वर्दी का ग्लैमर: सोशल मीडिया पर ‘सिंघम’ बने पुलिसकर्मी, रील और पेड प्रमोशन से उठे अनुशासन पर सवाल
Pawan Modiya | Mar 25, 2026, 22:25 IST
Photograph: (the sootr)
सोशल मीडिया के दौर में लोकप्रियता और फॉलोअर्स की दौड़ अब पुलिस विभाग तक पहुंच गई है। मध्य प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में कुछ पुलिसकर्मी वर्दी पहनकर सोशल मीडिया पर रील और वीडियो बनाते नजर आ रहे हैं।
सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने हर क्षेत्र को प्रभावित किया है और अब इसका असर पुलिस विभाग पर भी साफ दिखाई देने लगा है। मध्य प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में पुलिसकर्मियों द्वारा वर्दी पहनकर सोशल मीडिया पर रील (Police Reel Videos) बनाने और फॉलोअर्स बढ़ाने की होड़ तेजी से बढ़ रही है।
कई मामलों में यह भी सामने आया है कि कुछ पुलिसकर्मी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब पर वर्दी में वीडियो बनाकर पेड प्रमोशन (Paid Promotion) और ब्रांड प्रचार करते नजर आ रहे हैं।
इस प्रवृत्ति ने पुलिस विभाग के अनुशासन और सिविल सेवा नियमों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्दी सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि राज्य की शक्ति और कानून व्यवस्था का प्रतीक है। ऐसे में इसका उपयोग व्यक्तिगत लोकप्रियता या कमाई के लिए करना उचित नहीं माना जाता।
शुरुआत में सोशल मीडिया को ट्रैफिक नियमों, साइबर अपराध से बचाव और जनजागरूकता के लिए उपयोगी माना गया था। लेकिन अब इसकी आड़ में निजी ब्रांडिंग, लोकप्रियता बढ़ाने और उत्पादों के प्रचार के लिए वर्दी का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह प्रवृत्ति पुलिस अनुशासन और सिविल सेवा आचरण नियमों के साथ पुलिस विभाग की छवि के लिए भी चुनौती बनती जा रही है।
सिविल सेवा आचरण नियम
सरकारी कर्मचारी किसी निजी व्यापार या व्यावसायिक गतिविधि में संलग्न नहीं हो सकता। बिना अनुमति किसी कंपनी या उत्पाद का प्रचार करना आचरण नियमों के खिलाफ है।
वर्दी संबंधी प्रोटोकॉल
वर्दी सेवा और अनुशासन का प्रतीक है। निजी लाभ या विज्ञापन के लिए वर्दी का उपयोग करना विभागीय मर्यादा का उल्लंघन माना जाता है।
पुलिस मुख्यालय मप्र के निर्देश
वर्दी में सोशल मीडिया पोस्ट से बचने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। उल्लंघन की स्थिति में विभागीय जांच और कार्रवाई संभव है।
आईटी एक्ट और प्रतिरूपण
यदि कोई फर्जी अकाउंट बनाकर पुलिस पहचान का इस्तेमाल करता है तो यह आईटी एक्ट के तहत दंडनीय अपराध हो सकता है।
सामाजिक और प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक समय में सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाना संभव नहीं है। लेकिन सरकारी कर्मचारियों को इसका उपयोग करते समय कुछ सीमाओं और नियमों का पालन करना चाहिए। उनका कहना है कि अगर वर्दी की गरिमा और विभागीय अनुशासन को ध्यान में रखकर सोशल मीडिया का उपयोग किया जाए, तो यह समाज के लिए सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।
अगर पुलिसकर्मियों द्वारा वर्दी में पेड प्रमोशन और सोशल मीडिया ग्लैमर का ट्रेंड बढ़ता रहा, तो संभव है कि सरकार और विभाग को इस विषय पर और सख्त नियम बनाने पड़ें। साथ ही सोशल मीडिया पर सरकारी कर्मचारियों की गतिविधियों की निगरानी भी बढ़ सकती है।
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कई मामलों में यह भी सामने आया है कि कुछ पुलिसकर्मी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब पर वर्दी में वीडियो बनाकर पेड प्रमोशन (Paid Promotion) और ब्रांड प्रचार करते नजर आ रहे हैं।
इस प्रवृत्ति ने पुलिस विभाग के अनुशासन और सिविल सेवा नियमों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्दी सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि राज्य की शक्ति और कानून व्यवस्था का प्रतीक है। ऐसे में इसका उपयोग व्यक्तिगत लोकप्रियता या कमाई के लिए करना उचित नहीं माना जाता।
सकारात्मक शुरुआत, लेकिन बदला मकसद
इन 8 अकाउंट्स से जानें पेड प्रमोशन का खेल
- ऑफिशियल वुमन पुलिस
एक पेज संचालित हो रहा है जहां कई पुलिसकर्मी अपनी वीडियो शेयर कर रहे हैं। इन रील्स के जरिए व्यावसायिक गतिविधियों की भी बातें सामने आई हैं। - इंस्टाग्राम पर पूजा बौद्ध
इस अकाउंट से जुड़ी एक महिला पुलिसकर्मी वर्दी में कई रील्स अपलोड करती हैं। बताया जाता है कि इस अकाउंट के 36 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। - अनुष्का नाम से इंस्टाग्राम अकाउंट
एक महिला आरक्षक का वीडियो यहां पेड प्रमोशन के साथ अपलोड किया गया था। बाद में इस वीडियो को हटाना पड़ा। - सोनम यादव, उज्जैन पुलिस
उज्जैन में तैनात महिला आरक्षक के अकाउंट पर वर्दी में कई रील्स मौजूद हैं। - सोना तिवारी नामक अकाउंट
इस अकाउंट के बायो में पेड प्रमोशन का उल्लेख है और खाकी वर्दीमें पोस्ट और रील्स साझा की गई हैं। - श्रेया अग्रवाल नाम का अकाउंट
इसमें युवती ने मध्य प्रदेश पुलिस और यूपी पुलिस से जुड़े शब्द लिखे हैं। बायो में पेड प्रमोशन और पार्टनरशिप के लिए मैसेज करने का उल्लेख है। - निकिता तिवारी (नेहा) नाम से अकाउंट
इसमें एमपी पुलिस गोपाल का जिक्र है और कई रील्स शेयर की गई हैं। - भोपाल में पदस्थ सब-इंस्पेक्टर अमित पाल
इनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर वर्दी में फोटो और वीडियो के साथ पेड कोलैबोरेशन का उल्लेख भी पाया गया।
क्या कहते हैं नियम?
सरकारी कर्मचारी किसी निजी व्यापार या व्यावसायिक गतिविधि में संलग्न नहीं हो सकता। बिना अनुमति किसी कंपनी या उत्पाद का प्रचार करना आचरण नियमों के खिलाफ है।
वर्दी संबंधी प्रोटोकॉल
वर्दी सेवा और अनुशासन का प्रतीक है। निजी लाभ या विज्ञापन के लिए वर्दी का उपयोग करना विभागीय मर्यादा का उल्लंघन माना जाता है।
पुलिस मुख्यालय मप्र के निर्देश
वर्दी में सोशल मीडिया पोस्ट से बचने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। उल्लंघन की स्थिति में विभागीय जांच और कार्रवाई संभव है।
आईटी एक्ट और प्रतिरूपण
यदि कोई फर्जी अकाउंट बनाकर पुलिस पहचान का इस्तेमाल करता है तो यह आईटी एक्ट के तहत दंडनीय अपराध हो सकता है।
विशेषज्ञों की राय: संतुलन जरूरी
भविष्य में क्या हो सकता है असर
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