अंतिम सुनवाई से जगी उम्मीद पर फिर लगा ब्रेक, अब 16 जून को होगी ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई

Neel Tiwari | May 14, 2026, 17:04 IST
Share
OBC Reservation
OBC Reservation

एमपी में 27% ओबीसी आरक्षण को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में चल रही अंतिम सुनवाई एक बार फिर टल गई है। अब अगली सुनवाई 16 जून 2026 को होगी। हाईकोर्ट की छुट्टियों और चीफ जस्टिस के संभावित सुप्रीम कोर्ट प्रमोशन के बीच मामले के और लंबा खिंचने की आशंका बढ़ गई है।

News in short

  • 27% OBC आरक्षण मामले की सुनवाई अब 16 जून 2026 तक टली।
  • अधिवक्ता अमन लेखी ने आरक्षण प्रतिशत को बताया मनमाना।
  • सरकार पर राजनीतिक लाभ के लिए आरक्षण बढ़ाने का आरोप लगाया गया।
  • हाईकोर्ट की ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के कारण मई में अब नहीं होगी सुनवाई।
  • अगली सुनवाई में अधिवक्ता आदित्य सांघी रखेंगे अनारक्षित वर्ग का पक्ष।

News in detail

मध्यप्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में चल रही अंतिम सुनवाई एक बार फिर टल गई है। यह सुनवाई पहले 13, 14 और 15 मई को तय थी। हाईकोर्ट की ग्रीष्मकालीन छुट्टियों और चीफ जस्टिस के प्रमोशन के कारण अब यह मामला 16 जून 2026 तक स्थगित कर दिया गया है। हाईकोर्ट की छुट्टियों और चीफ जस्टिस के संभावित सुप्रीम कोर्ट प्रमोशन के बीच मामले के और लंबा खिंचने की आशंका बढ़ गई है।



फिर टली ओबीसी आरक्षण पर अंतिम सुनवाई

मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रही बहुचर्चित सुनवाई एक बार फिर आगे बढ़ गई है। गुरुवार 15 मई को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल बेंच में हुई सुनवाई के बाद अब मामला सीधे 16 जून 2026 तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।

पहले 13, 14 और 15 मई को इस प्रकरण की अंतिम सुनवाई तय की गई थी, जिससे यह उम्मीद जगी थी कि लंबे समय से लंबित इस विवाद पर जल्द फैसला आ सकता है। लेकिन अब हाईकोर्ट की ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के चलते सुनवाई जून तक टल गई है।

अनुराधा भसीन केस का भी दिया गया हवाला

वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी ने सुनवाई के दौरान अनुराधा भसीन मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले में सरकारों को यह संदेश दिया था कि किसी भी समस्या का समाधान नियमों और संवैधानिक सीमाओं के भीतर रहकर किया जाना चाहिए।

इसी तर्क के आधार पर उन्होंने कहा कि सरकार को 27% आरक्षण लागू करने से पहले 50 प्रतिशत की सीमा और अन्य संवैधानिक पहलुओं पर गंभीर समीक्षा करनी चाहिए थी। उनका कहना था कि केवल आबादी के आंकड़ों के आधार पर आरक्षण बढ़ाना उचित नहीं माना जा सकता।

सरकारी योजनाएं विफल रहीं तो जिम्मेदार कौन?

सुनवाई के दौरान सामान्य वर्ग की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि यदि सरकार खुद यह स्वीकार कर रही है कि पिछड़े वर्गों को वर्षों की योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिला, तो यह प्रशासनिक विफलता है।

अधिवक्ता लेखी ने कहा कि ऐसी स्थिति में उसकी कीमत सामान्य वर्ग क्यों चुकाए। उन्होंने अदालत को बताया कि यदि सरकार वास्तव में प्रतिनिधित्व बढ़ाना चाहती थी, तो उसे सभी आरक्षित वर्गों की दोबारा समीक्षा करनी चाहिए थी और उसके बाद संतुलित आधार पर नया आरक्षण ढांचा तैयार करना चाहिए था।

पुरानी रिपोर्टों पर सरकार को घेरा

सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठाया गया कि सरकार अब उन पुरानी आयोग रिपोर्टों का सहारा ले रही है जिनके आंकड़ों की प्रमाणिकता और वर्तमान प्रासंगिकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अनारक्षित वर्ग की ओर से कहा गया कि जब मामला अदालत तक पहुंचा, तब सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग और अन्य पुरानी रिपोर्टों का हवाला देना शुरू किया, जबकि आरक्षण लागू करने से पहले ठोस और अद्यतन डेटा आधारित समीक्षा नहीं की गई थी।

नई बेंच में जा सकता है मामला

इस मामले में अब एक नई कानूनी चुनौती भी सामने आती दिख रही है। जानकारी के अनुसार चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा के जल्द सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि 18 जून के बाद यह मामला किसी नई बेंच के सामने सूचीबद्ध हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो लंबे समय से चल रही विस्तृत सुनवाई को दोबारा समझने और सुनने में अतिरिक्त समय लग सकता है, जिससे फैसला और देर से आने की आशंका बढ़ गई है।

सुप्रीम कोर्ट की तय समय सीमा भी पार

इस पूरे विवाद में एक अहम पहलू यह भी है कि सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2026 में इस मामले के जल्द निपटारे के लिए लगभग 90 दिनों की समय सीमा तय की थी। अब मामला जून तक टलने से यह समय सीमा भी पार हो रही है। ऐसे में प्रदेशभर के लाखों अभ्यर्थियों और दोनों पक्षों की नजर अब 16 जून की सुनवाई पर टिक गई है, जहां अगली बहस अनारक्षित वर्ग की ओर से अधिवक्ता आदित्य सांघी द्वारा रखी जाएगी। उनके बाद राज्य सरकार और ओबीसी आरक्षण समर्थक पक्ष अपनी दलीलें पेश करेंगे।

ओबीसी वर्ग ने की स्पेशल बेंच की मांग

इस दौरान ओबीसी वर्ग की ओर से अधिवक्ता वरुण ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि इस फैसले के कारण लाखों अभ्यर्थी प्रभावित है। उन्होंने कोर्ट से निवेदन किया कि एक स्पेशल वेकेशन बेंच गठित कर इस मामले की सुनवाई की जाए। हालांकि कोर्ट ने कहा कि वेकेशन बेंच में फाइनल हियरिंग होना संभव नहीं है इसलिए उनकी मांग ठुकरा दी गई।

ये खबरें भी पढ़ें...

महिला–ओबीसी आरक्षण और परिसीमन: भारतीय राजनीति की अगली बड़ी करवट

ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई 13 मई तक टली: जानें अब तक क्या-क्या हुआ

ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई में आया तकनीकी रोड़ा, अब दोपहर 2:30 बजे होगी सुनवाई

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ग्राम रोजगार सहायक मार्गदर्शिका 2025 पर रोक

Tags:
  • सुप्रीम कोर्ट
  • मध्यप्रदेश
  • मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
  • जबलपुर हाईकोर्ट
  • OBC
  • ओबीसी आरक्षण
  • ओबीसी वर्ग
  • 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण
  • चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि

By Neel Tiwari

20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

By Sandeep Kumar

मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

By Arun Tiwari

पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच

By Jitendra Shrivastava

भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच