूर्व विधायक पारस सकलेचा की याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट आदेश जारी किए हैं।
अदालत ने जांच एजेंसी और राज्य शासन को निर्देश दिया है कि वे अब तक की गई पूरी जांच और कोर्ट में पेश की गई चार्जशीट का विस्तृत ब्यौरा एक शपथ पत्र के माध्यम से पेश करें।
इस आदेश ने उन फाइलों में फिर से जान फूंक दी है, जो लंबे समय से ठंडे बस्ते में मानी जा रही थीं।
इस मामले की कानूनी यात्रा काफी उतार-चढ़ाव भरी रही है। इससे पहले, अप्रैल 2024 में इंदौर हाईकोर्ट ने पारस सकलेचा की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि वे इस मामले में सीधे तौर पर प्रभावित पक्ष (Affected Party) नहीं हैं।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट विवेक तन्खा और उनकी टीम ने दलील दी कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में एक सजग शिकायतकर्ता की भूमिका सबसे अहम होती है। कोर्ट ने इस दलील को गंभीरता से लेते हुए जवाब तलब किया है।
एमपी व्यापमं घोटाला मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर शिकायतकर्ता पिछले एक दशक से अधिक समय से संघर्ष कर रहे हैं। इस केस की टाइमलाइन कुछ इस प्रकार रही है:
सुप्रीम कोर्ट में हुई इस सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट विवेक तन्खा, सर्वम रितम खरे, विपुल तिवारी और इंद्रदेव सिंह मौजूद रहे।
वहीं, शासन की ओर से अतिरिक्त एडवोकेट जनरल श्रीधर पोटराजू और सीबीआई की ओर से दविंदर पाल सिंह ने पक्ष रखा। अब सभी की नजरें 16 अप्रैल 2026 पर टिकी हैं, जब इस मामले की अगली सुनवाई होगी।
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कोर्ट ने साफ तौर पर पूछा है कि शिकायतकर्ता द्वारा सौंपे गए 320 पन्नों के अहम दस्तावेजों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपनाया सख्त रुख
अदालत ने जांच एजेंसी और राज्य शासन को निर्देश दिया है कि वे अब तक की गई पूरी जांच और कोर्ट में पेश की गई चार्जशीट का विस्तृत ब्यौरा एक शपथ पत्र के माध्यम से पेश करें।
इस आदेश ने उन फाइलों में फिर से जान फूंक दी है, जो लंबे समय से ठंडे बस्ते में मानी जा रही थीं।
HC के फैसले को चुनौती: कौन है प्रभावित पक्ष?
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट विवेक तन्खा और उनकी टीम ने दलील दी कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में एक सजग शिकायतकर्ता की भूमिका सबसे अहम होती है। कोर्ट ने इस दलील को गंभीरता से लेते हुए जवाब तलब किया है।
11 साल का लंबा सफर
- 2014: STF के एक विज्ञापन के बाद पारस सकलेचा ने पुख्ता सबूतों के साथ पहली शिकायत दर्ज कराई थी।
- 2015: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच की कमान CBI को मिली थी। इसी साल सकलेचा ने दिल्ली मुख्यालय में 320 पन्नों के विस्तृत दस्तावेज सौंपे थे।
- 2016: CBI और STF ने बयान तो दर्ज किए, लेकिन ठोस कार्रवाई के बजाय फाइलें दफ्तरों के चक्कर काटती रहीं।
- 2023: कार्रवाई न होने से परेशान होकर सकलेचा ने एक बार फिर न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
16 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई
वहीं, शासन की ओर से अतिरिक्त एडवोकेट जनरल श्रीधर पोटराजू और सीबीआई की ओर से दविंदर पाल सिंह ने पक्ष रखा। अब सभी की नजरें 16 अप्रैल 2026 पर टिकी हैं, जब इस मामले की अगली सुनवाई होगी।
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