ओबीसी आरक्षण : पहले दिन पूरी नहीं हो पाई सुनवाई! अब 28 अप्रैल को हाईकोर्ट में केस पर बहस

Neel Tiwari | Apr 27, 2026, 18:36 IST
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OBC reservation
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जबलपुर हाईकोर्ट में OBC आरक्षण मामले की अंतिम सुनवाई पहले दिन तय समय पर शुरू नहीं हो सकी। अन्य बेंच के उपलब्ध न होने से चीफ जस्टिस की बेंच पर काम का दबाव बढ़ गया।

News in Short

  • तय समय 12 बजे के बजाय शाम 4:30 बजे शुरू हुई सुनवाई।
  • दूसरी बेंच उपलब्ध न होने से चीफ जस्टिस की बेंच पर बढ़ा दबाव।
  • कोर्ट ने कहा - कल 28 अप्रैल को पूरा समय दिया जाएगा।
  • सरकार की ओर से नियुक्त वकील को लेकर कोर्ट में दिलचस्प बहस, AG ने मांगी माफी।
  • मुख्य याचिका 5901/2019 को माना गया आधार।

News in detail

जबलपुर हाईकोर्ट में OBC आरक्षण मामले की अंतिम सुनवाई पहले दिन तय समय पर शुरू नहीं हो सकी। अन्य बेंच के उपलब्ध न होने से चीफ जस्टिस की बेंच पर काम का दबाव बढ़ गया। अब कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि मंगलवार को इस मामले को पूरा समय देकर सुनवाई की जाएगी। सरकार के द्वारा नियुक्त अधिवक्ता के सरकार के खिलाफ बहस करने पर भी उठे सवाल।

तय समय पर नहीं हो सकी सुनवाई

जबलपुर हाईकोर्ट में ओबीसी आरक्षण (OBC RESERVATION ) मामले की सुनवाई सोमवार को दोपहर 12:30 बजे से शुरू होनी थी। जस्टिस विवेक रूसिया की डिवीजन बेंच उपलब्ध न होने से चीफ जस्टिस की बेंच पर अन्य मामलों का दबाव बढ़ गया। इसके कारण इस अहम मामले को समय नहीं मिल सका। अंत में शाम करीब 4:30 बजे सुनवाई शुरू हो पाई।

मंगलवार से मिलेगा सुनवाई के लिए पूरा समय

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता वरुण ठाकुर ने कोर्ट को याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश अनुसार इस मामले का निपटारा तीन महीने में करना है। लगभग डेढ़ महीना बीत चुका है। इस पर कोर्ट ने भी सहमति जताई और कहा कि वह खुद इस मामले को जल्द सुनना चाहता है। लेकिन परिस्थितियों के कारण आज समय नहीं मिल पाया। कोर्ट ने साफ किया कि मंगलवार 28 अप्रैल को इस केस को पूरा समय दिया जाएगा।

अब एक ही रिकॉर्ड में जुड़ेंगे सभी दस्तावेज

सुनवाई के दौरान यह अहम मुद्दा उठा कि इस मामले की मुख्य याचिका कौन सी होगी। बहस के बाद कोर्ट ने तय किया कि याचिका क्रमांक 5901/2019 को ही मुख्य आधार माना जाएगा। साथ ही यह भी सामने आया कि अलग-अलग याचिकाओं में फैले तथ्यों और दस्तावेजों का कोई एकीकृत रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि अब सभी जवाब और दस्तावेज मुख्य याचिका में अपलोड किए जाएंगे। इससे एक कम्पाइल्ड डेटा तैयार होगा और सुनवाई सुगम होगी।

वकील को लेकर कोर्ट में तीखी बहस

सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प स्थिति सामने आई जब यह पता चला कि अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह को सरकार की ओर से नियुक्त किया गया है। वे WP 8967/2024 में सरकार के खिलाफ पक्ष रखने की तैयारी कर रहे थे। किसी याचिका में 27% आरक्षण को कम बताते हुए अधिक आरक्षण की मांग की गई थी।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई वकील सरकार की ओर से नियुक्त है, तो वह सरकार के खिलाफ पक्ष नहीं रख सकता। कोर्ट ने सख्ती दिखाई और कहा कि यदि वे सरकार के खिलाफ दलील देना चाहते हैं, तो उन्हें अपनी नियुक्ति से अलग होना होगा।

इस पर अधिवक्ता उदय कुमार ने कहा कि कोर्ट को यह पहले से तय नहीं करना चाहिए कि कौन कितना पक्ष रखेगा। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और पूछा कि क्या उन्हें अधिवक्ता शाह के लिए बहस करने के लिए नियुक्त किया गया है। इसके बाद महाधिवक्ता ने बीच-बचाव किया और कोर्ट से माफी मांगते हुए आश्वासन दिया कि स्थिति स्पष्ट कर ली जाएगी।



28 अप्रैल को तय होगी बहस की दिशा

कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मंगलवार 28 अप्रैल को सुबह 11 बजे से 1:30 बजे तक इस मामले की सुनवाई होगी। पहले से सूचीबद्ध बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं के बाद OBC केस पर बहस शुरू होगी। कल यानी मंगलवार की सुनवाई में सबसे पहले आरक्षण का विरोध करने वाले पक्ष से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप संचेती और अधिवक्ता आदित्य सांघी अपनी दलीलें पेश करेंगे, जिसके बाद सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एम नटराजन पक्ष रखेंगे।

फैसले की ओर बढ़ रहा मामला

पहले दिन सीमित समय मिलने के बावजूद कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब इस मामले को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। लगातार तय सुनवाई और स्पष्ट निर्देशों के बाद यह माना जा रहा है कि OBC आरक्षण का यह बहुचर्चित मामला अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। इस स्थिति में हर दिन की सुनवाई बेहद अहम साबित होगी।

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