सुप्रीम कोर्ट में मप्र सरकार का हलफनामा रहस्य: पेश हुआ या नहीं, जिम्मेदार अंजान
Ravi Awasthi | Jan 08, 2026, 22:09 IST
mp government affidavit
एमपी सरकार का हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में पेश हुआ या नहीं, इस पर सवाल उठ रहे हैं। 8 जनवरी को शपथ पत्र प्रस्तुत होना था। अधिकारियों का कहना है कि हलफनामा नहीं पहुंचा।
BHOPAL. सुप्रीम कोर्ट के समक्ष निजी विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली को लेकर मांगी गई। इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार की तैयारी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालात यह हैं कि 8 जनवरी को शपथ पत्र पेश होना था। लेकिन हलफनामा वास्तव में पेश हुआ या नहीं इसकी आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है।
यह पूरा मामला रिट याचिका WP (Civil) 531/2025, आयशा जैन बनाम एमिटी यूनिवर्सिटी एंड ओआरएस से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर को राज्यों से निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, संचालन और निगरानी की जानकारी मांगी। यह जानकारी शपथ पत्र के माध्यम से मांगी गई थी। यह शपथ पत्र राज्यों के मुख्य सचिव की ओर से पेश किया जाना हैं। इसकी पहली सुनवाई आज गुरुवार को तय थी। इसमें यह शपथ पत्र पेश किया जाना था।
![mp-government-affidavit]()
टीचर बनने अब 4 साल की करनी होगी पढ़ाई, उच्च शिक्षा विभाग की नई रणनीति
हैरत की बात यह कि मुख्य सचिव अनुराग जैन का यह शपथ पत्र सुप्रीम कोर्ट पहुंचा या नहीं। इसे लेकर जिम्मेदार अधिकारी असमंजस में हैं। दरअसल,उच्च शिक्षा विभाग की ओर से अपने ही आयुक्त के नाम एक दिन पहले यानी 7 जनवरी को एक पत्र जारी किया गया। इसमें बताया गया कि प्रकरण में मप्र निजी विवि विनियामक आयोग के सचिव डॉ. डीएस गुर्जर को ओआईसी (ऑफिसर इनचार्ज) बनाया गया है।
कोर्ट के आदेश के मुताबिक,मध्य प्रदेश मुख्य सचिव की ओर से यह हलफनामा न्यायालय में पेश हुआ या नहीं,इसे लेकर जिम्मेदार अधिकारी अंजान हैं। अब जिम्मेदारों के बयानों की बानगी जानिए...
इधर,जानकार सूत्रों का दावा है कि प्रकरण में शपथ पत्र पेश होना तो दूर की बात,अभी तो मध्य प्रदेश की ओर से वकालतनामा भी पेश नहीं हुआ। हालांकि इसकी अधिकृत तौर पर पुष्टि नहीं हो सकी। बताया जाता है कि प्रकरण में मध्य प्रदेश का नाम पांचवे नंबर पर दर्ज है। इस केस की अगली सुनवाई 28 जनवरी तय होना बताया जाता है।
MP Top News : मध्य प्रदेश की बड़ी खबरें
हाईकोर्ट के बाद अब जीएडी के पाले में 100 फीसदी सैलरी का निर्णय
दरअसल,निजी व डीम्ड विश्वविद्यालयों की जानकारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख सख्त है। कोर्ट ने गत 20 नवंबर के अपने आदेश में साफ कहा कि गलत,अधूरी या भ्रामक जानकारी देने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि यह मामला पूरे देश की निजी विश्वविद्यालय व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा है। इधर, कई तरह की गड़बड़ियों के चलते उच्च शिक्षा अनुदान आयोग पहले ही मप्र के 10 विश्वविद्यालयों को डिफाल्टर घोषित कर चुका है। इनमें अधिकांश अब तक इस दाग से उबर नहीं सके। मामला सीधे मुख्य सचिव व सुप्रीमकोर्ट से जुड़ा है। इसके चलते सही जानकारी के साथ हलफनामा तैयार करने में जिम्मेदारों के हाथ पैर फूल रहे हैं।
यह पूरा मामला रिट याचिका WP (Civil) 531/2025, आयशा जैन बनाम एमिटी यूनिवर्सिटी एंड ओआरएस से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर को राज्यों से निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, संचालन और निगरानी की जानकारी मांगी। यह जानकारी शपथ पत्र के माध्यम से मांगी गई थी। यह शपथ पत्र राज्यों के मुख्य सचिव की ओर से पेश किया जाना हैं। इसकी पहली सुनवाई आज गुरुवार को तय थी। इसमें यह शपथ पत्र पेश किया जाना था।
mp-government-affidavit
टीचर बनने अब 4 साल की करनी होगी पढ़ाई, उच्च शिक्षा विभाग की नई रणनीति
शपथ पत्र को लेकर एक दिन पहले जागा विभाग
हलफनामा पेश हुआ या नहीं,जिम्मेदार अंजान
- ओआईसी बनाए गए आयोग के अध्यक्ष प्रो.कमलेश डहरिया ने दो टूक कहा-यह काम उच्च शिक्षा विभाग का है। आयोग का इससे लेना-देना नहीं। जो जानकारी हमारे पास थी,वह हमने विभाग को भेज दी। हमारे यहां से कोई कहीं नहीं गया।
- वहीं आयोग के सचिव एवं प्रकरण के ओआईसी डॉ डी एस गुर्जर ने कहा-मैं तो गया नहीं,लेकिन इसे वकील तक भिजवा दिया। कैसे? जवाब में पहले कहा मेल से,फिर बताया कर्मचारी के हाथों। कर्मचारी का नाम पूछा तो कहा-अभी बताना ठीक नहीं,आप मेरा ही नाम मान लो। वकील का नाम भी वह नहीं बता सके।
- इधर,उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त प्रबल सिपाहा,इस समूचे मामले से ही अंजान नजर आए। विभागीय अवर सचिव के पत्र व प्रकरण का ब्योरा बताने पर उन्होंने कहा- यह सब मैं नहीं देखता। फिलहाल मैं एक बैठक के सिलसिले में अहमदाबाद में हूं। संबंधित अधिकारी से पूछकर ही कुछ कह पाऊंगा।
शपथ पत्र तो दूर,वकालात नामा भी पेश नहीं: सूत्र
MP Top News : मध्य प्रदेश की बड़ी खबरें
हाईकोर्ट के बाद अब जीएडी के पाले में 100 फीसदी सैलरी का निर्णय
हलफनामा देने में कई अड़चनें
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि यह मामला पूरे देश की निजी विश्वविद्यालय व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा है। इधर, कई तरह की गड़बड़ियों के चलते उच्च शिक्षा अनुदान आयोग पहले ही मप्र के 10 विश्वविद्यालयों को डिफाल्टर घोषित कर चुका है। इनमें अधिकांश अब तक इस दाग से उबर नहीं सके। मामला सीधे मुख्य सचिव व सुप्रीमकोर्ट से जुड़ा है। इसके चलते सही जानकारी के साथ हलफनामा तैयार करने में जिम्मेदारों के हाथ पैर फूल रहे हैं।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman