MPPSC पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- भर्ती प्रक्रिया के बीच नियम बदलना गलत, ये है पूरा मामला
Amresh Kushwaha | Jan 29, 2026, 11:13 IST
mppsc indore high court doctor recruitment rule change
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि MPPSC के जरिए डॉक्टरों की भर्ती के दौरान नियमों में बदलाव करना गलत है।
INDORE. MPPSC की डॉक्टरों की भर्ती में गड़बड़ी को लेकर मंगलवार, 27 जनवरी को हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने कहा कि भर्ती शुरू होने के बाद नए नियम लागू करना ठीक नहीं है। इसे HC ने खेल के दौरान नियम बदलने जैसा माना गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसा बदलाव कानून के खिलाफ है।
हाईकोर्ट ने MPPSC के जरिए चिकित्सा अधिकारी (ग्रेड-1) और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की भर्ती में गलती बताई है। यह गलती भर्ती के दौरान दस्तावेज सत्यापन में अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी रद्द करने को लेकर की गई थी।
जस्टिस जय कुमार पिल्लई की एकलपीठ ने कहा कि उम्मीदवारों को यह उम्मीद थी कि उनका चयन विज्ञापन में दी गई शर्तों के अनुसार होगा। कोर्ट ने कहा कि ऐसे नियम लागू करना जो विज्ञापन का हिस्सा नहीं थे, यह भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता के खिलाफ है।
MPPSC और चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मेडिकल ऑफिसर और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसमें योग्यता के तौर पर मान्यता प्राप्त PG डिग्री और स्थायी पंजीकरण की शर्त रखी गई थी।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस विज्ञापन या किसी संशोधन में यह नहीं कहा गया था कि कट-ऑफ डेट 21 अप्रैल 2025 तक PG के अतिरिक्त पंजीकरण की जरूरत होगी। फिर भी, कई उम्मीदवारों को दस्तावेज सत्यापन या प्रोविजनल रिजल्ट के बाद इसी आधार पर बाहर कर दिया गया।
कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को जांच का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह जांच की जाए कि उम्मीदवारों के पास मान्यता प्राप्त PG डिग्री है या नहीं। यह भी देखा जाए कि PG का परिणाम 21 अप्रैल 2025 या उससे पहले घोषित हुआ था या नहीं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि जो उम्मीदवार इन शर्तों को पूरा करते हैं, उन्हें भर्ती से बाहर नहीं किया जा सकता। इस फैसले को चिकित्सा भर्ती और भविष्य की सभी सरकारी भर्तियों के लिए काफी अहम माना जा रहा है।
इंदौर पीठ ने एमपीपीएससीको आदेश दिया है कि वह 15 दिनों में फैसला करे। आयोग को सभी अभ्यर्थियों की आपत्तियों और प्रतिनिधित्व पर फैसला लेना होगा। इसके साथ ही, भर्ती प्रक्रिया को नए सिरे से शुरू करना होगा। सभी पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर दिया जाएगा। आयोग को पूरी प्रक्रिया की रिपोर्ट कोर्ट में देनी होगी।
इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि भर्ती प्रक्रिया में अचानक नियमों का बदलाव करना गलत है। इससे उम्मीदवारों के अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। यह फैसला सिर्फ चिकित्सा क्षेत्र के लिए नहीं, बल्कि सभी सरकारी भर्तियों के लिए भी बहुत अहम होगा।
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क्या कहा हाईकोर्ट ने?
जस्टिस जय कुमार पिल्लई की एकलपीठ ने कहा कि उम्मीदवारों को यह उम्मीद थी कि उनका चयन विज्ञापन में दी गई शर्तों के अनुसार होगा। कोर्ट ने कहा कि ऐसे नियम लागू करना जो विज्ञापन का हिस्सा नहीं थे, यह भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता के खिलाफ है।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस विज्ञापन या किसी संशोधन में यह नहीं कहा गया था कि कट-ऑफ डेट 21 अप्रैल 2025 तक PG के अतिरिक्त पंजीकरण की जरूरत होगी। फिर भी, कई उम्मीदवारों को दस्तावेज सत्यापन या प्रोविजनल रिजल्ट के बाद इसी आधार पर बाहर कर दिया गया।
कोर्ट ने क्या निर्देश दिए?
कोर्ट ने यह भी कहा कि जो उम्मीदवार इन शर्तों को पूरा करते हैं, उन्हें भर्ती से बाहर नहीं किया जा सकता। इस फैसले को चिकित्सा भर्ती और भविष्य की सभी सरकारी भर्तियों के लिए काफी अहम माना जा रहा है।
भर्ती प्रक्रिया को नए सिरे से शुरू करें
अब आगे क्या...
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