हाई कोर्ट से राहत मिलने के बाद भी NEET-PG अभ्यर्थियों की परेशानी बरकरार, मूल दस्तावेजों के लिए फिर पहुंच रहे कोर्ट
Neel Tiwari | Nov 05, 2026, 20:49 IST
NEET-PG 2026 में चयनित डॉक्टरों के MBBS दस्तावेज ग्रामीण बांड से अटके
मध्यप्रदेश में NEET-PG 2026 में चयनित डॉक्टरों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ग्रामीण सेवा के बॉन्ड के कारण उनके MBBS के मूल दस्तावेज अटके हुए हैं। इन दस्तावेजों के बिना डॉक्टरों के लिए पीजी काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया में आगे बढ़ना मुश्किल हो रहा है।
खास बात यह है कि मध्यप्रदेश हाई कोर्ट पहले ही ऐसे डॉक्टरों को राहत देने के निर्देश दे चुका है। इसके बावजूद उन्हें अपने दस्तावेज हासिल करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है।
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच में 5 नवंबर को जस्टिस विवेक रुसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने शिवंशी जाट एवं अन्य की याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं ने चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (DME) के 22 अक्टूबर 2026 के आदेश को चुनौती दी थी। उन्होंने अपने MBBS के मूल दस्तावेज वापस दिलाने और NEET-PG काउंसलिंग में शामिल होने की अनुमति मांगी थी।
कोर्ट ने पाया कि डॉक्टरों की इस याचिका में उठाया गया विवाद पहले ही एक अन्य मामले में तय हो चुका है। इसलिए बेंच ने 28 अक्टूबर 2026 को मनीष पटेल एवं अन्य की याचिका में दिए गए आदेश को वर्तमान मामले में भी लागू करने का निर्देश दिया। इसका मतलब है कि शिवंशी जाट और अन्य याचिकाकर्ताओं को भी पहले तय की गई शर्तों के अनुसार राहत मिलेगी।
इस पूरे विवाद की जड़ मध्यप्रदेश सरकार की ग्रामीण सेवा से जुड़ी नीति है। सरकारी नियमों और नीति के अनुसार, MBBS पूरा करने वाले डॉक्टरों को निर्धारित अवधि तक ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं देनी होती हैं। इसके लिए उनसे बॉन्ड भरवाया जाता है। ग्रामीण सेवा की अवधि पूरी नहीं करने पर डॉक्टरों को बॉन्ड की निर्धारित राशि जमा करनी होती है।
ऐसे कई डॉक्टर हैं, जिन्होंने MBBS के बाद इंटर्नशिप पूरी कर ली है, लेकिन उनकी ग्रामीण सेवा की अवधि अभी बाकी है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज उनके मूल दस्तावेज वापस करने से इनकार कर रहे हैं। दूसरी ओर, NEET-PG में चयनित होने के बाद डॉक्टरों को आगे की पढ़ाई के लिए इन दस्तावेजों की जरूरत पड़ रही है। कई डॉक्टर आर्थिक परेशानी के कारण बॉन्ड की पूरी राशि जमा करने की स्थिति में भी नहीं हैं।
चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने 22 अक्टूबर 2026 को सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों को मूल दस्तावेज लौटाने के संबंध में निर्देश जारी किए थे। इनमें कुछ शर्तों के साथ दस्तावेज लौटाने की व्यवस्था की गई थी। जिन डॉक्टरों ने निर्धारित अवधि में इंटर्नशिप पूरी कर ली थी, उन्हें आवंटन पत्र और निर्धारित हलफनामा देने पर दस्तावेज लौटाने की बात कही गई थी। वहीं, ग्रामीण सेवा की अवधि पूरी नहीं करने वाले अन्य डॉक्टरों के लिए बैंक गारंटी जमा करना जरूरी किया गया था। इसी शर्त के कारण आर्थिक रूप से कमजोर डॉक्टरों के सामने परेशानी खड़ी हो गई। उन्हें पीजी में प्रवेश के लिए मूल दस्तावेज चाहिए थे, लेकिन बैंक गारंटी की शर्त पूरी करना आसान नहीं था।
मनीष पटेल एवं अन्य की याचिका पर 28 अक्टूबर को जस्टिस विवेक रुसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की बेंच ने महत्वपूर्ण आदेश दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि NEET-PG में चयनित डॉक्टरों के मूल दस्तावेज वापस करने के लिए अलग-अलग श्रेणियों के अनुसार व्यवस्था लागू होगी।
