विपक्ष के दबाव में जल्दबाजी? MSP और मंडी रेट के फर्क से किसान परेशान, सरकार पर अव्यवस्था के आरोप
Ramanand Tiwari | Apr 09, 2026, 14:16 IST
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मध्यप्रदेश में आज 9 अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीदी शुरू हो गई है। वहीं जमीन पर बारदाने और गोदामों की भारी कमी दिख रही है। इस अव्यवस्था से लाखों पंजीकृत किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
मध्य प्रदेश में गुरुवार 09 अप्रैल से गेहूं खरीदी (मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी) शुरू हो गई है, लेकिन हालात यह हैं कि जमीन पर तैयारियां अधूरी हैं।
बारदाना उपलब्ध नहीं है, टेंडर प्रक्रिया जारी है और गोदामों की स्थिति भी साफ नहीं है। इसके बावजूद सरकार ने खरीदी का ऐलान कर दिया है जिस पर विपक्ष हमलावर हो गया है।
सरकार ने कई बार तारीखें बढ़ाने के बाद अब खरीदी शुरू करने का फैसला लिया है। लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं अभी भी अधूरी हैं। इससे शुरुआती दिनों में अव्यवस्था की आशंका है।
राज्य में लगभग 30 लाख टन बारदाने की व्यवस्था है, जबकि जरूरत 50 लाख टन के आसपास है। यानी करीब 20 लाख टन की कमी साफ दिख रही है। ऐसे में सरकार पुराने जूट के बारदाने खरीदने और पॉलीबैग का विकल्प तलाश रही है।
प्लास्टिक (PP बैग) और पुराने बारदाने के टेंडर अभी फाइनल हो रहे हैं। खाद्य विभाग के मुताबिक, सप्लाई आने में कम से कम 15 दिन लगेंगे यानी खरीदी पहले, इंतजाम बाद में।
MSP बनाम मंडी रेट:
मंडी में गेहूं का भाव लगभग दो हजार 200 रुपए प्रति क्विंटल है, जबकि समर्थन मूल्य दो हजार 600 रुपए है।
400 रुपए के इस अंतर के कारण किसान सीधे सरकारी खरीदी (गेहूं की सरकारी खरीदी) पर निर्भर हैं। इससे दबाव और बढ़ गया है।
इस साल लगभग 19 लाख किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है जो सामान्य से 4 लाख ज्यादा है। इतनी बड़ी संख्या में आवक होने से खरीदी, भंडारण और भुगतान तीनों पर दबाव बढ़ेगा।
केंद्र ने 78 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया है लेकिन आवक इससे ज्यादा होने की आशंका है। अगर सरकार लक्ष्य से ज्यादा खरीदी करती है तो इससे आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
पहले से ही गोदाम भरे हुए हैं। नई फसल रखने के लिए जगह कम है। अगर फसल को खुले में रखा गया तो बारिश से नुकसान का खतरा भी बना हुआ है।
कांग्रेस ने इसे सरकार की बिना तैयारी की जल्दबाजी बताया है। वहीं कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक का आरोप है कि सरकार जानबूझकर कम खरीदी की तैयारी कर रही है।
सोसायटी और गोदामों से कोई ठोस अनुबंध नहीं है। पिछले दो साल से भुगतान लंबित है। उनका कहना है कि कांग्रेस के दबाव में सरकार ने जल्दबाजी में खरीदी शुरू की है।
खाद्य एवं महिला बाल विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव रश्मि अरुण शमी के अनुसार, PP बैग और पुराने बारदाने के टेंडर आज और कल मैं फाइनल हो जाएंगे।
सरकार व्यवस्थाओं को तेजी से पूरा कर रही है पर खरीदी गले की फांस क्यों बन रही है। बारदाने की कमी, अधूरी तैयारी, बढ़ती आवक और MSP पर निर्भरता, ये सभी कारण मिलकर गेहूं खरीदी को सरकार के लिए बड़ी चुनौती बना रहे हैं।
ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तर पर और गर्माने वाला है।
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बारदाना उपलब्ध नहीं है, टेंडर प्रक्रिया जारी है और गोदामों की स्थिति भी साफ नहीं है। इसके बावजूद सरकार ने खरीदी का ऐलान कर दिया है जिस पर विपक्ष हमलावर हो गया है।
अधूरी तैयारी में खरीदी की शुरुआत
बारदाने पर सबसे बड़ा संकट
टेंडर अभी जारी, सप्लाई दूर
MSP बनाम मंडी रेट: किसान क्यों परेशान
400 रुपए के इस अंतर के कारण किसान सीधे सरकारी खरीदी (गेहूं की सरकारी खरीदी) पर निर्भर हैं। इससे दबाव और बढ़ गया है।
रिकॉर्ड पंजीयन, बढ़ी सरकार की मुश्किल
लक्ष्य बनाम संभावित आवक
गोदाम पहले से भरे, नई चिंता
विपक्ष का हमला तेज
बारदाना उपलब्ध नहीं है
सरकार का पक्ष क्या है
सप्लाई 15 दिन में शुरू हो जाएगी
ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तर पर और गर्माने वाला है।
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