एमपी में विधायक-अफसरों की गिरफ्त में पंचायतराज, सरपंच लाचार

Sanjay Sharma | Mar 25, 2026, 22:08 IST
Share
mp mla
mp mla

एमपी में पंचायत राज व्यवस्था भ्रष्टाचार और अफसरशाही की गिरफ्त में है। सरपंचों को विकास कार्यों और भुगतान में हस्तक्षेप नहीं मिलता। पंचायतों का बजट भी एक साल से अटका हुआ है। सरपंचों ने आला अफसर से लगाई गुहार।

News in short

  • मध्य प्रदेश में पंचायत राज व्यवस्था में अफसरशाही का अत्यधिक हस्तक्षेप है।
  • विधायक के इशारे पर विकास कार्यों की प्राथमिकता तय होती है।
  • पंचायतों को केंद्रीय और राज्य योजनाओं की राशि विधायक के इशारे पर मिलती है।
  • पंचायतों का बजट एक साल से अटका हुआ है, कई काम नहीं हो पा रहे।
  • पंचायतों को तकनीकी स्वीकृतियों और विकास कार्यों के लिए अधिकारियों से समस्याएं आ रही हैं।

News in detail

मध्यप्रदेश में पंचायत राज व्यवस्था लाचारी की गिरफ्त में है। अफसरशाही ने जनता से चुनकर आए सरपंचों को किनारे कर दिया है। अधिकारी ठेकेदारों को भुगतान करते हैं और गड़बड़ी पकड़ में आने पर जिम्मेदारी सरपंच पर डाल दी जाती है। जबकि सरपंच के पास भुगतान का अधिकार ही नहीं है। विकास के कामों के लिए पंचायतें विधायकों पर निर्भर हैं। जब तक विधायक का इशारा नहीं होता अधिकारी काम और भुगतान नहीं करते।

मध्य प्रदेश के स्कूलों में छुट्टियों का नया कैलेंडर जारी, एक मई से गर्मियों की छुट्टियां

विकास पर विधायकों की कुंडली

सरपंचों ने एएसीएस पंचायत एवं ग्रामीण विकास दीपाली रस्तोगी से विकास कार्यों में विधायकों के दखल पर ऐतराज जताया। उन्होंने कहा अधिकारी विधायकों के इशारे पर विकास कार्यों की प्राथमिकता तय कर रहे हैं। उनकी पसंद के आधार पर जनपदों से पंचायतों को काम दिए जाते हैं। केंद्रीय और राज्य सरकार की योजनाओं की राशि भी विधायकों के इशारे पर ही पंचायतों को दी जा रही है। जबकि इस पर विधायक के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।

सौरभ चंद्राकर की 1700 करोड़ की प्रॉपर्टी अटैच, बुर्ज खलीफा में भी खरीदा था करोड़ों का अपार्टमेंट

ट्रेजरी में अटका जीरामजी फंड

पंचायतों में ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के कामों का भुगतान महीनों तक अटक रहा है। पहले केंद्र से जारी होने वाली राशि संचालनालय से जिला और जनपद के माध्यम से पंचायतों तक पहुंचती थी। अब महीनों तक इसका पता ही नहीं लग पाता। केंद्र से राज्य में आने वाली राशि अब रिजर्व बैंक से ट्रैजरी पहुंचती हैं। यहां से उसका भुगतान संबंधित जिलों की पंचायतों में किया जाता है। ट्रैजरी में दूसरे विभागों के बिलों के भुगतान की स्थिति में पंचायतों तक राशि पहुंचने में महीनों बीत जाते हैं।

एमपी में 1700 हेक्टेयर जमीन से कोयला निकालेगी एससीएल, छत्तीसगढ़ में कोल इंडिया को मिली 1500 हेक्टेयर लैंड

स्वीकृति-सत्यापन की उलझन

पंचायतों में अधिकारियों का सबसे ज्यादा दखल हो गया है। पंचायतों की ग्राम सभा में पारित प्रस्तावों से संबंधित कामों को तकनीकी स्वीकृति के नाम पर अटकाया जा रहा है। 15वें, 16वें, 5 वे और 6ठे वित्त के कामों की तकनीकी स्वीकृति के लिए भटकाया जा रहा है। जबकि इसके लिए पूर्व में डीपीआर ऑनलाइन करने के बाद तकनीकी स्वीकृति जारी कर दी जाती थी। अधिकारी विकास कार्यों के मूल्यांकन के नाम पर भी चक्कर लगवाते हैं। इसके नाम पर पंचायतों में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार होता है।

एमपी के इस सिद्ध शक्तिपीठ में बड़े-बड़े दिग्गजों के झुकते हैं सिर, शत्रुओं की बुद्धि बांध देती हैं ये देवी

अधिकारविहीन पंचायत और सरपंच

सरपंच प्रतिनिधिमंडल ने एसीएस को बताया कि पंचायतों के पास न बजट है, न ही विकास कार्यों की स्वीकृति का अधिकार है। पंचायतों के पास सचिव, रोजगार सहायकों के नियंत्रण का भी अधिकार नहीं है। किसी भी काम का भुगतान अधिकारी सरपंच की जानकारी के बिना ही कर देते हैं। वहीं जब किसी तरह की गड़बड़ी उजागर होती है तो जिम्मेदारी सरपंच पर डाल दी जाती है। पंचायतों के पास हितग्राहीमूलक योजनाओं के क्रियान्वयन का भी अधिकार नहीं है।

सालभर से अटका पंचायतों का बजट

सरपंच संघ प्रदेश अध्यक्ष राजवीर सिंह तोमर ने एसीएस दीपाली रस्तोगी को पंचायतों की आर्थिक बदहाली की जानकारी दी। उन्होंने बताया पांचवे वित्त की राशि एक साल से अटकी हुई है। इस वजह से पंचायतों के कई भुगतान और कामकाज नहीं हो पा रहे हैं। पंचायतों में सरकारी जमीनों से कब्जा है जिसे हटाने में प्रशासन मदद नहीं कर रहा। ऐसी संपत्तियां पंचायत की आय को बढ़ा सकती हैं।

राजस्थान में शिक्षा और पंचायत राज विभाग में चलेगा अब सिर्फ स्वदेशी, विदेशी सामान इस्तेमाल नहीं किया जाएगा

क्या बोले जिम्मेदार ?

एसीएस दीपाली रस्तोगी का कहना है मनरेगा भुगतान को लेकर कोई स्थाई समस्या नहीं है। वित्त वर्ष के अंतिम समय या अन्य किसी स्थानीय कारण से भुगतान रुक सकता है। सरपंचों ने कई समस्याओं पर बात की है। पंचायत स्तर पर कामों में दिक्कत न आए विभाग इसके प्रयास करता है।

Tags:
  • मध्यप्रदेश
  • मनरेगा
  • सरपंच
  • दीपाली रस्तोगी
  • पंचायत राज विभाग
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि

By Neel Tiwari

20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

By Sandeep Kumar

मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

By Arun Tiwari

पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच

By Jitendra Shrivastava

भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच