राज्यसभा 2026 : एमपी की तीन सीटें, दर्जनों दावेदार और भाजपा-कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान

Ramanand Tiwari | Feb 11, 2026, 22:50 IST
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rajya sabha 2026
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एमपी में 2026 के राज्यसभा चुनाव को लेकर खींचतान बढ़ गई है। तीन सीटें खाली होने वाली हैं। भाजपा की दो और कांग्रेस की एक सीट दांव पर हैं। दोनों पार्टियों में दावेदारों और रणनीतियों पर चर्चा हो रही है।

News in short

  • मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस में हलचल बढ़ी।
  • भाजपा की दो और कांग्रेस की एक सीट पर दावेदारों का संघर्ष।
  • दिग्विजय सिंह ने दोबारा राज्यसभा न जाने का ऐलान किया।
  • भाजपा में स्थानीय चेहरे या युवा नेताओं को मौका देने की चर्चा।
  • कांग्रेस में नए चेहरे के लिए प्रतिस्पर्धा, पार्टी हाईकमान फैसला करेगा।

News in detail

मध्यप्रदेश में 2026 के होने वाले राज्यसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अप्रैल-जून में राज्यसभा की तीन सीटें खाली होने वाली हैं। भाजपा और कांग्रेस में रसूखदार नेता राज्यसभा की होने वाली खाली सीट पर काबिज होने के लिए एक्शन मोड पर नजर आने लगे हैं। भाजपा की दो और कांग्रेस की एक सीट दांव पर है। यही वजह है कि सत्ता और संगठन के बीच खींचतान, दावेदारी और रणनीति की राजनीति खुलकर सामने आने लगी है।

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कौन-कौन सी सीटें हो रही हैं खाली?

नौ अप्रैल को दिग्विजय सिंह का कार्यकाल पूरा होगा। इसी दिन भाजपा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी का कार्यकाल भी खत्म होगा। जून में केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन का कार्यकाल समाप्त होगा। दिग्विजय सिंह पहले ही साफ कर चुके हैं कि वे दोबारा राज्यसभा नहीं जाएंगे। इससे कांग्रेस में नई दौड़ शुरू हो गई है।

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भाजपा में सस्पेंस: दो सीटें, कई चेहरे

भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि दोनों सीटों पर किसे भेजा जाए। सूत्रों के मुताबिक जॉर्ज कुरियन को दोबारा मौका मिल सकता है। लेकिन सुमेर सोलंकी को लेकर स्थिति साफ नहीं है। उनकी जगह नया चेहरा लाया जा सकता है। प्रदेश नेतृत्व चाहता है कि राज्य की सीटों पर स्थानीय चेहरों को प्राथमिकता मिले। इससे कई पुराने और समर्पित कार्यकर्ता भी सक्रिय हो गए हैं।

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क्या युवा या साधु-संत पर दांव?

भाजपा में चर्चा है कि इस बार युवा चेहरे को मौका दिया जा सकता है। कुछ हलकों में यह भी चर्चा है कि पार्टी सामाजिक संतुलन साधने के लिए साधु-संत या अप्रत्याशित चेहरे पर दांव खेल सकती है। यही वजह है कि अंदरूनी लॉबिंग तेज हो गई है।

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कांग्रेस में ‘दिग्गी’ के बाद कौन?

दिग्विजय सिंह के दोबारा राज्यसभा न जाने के ऐलान के बाद कांग्रेस में नई प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। विधानसभा के गणित के मुताबिक कांग्रेस को एक सीट मिलना तय है। अब सवाल यह है कि पार्टी हाईकमान किसे दिल्ली भेजेगा। चर्चा है कि ऐसा चेहरा खोजा जा रहा है, जो पार्टी की मजबूत आवाज बन सके।

अगले तीन महीने राज्यसभा चुनाव और राजनीतिक हलचलों से भरे रहेंगे। निगम-मंडलों में नियुक्तियां संभावित हैं। मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल की चर्चा है। संगठनात्मक संतुलन साधने की कवायद जारी है। राज्यसभा की सीटें केवल संसदीय प्रतिनिधित्व नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी बनेंगी।

भाजपा-कांग्रेस में ‘नूरा कुश्ती’ या रणनीतिक चुप्पी?

सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि दोनों दल सार्वजनिक रूप से संयम दिखा रहे हैं। लेकिन अंदरखाने जोरदार खींचतान चल रही है। भाजपा में दावेदारों की लंबी सूची है तो कांग्रेस में एक सीट के लिए कई वरिष्ठ नेता सक्रिय हैं। राज्यसभा के नाम तय करना इस बार दोनों दलों के लिए आसान नहीं होगा। तीन सीटें खाली होने जा रही हैं। भाजपा की दो और कांग्रेस की एक सीट दांव पर। दिग्विजय सिंह ने दोबारा न जाने का ऐलान किया। भाजपा में एक सीट पर सस्पेंस, दूसरी पर पुनर्नियुक्ति की संभावना। कांग्रेस में नए चेहरे की तलाश शुरू।

राज्यसभा चुनाव बनेगा शक्ति परीक्षण

मध्यप्रदेश की ये तीन सीटें केवल औपचारिक चुनाव नहीं होंगी। यह चुनाव बताएगा कि भाजपा संगठन में किसे तरजीह देती है और कांग्रेस दिग्विजय के बाद किसे नया चेहरा बनाती है। 2026 की सियासत की असली पटकथा शायद यहीं से लिखी जाएगी।

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