संजय पाठक कंटेंप्ट मामला: आखिर क्यों दीक्षित के वकील को कोर्ट ने लगाई फटकार
Neel Tiwari | Apr 21, 2026, 20:53 IST
Photograph: (THESOOTR)
JABALPUR. हाईकोर्ट में संजय पाठक के कंटेंप्ट मामले में आशुतोष दीक्षित के वकील को कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई। बिना एफिडेविट देखें आरोप लगाने को गलत बताया
News in short
- सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की राहत मिलने का दावा कोर्ट में टिक नहीं पाया।
- हाईकोर्ट ने कहा - हस्तक्षेप और सहायता करने में स्पष्ट अंतर है।
- बिना एफिडेविट देखे उसे “Wishy-washy” बताने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी।
- कोर्ट ने कहा - यह मंच आपसी रंजिश निकालने का माध्यम नहीं बनेगा।
- अगली सुनवाई 14 मई, संजय पाठक को हाजिर रहने के निर्देश।
News In Detail
सुनवाई के दौरान आशुतोष दीक्षित की ओर से पेश अधिवक्ता को तीन से चार बार कोर्ट की कड़ी नाराजगी का सामना करना पड़ा। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि बिना तथ्य के आरोप लगाना और प्रक्रिया को गलत दिशा देना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
दीक्षित को नहीं दी थी हस्तक्षेप करने की राहत
मंगलवार को हाईकोर्ट जबलपुरमें हुई सुनवाई के दौरान इस पूरे पहलू पर स्पष्टता आई और यह सामने आया कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेपकर्ता बनने के लिए कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। बल्कि उन्होंने स्वयं सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह निवेदन किया था कि वे हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई में सहायता करना चाहते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का किया गलत विश्लेषण
इस आधार पर उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया कि उस आदेश को रिकॉर्ड पर लाने के लिए उन्हें थोड़ा समय दिया जाए। इसी क्रम में आशुतोष दीक्षित की ओर से कोर्ट में उपस्थित अधिवक्ता राजेंद्र साहू ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की एक प्रति चीफ जस्टिस की बेंच को सौंपी, ताकि उसे देखा जा सके।
कोर्ट ने आदेश पढ़कर उठाए सीधे सवाल
यह मामला एक स्वतः संज्ञान याचिका है, जिसमें किसी बाहरी पक्ष द्वारा हस्तक्षेप करने का सवाल ही नहीं उठता। कोर्ट ने साफ कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर केवल सहायता करने की अनुमति दी जा सकती है, हस्तक्षेप की नहीं।
एफिडेविट पर टिप्पणी से बढ़ी बहस
कोर्ट ने पूछा क्या आपने एफिडेविट देखा है?
यह उत्तर सामने आते ही कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई और मौखिक रूप से टिप्पणी की कि जब किसी दस्तावेज को गलत या कमजोर बताया जाता है, तो उसके समर्थन में ठोस तथ्य होना आवश्यक है।
कोर्ट ने कहा, बिना देखे आरोप लगाना उचित नहीं
कोर्ट ने दिया सख्त संदेश, रंजिश का मंच नहीं
अधिवक्ता ने कहा एफिडेविट नहीं देना तो ना सही
इस बयान पर कोर्ट ने एक बार फिर नाराजगी जताई और कहा कि आपने पहले ही दो गंभीर आरोप लगाए हैं, पहला कि एफिडेविट Wishy-washy है और दूसरा कि उसमें कही गई बात गलत है। ऐसे में बिना एफिडेविट देखे इस प्रकार के आरोप लगाना पूरी तरह गलत है।
कोर्ट की चेतावनी- ऐसे बयान देने से पहले सतर्क रहें
माफी के बाद दोबारा वही स्टेटमेंट, जज हुए नाराज
इस पर कोर्ट ने दोबारा नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह के बयान देना उचित नहीं है और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने यह भी समझाइश दी कि मामले को व्यक्तिगत रूप देने की कोशिश ना करें।
जज की टिप्पणी- आपकी बातों से सम्मान नहीं दिखता
मुकुल रोहतगी ने रखा संजय पाठक का पक्ष
हाईकोर्ट का अंतिम निर्देश और अगली सुनवाई
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