जनजातीय कार्य विभाग की तकनीकी इकाई के अस्तित्व में न आने से अटके निर्माण
Sanjay Sharma | Jan 01, 2026, 23:36 IST
tribal affairs department
जनजातीय कार्य विभाग का तकनीकी संस्थान बनने में कई महीने लग सकते हैं। एक साल पहले इस इकाई की स्वीकृति मिल चुकी थी। पदों और बजट को मंजूरी दी गई थी।
BHOPAL. जनजातीय कार्य विभाग के अपने तकनीकी संस्थान के सपने को साकार होने में अभी भी कई महीने लगना तय है। यह तकनीकी संस्थान मध्यप्रदेश पुलिस के आवास और अधोसंरचना विकास निगम की तरह काम करेगा। यह जनजातीय कार्य विभाग के तहत निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी संभालेगा।
एक साल पहले एमपी सरकार से जनजातीय कार्य विभाग की इस इकाई की स्वीकृति मिल चुकी है। संस्थान के संचालन के लिए पदों और बजट को हरी झंडी दी जा चुकी है। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर इस इकाई को जमीनी हकीकत बनाने में धीमी गति से काम हो रहा है। इस वजह से कई निर्माण परियोजनाओं को आकार लेने में महीनों या अगले साल तक इंतजार हो सकता है।
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निर्माण कार्यों में देरी और गुणवत्ता पर सवाल उठने पर जनजातीय कार्य विभाग ने साल 2024 में अपनी तकनीकी इकाई बनाने का प्रस्ताव सरकार को दिया था। विभाग के इस प्रस्ताव पर सरकार ने सहमति देते हुए बजट भी स्वीकृत कर दिया था। सरकार की सहमति के बाद जनजातीय कार्य विभाग को पद स्वीकृति में ही महीनों लग गए।
यही नहीं पदों की स्वीकृति के बाद भी विभागीय स्तर पर इस काम की रफ्तार गति नहीं पकड़ सकी। विभाग ने जून 2025 में तकनीकी पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया था। यह नोटिफिकेशन स्वीकृति 177 पदों के मुकाबले केवल 21 पदों के लिए था। इसमें अधीक्षक यंत्री (सिविल), कार्यपालन यंत्री (सिविल), सहायक यंत्री (सिविल) और सहायक यंत्री (इलेक्ट्रिक) के पद प्रतिनियुक्ति के आधार पर बने हैं।
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जनजातीय कार्य विभाग की नवीन तकनीकी इकाई के लिए सरकार ने 177 नए पद स्वीकृति किए हैं। इसमें अधीक्षण यंत्री का एक पद है। कार्यपालन यंत्री के 6 पद हैं। सहायक यंत्री (सिविल) के 25 पद हैं। सहायक यंत्री (इलेक्ट्रिक) के 3 पद हैं। उपयंत्री (सिविल) के 123 पद हैं। उपयंत्री (इलेक्ट्रिक) के 9 पद हैं। प्रगति सहायक के 7 पद हैं। निर्माण सहायक और सहायक मानचित्रकार के पद भी शामिल हैं। इनमें से केवल 21 पदों पर प्रतिनियुक्ति से भर्ती की प्रक्रिया तो शुरू कर दी गई है। लेकिन इकाई को पूरी क्षमता से चलाने के लिए शेष पद कब भरे जाएंगे ये अभी भी तय नहीं है।
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जनजातीय कार्य विभाग की तकनीकी इकाई के प्रमुख अधीक्षण यंत्री होंगे। उनके अधीन कार्यपालन यंत्री काम करेंगे। यह पद भोपाल, नर्मदापुरम, इंदौर, उज्जैन, सागर, जबलपुर, ग्वालियर, चंबल, शहडोल और रीवा संभाग में विभागीय निर्माण कार्यों की निगरानी करेंगे। उनके पास संभाग के जिलों में जनजातीय कार्य विभाग के तहत छात्रावास और स्कूल जैसे भवनों के निर्माण की जिम्मेदारी होगी। अब विभाग लोक निर्माण विभाग या अन्य एजेंसियों के भरोसे नहीं रहेगा। विभाग के स्कूल, छात्रावास और कार्यालयों के निर्माण टेक्निकल विंग के आकार न ले पाने की वजह से अटक गए हैं। विभाग इन भवनों को अपनी इकाई से बनवाना चाहता है। इस कारण इन निर्माणों को सालभर इंतजार करना पड़ सकता है।
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अब तक जनजातीय कार्य विभाग के भवनों का निर्माण अन्य विभाग कर रहे थे। पीडब्ल्यूडी, पीआईयू, आवास निर्माण और एमपी आवास एवं अधोसंरचना विकास मंडल जैसी एजेंसियां यह कार्य संभाल रही थीं। इन एजेंसियों के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे हैं। विभाग को इन एजेंसियों की प्राथमिकताओं पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे अकसर निर्माण समय पर पूरा नहीं हो पाता था।
समय पर निर्माण पूरा नहीं होने के कारण बढ़ी हुई लागत का भार जनजातीय कार्य विभाग को उठाना होता था। समय पर निर्माण न होने, लागत बढ़ने और गुणवत्ता पर सवालों को देखते हुए जनजातीय कार्य विभाग ने अपनी तकनीकी इकाई बनाने की तैयारी की है। अब विभाग की यह इकाई डिजाइन, ड्राइंग तैयार करेगी। यह टेंडर बुलाकर एजेंसी के चयन से निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी भी करेगी। हालांकि, इकाई के अस्तित्व में आने में अभी कई महीने लग सकते हैं।
एक साल पहले एमपी सरकार से जनजातीय कार्य विभाग की इस इकाई की स्वीकृति मिल चुकी है। संस्थान के संचालन के लिए पदों और बजट को हरी झंडी दी जा चुकी है। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर इस इकाई को जमीनी हकीकत बनाने में धीमी गति से काम हो रहा है। इस वजह से कई निर्माण परियोजनाओं को आकार लेने में महीनों या अगले साल तक इंतजार हो सकता है।
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धीमी गति से आकार ले रही तकनीकी इकाई
यही नहीं पदों की स्वीकृति के बाद भी विभागीय स्तर पर इस काम की रफ्तार गति नहीं पकड़ सकी। विभाग ने जून 2025 में तकनीकी पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया था। यह नोटिफिकेशन स्वीकृति 177 पदों के मुकाबले केवल 21 पदों के लिए था। इसमें अधीक्षक यंत्री (सिविल), कार्यपालन यंत्री (सिविल), सहायक यंत्री (सिविल) और सहायक यंत्री (इलेक्ट्रिक) के पद प्रतिनियुक्ति के आधार पर बने हैं।
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स्वीकृति 177 की पर भर्ती केवल 21 पदों पर
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