हाईकोर्ट के इतिहास में पहली बार: सोम डिस्टिलरीज केस से दो जजों का किनारा
Neel Tiwari | Feb 27, 2026, 15:18 IST
som distilleries case
सोम डिस्टलरी मामले में जस्टिस विशाल मिश्रा के बाद जस्टिस संदीप एन. भट्ट ने भी खुद को अलग कर लिया है। इसका कारण सार्वजनिक नहीं हुआ है। वरिष्ठ अधिवक्ता बोले कि जजों का अलग होना असामान्य नहीं लेकिन... पढ़ें पूरी खबर
News in Short
- सोम डिस्टिलरीज मामले से दो जज खुद को सुनवाई से अलग कर चुके हैं।
- जस्टिस विशाल मिश्रा ने पहले बिना कारण बताए रिक्यूजल लिया था।
- अब जस्टिस संदीप एन. भट्ट की बेंच ने भी खुद को मामले से अलग कर लिया है।
- कंपनी के खिलाफ हाईकोर्ट और निचली अदालतों में अनेक प्रकरण लंबित हैं।
News in detail
पहले जस्टिस विशाल मिश्रा ने बिना कारण दर्ज किए खुद को मामले से अलग किया था। इसके बाद मामला जस्टिस संदीप एन. भट्ट की बेंच में लिस्ट हुआ था।
वहीं अब जस्टिस भट्ट ने भी खुद को इस मामले से अलग कर लिया है। हाईकोर्ट की वेबसाइट पर 27 फरवरी 2026 की डेट के साथ यह भी दिखाई दे रहा है कि इस प्रकरण को इस बेंच के समक्ष सूचीबद्ध न किया जाए।
हालांकि जस्टिस भट्ट का विस्तृत आदेश अभी अपलोड नहीं हुआ है। लगातार दो रिक्यूजल (मामले से अलग होने) ने इस बहुचर्चित मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। अब हाईकोर्ट के गलियारों में चर्चाओं का दौर भी तेज हो गया है।
ऐसा माना जा रहा है कि यह एमपी हाईकोर्ट के इतिहास में पहली बार हुआ है जब एक ही मामले में एक के बाद एक दो जजों ने अपनी जिम्मेदारी छोड़ दी हो। कोर्ट के गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई
लाइसेंस निलंबन के बाद हाईकोर्ट पहुंचा मामला
सत्र अदालत में कंपनी से जुड़े कर्मचारियों को दोषी करार दिए जाने के बाद विभाग ने यह कदम उठाया था। इसके बाद, कंपनी ने इस निलंबन को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट में इस मामले में एक के बाद एक जज खुद को अलग कर रहे हैं, जिससे मामला और भी संवेदनशील हो गया है।
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वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कहा रिक्यूजल असामान्य नहीं, लेकिन…
लेकिन कानूनी हलकों में यह भी चर्चा है कि सोम डिस्टिलरीज (Som Distilleries news) मामले में अब तक किसी भी आदेश में कारण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं किया गया है।
जस्टिस विशाल मिश्रा के आदेश में कारण नहीं था और जस्टिस संदीप एन. भट्ट का विस्तृत आदेश अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। यही तथ्य इस मामले को सामान्य रिक्यूजल से अलग बना रहा है और चर्चाओं को हवा दे रहा है।
हाल के उदाहरण जहां कारण स्पष्ट थे
अवैध खनन से जुड़े एक मामले में जस्टिस विशाल मिश्रा ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि एक जनप्रतिनिधि द्वारा फोन पर संपर्क का प्रयास किया गया, जो न्यायिक नैतिकता के अनुरूप नहीं था। इसलिए उन्होंने मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजा।
इसी तरह एक अन्य मामले में, जब पूर्व आदेश पर डिवीजन बेंच द्वारा रोक लगाए जाने की जानकारी सामने आई थी, तो जस्टिस विवेक अग्रवाल ने आगे की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।
हालांकि इन सभी उदाहरणों में कारण दर्ज थे। इसके विपरीत, सोम डिस्टिलरीज मामले में कारण सार्वजनिक न होने से कानूनी हलकों में जिज्ञासा बढ़ी है।
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जस्टिस विशाल मिश्रा ने सोम डिस्टिलरीज केस की सुनवाई से खुद को किया अलग
मामले को लेकर हो रही चर्चाएं और कयास
इसके लिए जजों को संपर्क भी किया जा रहा है। कुछ चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि राजनीतिक स्तर पर कुछ बड़े नेता भी पर्दे के पीछे से कंपनी को समर्थन देने का प्रयास कर रहे हैं।
हालांकि इन सभी बातों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। यह केवल कानूनी और राजनीतिक हलकों में चल रही चर्चाएं हैं।
बार-बार रिक्यूजल का क्या संकेत?
संभावित कारणों में हितों का टकराव, पूर्व परिचय, या किसी भी प्रकार की निष्पक्षता पर आंच आने की आशंका शामिल हो सकती है।
न्यायपालिका की परंपरा यह रही है कि संदेह की थोड़ी सी भी संभावना पर भी न्यायाधीश खुद को केस से अलग कर लेते हैं, ताकि न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता बनी रहे।
आमतौर पर इसके करण आदेश में दर्ज किए जाते हैं जो सोम डिस्टलरी के मामले में नहीं हो रहा है।
फिलहाल यह मामला नई बेंच में लिस्ट होने के इंतजार में है। यह देखना के होगा कि आगे किस न्यायाधीश की लिस्ट में यह मामला आता है और क्या लाइसेंस निलंबन पर कोई अंतरिम राहत मिलती है। हालांकि अगले जज इस मामले की सुनवाई को तैयार होंगे या नहीं यह सबसे पहले देखने वाली बात होगी।
सोम डिस्टिलरीज पहले से कई मामलों में उलझी हुई है। ऐसे में इस केस में बार-बार रिक्यूजल ने इसे केवल एक लाइसेंस विवाद नहीं, बल्कि न्यायिक संवेदनशीलता और न्याय व्यवस्था पर कथित दबाव से जुड़ा प्रकरण बना दिया है। अब सबकी नजर अगली लिस्टिंग पर टिकी है।
जस्टिस भट्टी ने भी नहीं बताया कारण
SOM
सोम डिस्टलरी मामले में जस्टिस संदीप ने भट्टी ने भी मामले से खुद को अलग करने का कोई कारण आदेश में नहीं बताया। बल्कि आज का आदेश और भी छोटा और केवल दो लाइन मात्र का था। जिसमें जस्टिस ने सिर्फ लिखा "इस कोर्ट के समक्ष नहीं" और रजिस्ट्री को आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है। जस्टिस विशाल मिश्रा जब इस मामले से अलग हुए थे तो उन्होंने भी कोई कारण नहीं बताया था और अब जस्टिस भट्टी के आदेश में भी रिक्यूसल के लिए कोई कारण नहीं लिखा गया है।
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