पहली श्रेणी: इसमें उन सभी डॉक्टरों को रखा गया, जिन्होंने किसी भी शैक्षणिक सत्र में इंटर्नशिप पूरी कर ली है। उन्हें काउंसलिंग पूरी होने और कॉलेज आवंटन पत्र देने के दो दिनों के भीतर मूल दस्तावेज वापस करने के निर्देश दिए गए। इसके लिए उन्हें निर्धारित प्रारूप में हलफनामा देना होगा कि वे पीजी की डिग्री मिलने के बाद ग्रामीण सेवा की बची हुई अवधि पूरी करेंगे।
दूसरी श्रेणी: इसमें SC, ST, OBC, EWS और BPL वर्ग के डॉक्टरों को रखा गया। उन्हें भी इंटर्नशिप पूरी करने के बाद आवंटन पत्र, निर्धारित हलफनामा और बिना तारीख का चेक जमा करने पर दो दिनों के भीतर मूल दस्तावेज लौटाने के निर्देश दिए गए। इस श्रेणी के डॉक्टरों के लिए बैंक गारंटी की शर्त नहीं रखी गई।
तीसरी श्रेणी: इसमें बाकी डॉक्टर शामिल हैं। उन्हें काउंसलिंग पूरी होने और कॉलेज आवंटन पत्र देने के बाद पीजी की पढ़ाई पूरी कर ग्रामीण सेवा की बची हुई अवधि पूरी करने का हलफनामा देना होगा। इसके साथ ही उन्हें बैंक गारंटी भी जमा करनी होगी। ये शर्तें पूरी करने के बाद दो दिनों के भीतर उनके मूल दस्तावेज लौटाने होंगे।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में एक और महत्वपूर्ण व्यवस्था की थी। इसके अनुसार, मूल दस्तावेज वापस मिलने के बाद डॉक्टरों को पीजी में प्रवेश लेते समय इन्हें आवंटित मेडिकल कॉलेज में जमा करना होगा। ये दस्तावेज ग्रामीण सेवा की निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद ही वापस मिलेंगे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि ये निर्देश राज्य कोटे के साथ-साथ अखिल भारतीय कोटे के तहत प्रवेश लेने वाले डॉक्टरों पर भी लागू होंगे। डॉक्टर प्रवेश के समय संबंधित मेडिकल कॉलेज में हाई कोर्ट के आदेश की प्रति प्रस्तुत कर सकेंगे।
28 अक्टूबर के आदेश में हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि ये निर्देश NEET-PG 2026 में चयनित सभी समान स्थिति वाले डॉक्टरों और छात्रों पर लागू होंगे। ऐसे डॉक्टरों को राहत पाने के लिए अलग से हाई कोर्ट जाने की जरूरत नहीं है। 5 नवंबर को शिवंशी जाट एवं अन्य की याचिका पर आए आदेश में भी इसी व्यवस्था को लागू किया गया है। कोर्ट ने 28 अक्टूबर के आदेश को आवश्यक बदलावों के साथ वर्तमान मामले में भी प्रभावी कर दिया है।
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि जब हाई कोर्ट ने सभी समान स्थिति वाले डॉक्टरों के लिए राहत तय कर दी है, तो फिर उन्हें अपने मूल दस्तावेज हासिल करने में परेशानी क्यों हो रही है? कोर्ट का आदेश डॉक्टरों को काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया में आगे बढ़ने का रास्ता देता है। लेकिन इस राहत का लाभ समय पर मिलना भी जरूरी है। NEET-PG में चयनित डॉक्टरों के लिए काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया समयबद्ध होती है। ऐसे में दस्तावेजों की वापसी में देरी उनके पीजी प्रवेश को प्रभावित कर सकती है। अब देखना होगा कि चिकित्सा शिक्षा विभाग और मेडिकल कॉलेज हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन कितनी तेजी से करते हैं।
5 नवंबर को हाई कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
कोर्ट ने पाया कि डॉक्टरों की इस याचिका में उठाया गया विवाद पहले ही एक अन्य मामले में तय हो चुका है। इसलिए बेंच ने 28 अक्टूबर 2026 को मनीष पटेल एवं अन्य की याचिका में दिए गए आदेश को वर्तमान मामले में भी लागू करने का निर्देश दिया। इसका मतलब है कि शिवंशी जाट और अन्य याचिकाकर्ताओं को भी पहले तय की गई शर्तों के अनुसार राहत मिलेगी।
आखिर क्यों अटके हैं डॉक्टरों के मूल दस्तावेज?
ऐसे कई डॉक्टर हैं, जिन्होंने MBBS के बाद इंटर्नशिप पूरी कर ली है, लेकिन उनकी ग्रामीण सेवा की अवधि अभी बाकी है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज उनके मूल दस्तावेज वापस करने से इनकार कर रहे हैं। दूसरी ओर, NEET-PG में चयनित होने के बाद डॉक्टरों को आगे की पढ़ाई के लिए इन दस्तावेजों की जरूरत पड़ रही है। कई डॉक्टर आर्थिक परेशानी के कारण बॉन्ड की पूरी राशि जमा करने की स्थिति में भी नहीं हैं।
22 अक्टूबर के आदेश ने बढ़ाई थी मुश्किल
28 अक्टूबर को हाई कोर्ट ने तीन श्रेणियों में दी थी राहत
पहली श्रेणी: इसमें उन सभी डॉक्टरों को रखा गया, जिन्होंने किसी भी शैक्षणिक सत्र में इंटर्नशिप पूरी कर ली है। उन्हें काउंसलिंग पूरी होने और कॉलेज आवंटन पत्र देने के दो दिनों के भीतर मूल दस्तावेज वापस करने के निर्देश दिए गए। इसके लिए उन्हें निर्धारित प्रारूप में हलफनामा देना होगा कि वे पीजी की डिग्री मिलने के बाद ग्रामीण सेवा की बची हुई अवधि पूरी करेंगे।
दूसरी श्रेणी: इसमें SC, ST, OBC, EWS और BPL वर्ग के डॉक्टरों को रखा गया। उन्हें भी इंटर्नशिप पूरी करने के बाद आवंटन पत्र, निर्धारित हलफनामा और बिना तारीख का चेक जमा करने पर दो दिनों के भीतर मूल दस्तावेज लौटाने के निर्देश दिए गए। इस श्रेणी के डॉक्टरों के लिए बैंक गारंटी की शर्त नहीं रखी गई।
तीसरी श्रेणी: इसमें बाकी डॉक्टर शामिल हैं। उन्हें काउंसलिंग पूरी होने और कॉलेज आवंटन पत्र देने के बाद पीजी की पढ़ाई पूरी कर ग्रामीण सेवा की बची हुई अवधि पूरी करने का हलफनामा देना होगा। इसके साथ ही उन्हें बैंक गारंटी भी जमा करनी होगी। ये शर्तें पूरी करने के बाद दो दिनों के भीतर उनके मूल दस्तावेज लौटाने होंगे।
पीजी में प्रवेश के बाद भी कॉलेज के पास रहेंगे दस्तावेज
हर डॉक्टर को कोर्ट आने की जरूरत नहीं
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि जब हाई कोर्ट ने सभी समान स्थिति वाले डॉक्टरों के लिए राहत तय कर दी है, तो फिर उन्हें अपने मूल दस्तावेज हासिल करने में परेशानी क्यों हो रही है? कोर्ट का आदेश डॉक्टरों को काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया में आगे बढ़ने का रास्ता देता है। लेकिन इस राहत का लाभ समय पर मिलना भी जरूरी है। NEET-PG में चयनित डॉक्टरों के लिए काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया समयबद्ध होती है। ऐसे में दस्तावेजों की वापसी में देरी उनके पीजी प्रवेश को प्रभावित कर सकती है। अब देखना होगा कि चिकित्सा शिक्षा विभाग और मेडिकल कॉलेज हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन कितनी तेजी से करते हैं।
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