नर्सरी के नाम पर चल रही थी MD ड्रग्स की फैक्ट्री, इंदौर के कारोबारी का ऐसे हुआ भंडाफोड़

Amresh Kushwaha | Jan 15, 2026, 15:38 IST
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msme nursery md drugs factory indore
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मध्यप्रदेश के आगर-मालवा जिले की एक नर्सरी में MD ड्रग्स फैक्ट्री पकड़ी गई है। इसमें इंदौर के कारोबारी परिवार का नाम सामने आया है। जांच में MSME रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पर भी सवाल उठे हैं।

नर्सरी के नाम पर चल रही थी MD ड्रग्स की फैक्ट्री, इंदौर के कारोबारी का ऐसे हुआ भंडाफोड़

NewsIn Short

  • आगर-मालवा में नर्सरी तीर्थ उद्यम फॉर्म से 31 किलो MD ड्रग्स की फैक्ट्री पकड़ी गई।
  • नर्सरी का MSME रजिस्ट्रेशन इंदौर में हुआ, लेकिन संचालन आगर-मालवा में था।
  • इंदौर के कारोबारी परिवार के नाम रजिस्टरेशन दस्तावेजों में आए, लेकिन कोई आरोपी नहीं।
  • सीबीएन की कार्रवाई के बाद सवाल उठे कि स्थानीय पुलिस को जानकारी क्यों नहीं दी गई।
  • मध्यप्रदेश-राजस्थान सीमा पर MD ड्रग्स का उत्पादन और सप्लाई तेजी से बढ़ रहा है।

News In Detail

आगर-मालवा जिले में शनिवार को एक नर्सरी पर एमडी ड्रग्स की फैक्ट्री पकड़ी गई। बताया जा रहा है कि इस नर्सरी की जमीन इंदौर के एक बड़े कारोबारी के पास है। यह नर्सरी ‘तीर्थ उद्यम फॉर्म’ के नाम से चल रही थी। इस नर्सरी का रजिस्ट्रेशन 29 जून 2024 को इंदौर में उद्योग विभाग में हुआ था। हालांकि, नर्सरी का असली प्लांट आगर-मालवा जिले में था, जबकि रजिस्टर्ड लोकेशन इंदौर के नासिया रोड पर दिखाई गई थी।

इंदौर के कारोबारी परिवार का नाम आया सामने

दैनिक भास्कर में छपी खबर के अनुसार, रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों में ईमेल आईडी संदीप पोखरना के नाम पर दर्ज है, जबकि मोबाइल नंबर अभय पोखरना के नाम पर है। इस जमीन से जुड़े और भी लोग हैं, जैसे अनिल पोखरना, अभय पोखरना, संदीप पोखरना और उनके परिवार के सदस्य। जमीन का एक हिस्सा कालूराम रातड़िया और उनके परिवार के नाम भी है, जो पहले कुछ और मामलों में आरोपी रह चुके हैं।

हालांकि, अब तक इन लोगों में से किसी को भी आरोपी नहीं बनाया गया है। भास्कर की जांच में यह सामने आया कि नर्सरी के सामान्य व्यापार के नाम पर इंदौर के परदेशीपुरा स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा का अकाउंट इस्तेमाल हो रहा था।

कार्रवाई के बाद अफसरों ने साधी चुप्पी

यह कार्रवाई सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (CBN) ने की है। वहीं, कार्रवाई के बाद से संबंधित अफसरों ने चुप्पी साध रखी है। कार्रवाई के दौरान टीम के साथ सीबीएन के नीमच-जावरा प्रकोष्ठ के अधीक्षक वीएस कुमार मौजूद थे। उन्होंने कहा कि यह उनका क्षेत्र नहीं है। वहीं, सीबीएन के उज्जैन प्रकोष्ठ के अधीक्षक मुकेश खत्री ने कोई भी आधिकारिक बयान देने से मना कर दिया।

इस बीच, जमीन के मालिक अभय कुमार पोखरना फोन और संदेशों का जवाब नहीं दे रहे हैं, जबकि कालूराम रातड़िया का मोबाइल बंद है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब टीम नर्सरी पर कार्रवाई करने पहुंची, तो स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। खासकर जब इलाके की स्थिति सुनसान और दूर-दराज की थी, जिससे हमले का खतरा था।

आगर-मालवा के एसपी विनोदकुमार सिंह ने भी यह कहा है कि उन्हें कार्रवाई की पूर्व सूचना नहीं मिली थी।

यह नर्सरी आगर-झालावाड़ रोड पर सुसनेर के पास, मुख्य सड़क से करीब 2 किलोमीटर अंदर सुनसान इलाके में स्थित थी। यहां लगातार वाहनों की आवाजाही होती रहती थी। इससे स्थानीय लोगों को किसी तरह का शक नहीं हुआ।

मध्यप्रदेश-राजस्थान सीमा पर माफिया का नेटवर्क

मध्यप्रदेश और राजस्थान की सीमा अब सिर्फ अफीम तस्करी का रास्ता नहीं रही। अब यह इलाका एमडी ड्रग्स (MD drugs) के तस्करी का नया रास्ता बन गया है। पिछले 15 महीनों में रतलाम, मंदसौर, आगर-मालवा और भोपाल से सात ड्रग फैक्ट्रियां पकड़ी जा चुकी हैं। इनमें से तीन जिले बॉर्डर के पास स्थित हैं। अब तक इन फैक्ट्रियों से करीब 1982 करोड़ रुपए की ड्रग्स जब्त की गई है।

जानकारों के अनुसार, इंदौर, भोपाल, जयपुर और उदयपुर जैसे बड़े शहरों के पास होने के कारण यहां से ड्रग्स की सप्लाई आसान हो जाती है। इन जिलों में एमडी ड्रग्स की खपत कम है, लेकिन तस्करों के लिए यह रास्ता सबसे सुरक्षित और प्राथमिक बन चुका है।

3 एकड़ में फैली हुई थी फैक्टरी

आगर-मालवा में पकड़ी गई ड्रग फैक्टरी से सीबीएन ने 31 किलो एमडी ड्रग्स (MD drugs) बरामद की है। यह फैक्टरी 3 एकड़ में फैली हुई थी और सुरक्षा के लिए तारों में करंट छोड़ा गया था। भोपाल के बाद आगर-मालवा की यह फैक्टरी मंदसौर और राजस्थान के देवलजी नेटवर्क से जुड़ी हुई है।

6 अक्टूबर को भोपाल में पकड़ी गई 1814 करोड़ रुपए की ड्रग फैक्टरी में मंदसौर निवासी हरीश आंजना का नाम सामने आया था। पूछताछ में हरीश ने देवलजी के शोएब लाला को पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया था।

अब आगर-मालवा मामले में पकड़े गए आरोपी धारासिंह और प्रहलाद सिंह के तार मंदसौर के बड़े तस्कर गब्बू से जुड़े मिले हैं। गब्बू से अलग होने के बाद दोनों ने अपना नेटवर्क शुरू किया, लेकिन ग्राहक पुराने ही रहे।

इन दोनों आरोपियों के बारे में जानकारी पहले से ही नहीं थी। इस नेटवर्क की पुष्टि 21 अक्टूबर 2025 को गरोठ में पकड़ी गई 1.50 लाख रुपए की एमडी ड्रग्स से हुई। इसमें आरोपी कुशालसिंह ने ड्रग्स धारासिंह से लेकर देवलजी के जमशेद उर्फ सेठ लाला पठान को देने की बात कबूली थी।

MSME रजिस्ट्रेशन में हुई लापरवाही

इस मामले में उद्योग विभाग और एमएसएमई की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। नर्सरी का रजिस्ट्रेशन इंदौर में हुआ, लेकिन इसका संचालन आगर-मालवा में पाया गया। उद्यम रजिस्ट्रेशन फॉर्म में लोकेशन का मैप देना जरूरी होता है।

एमएसएमई और जिला उद्योग केंद्र के अफसर इसे सेल्फ डिक्लेरेशन की प्रक्रिया बता रहे हैं। इसका मतलब है कि आवेदक खुद ही जानकारी देता है। ऐसे में यदि गलत जानकारी दी जाए, तो विभागीय जिम्मेदारी पर सवाल खड़े होते हैं।

एमएसएमई के असिस्टेंट डायरेक्टर नीलेश त्रिवेदी का कहना है कि पैन, पता और अन्य जानकारी आवेदक खुद देता है। यदि गलत जानकारी या आपराधिक गतिविधि सामने आती है, तो ब्लैकलिस्टिंग और कार्रवाई की जाती है।

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