टोल कंपनियों की बढ़ सकती है मुश्किल, सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर हाईकोर्ट का आदेश किया रद्द
Neel Tiwari | Mar 13, 2026, 18:34 IST
Photograph: (thesootr)
सुप्रीम कोर्ट ने टोल वसूली को लेकर इंदौर हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया है। इस मामले की सुनवाई तीन महीने में करने के निर्देश दिए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया था कि मध्य प्रदेश की कुछ सड़कों पर कई गुना ज्यादा राशि टोल के रूप में वसूली जा चुकी है।
News in Short
- सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर हाईकोर्ट द्वारा खारिज की गई PIL को फिर से सुनने का आदेश दिया।
- हाईकोर्ट को तीन महीने के भीतर फैसला सुनाने का निर्देश दिया गया।
- टोल वसूलने वाली कंपनी (कंसेशनेयर) को पक्षकार बनाने की अनुमति दी गई।
- याचिका में आरोप है कि कुछ टोल सड़कों पर लागत से 4 से 6 गुना तक वसूली हो चुकी है।
- कोर्ट ने नोएडा टोल ब्रिज मामले के फैसले को इस केस में प्रासंगिक माना।
News in detail
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सभी जरूरी पक्षों को सुनकर ही इस मामले में फैसला होना चाहिए। साथ ही हाईकोर्ट को निर्देश दिया गया है कि वह इस याचिका पर तीन महीने के भीतर निर्णय करे।
यह याचिका पूर्व विधायक पारस सकलेचा द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि मध्य प्रदेश की कुछ टोल सड़कों पर लागत से कई गुना अधिक टोल वसूला जा चुका है।
सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा टोल वसूली का विवाद
हालांकि, इंदौर हाईकोर्ट ने इस याचिका को सुनने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट का कहना था कि जिस निजी कंपनी को सरकार ने टोल वसूलने का अधिकार दिया है, उसे इस मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया है। इसके बाद याचिकाकर्ता ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
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सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश किया रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना टोल वसूलने वाली कंपनी को सुने कोई अंतिम फैसला नहीं दिया जा सकता। इसलिए याचिकाकर्ता को निर्देश दिया गया कि वे संबंधित कंपनी और अन्य प्रभावित पक्षों को केस में शामिल करें।
लागत से कई गुना ज्यादा टोल वसूली का आरोप
इसी तरह लेबड-जावरा रोड पर 589 करोड़ की लागत के मुकाबले लगभग 2376 करोड़ रुपये और देवास-भोपाल रोड पर 345 करोड़ की लागत के मुकाबले करीब 2056 करोड़ रुपये तक टोल वसूली होने का दावा किया गया है। याचिका में यह भी कहा गया कि टोल वसूली का यह सिलसिला कई सालों तक जारी रहने वाला है।
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दुर्घटनाओं के आंकड़े भी कोर्ट में रखे गए
इन हादसों में 8,314 लोग घायल हुए हैं, जबकि 3,821 लोगों की मौत हो चुकी है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि कंपनियों द्वारा रखरखाव और ब्याज से जुड़े खर्च को वास्तविक आंकड़ों से कहीं ज्यादा दिखाया जा रहा है।
टोल कंपनियों को पक्षकार बनाने की अनुमति
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अनुमति दी कि वे 15 दिनों के भीतर इंदौर हाईकोर्ट में नया आवेदन दाखिल करें और सभी जरूरी पक्षों को केस में शामिल करें। इसके बाद हाईकोर्ट इस मामले की दोबारा सुनवाई करेगा।
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नोएडा टोल ब्रिज केस का भी हुआ जिक्र
कोर्ट ने कहा कि उस फैसले में टोल वसूली की वैधता और उसकी समय सीमा से जुड़े महत्वपूर्ण सिद्धांत तय किए गए थे। इसलिए उस केस के सिद्धांत इस मामले में भी लागू हो सकते हैं।
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अब इंदौर हाईकोर्ट में होगी दोबारा सुनवाई
सरल शब्दों में कहें तो सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को बंद नहीं किया है, बल्कि सभी पक्षों को सुनकर निष्पक्ष फैसला लेने के लिए इसे वापस इंदौर हाईकोर्ट भेज दिया है।
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