ट्विशा शर्मा सुसाइड केस: पिता ने HC में दायर की रिट पिटीशन, कहा-पहला पोस्टमार्टम संदिग्ध
Neel Tiwari | May 22, 2026, 14:00 IST
twisha sharma death case bhopal high court re postmortem petition
भोपाल की ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला दिन व दिन उलझता जा रहा है। ट्विशा के पिता ने पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए एम्स दिल्ली से दोबारा जांच कराने की मांग की है।
भोपाल में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई ट्विशा शर्मा की मौत अब एक बड़े कानूनी और फोरेंसिक विवाद का रूप ले चुकी है। मृतका के पिता नवनिधि शर्मा ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर मुख्यपीठ में रिट याचिका दायर की है।
उन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी की मौत की निष्पक्ष जांच नहीं हो रही है। पहला पोस्टमार्टम प्रभाव और दबाव में किया गया था।
याचिका में मांग की गई है कि ट्विशा के शव को सुरक्षित रखा जाए। साथ ही एम्स दिल्ली या एम्स जम्मू के विशेषज्ञ डॉक्टरों के बोर्ड से दोबारा पोस्टमार्टम कराया जाए।
याचिका में कहा गया है कि 12 मई 2026 को भोपाल स्थित ससुराल में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। पिता का आरोप है कि शादी के बाद से ही ट्विशा को दहेज और पैसों को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा था।
याचिका के अनुसार पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना देते थे। परिवार ने दावा किया कि मृतका ने कई व्हाट्सएप चैट में अपनी घुटन, डर और प्रताड़ना का जिक्र किया था। इन्हें पुलिस ने जब्त भी किया है।
![bhopal model twisha sharma death case post mortem report]()
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याचिका में घटना की रात का बेहद भावुक और सनसनीखेज विवरण भी दिया गया है। पिता ने कहा कि 12 मई की रात करीब 10:05 बजे ट्विशा अपनी मां से व्हाट्सएप कॉल पर बात कर रही थी।
इसी दौरान बैकग्राउंड में पति समर्थ सिंह की तेज आवाज और चिल्लाने की आवाज सुनाई दी थी। इसके तुरंत बाद कॉल कट गई और मोबाइल बंद हो गया।
परिवार ने कई बार कॉल किए लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। करीब आधे घंटे बाद सास गिरिबाला सिंह ने फोन उठाकर केवल इतना कहा कि She is no more और फोन काट दिया।
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याचिका में सबसे बड़ा सवाल यह उठाया गया है कि यदि यह आत्महत्या थी तो घटना के तुरंत बाद पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी गई। परिवार का कहना है कि कटारा हिल्स थाना आरोपियों के घर से मात्र एक मिनट की दूरी पर है।
इसके बावजूद पुलिस को सूचना देने के बजाय मृतका को सीधे एम्स भोपाल ले जाया गया। याचिका में कहा गया कि आरोपियों ने दावा किया कि ट्विशा ने तीसरी मंजिल पर फांसी लगाई थी। फिर भी न एम्बुलेंस बुलाई गई और न ही तत्काल पुलिस को जानकारी दी गई।
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परिवार ने पहले पोस्टमार्टम को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। याचिका में कहा गया है कि 13 मई को एम्स भोपाल में हुए पोस्टमार्टम के दौरान गिरिबाला सिंह स्वयं अस्पताल में मौजूद थीं।
उनके साथ उनकी बहन डॉ. राजबाला सिंह भदौरिया और रिश्तेदार डॉ. यशवीर जे.के. भी मौजूद थे। परिवार का आरोप है कि इन प्रभावशाली लोगों की मौजूदगी ने डॉक्टरों पर दबाव बनाया। इससे पोस्टमार्टम की निष्पक्षता प्रभावित हुई।
याचिका में यह भी कहा गया कि कथित फांसी में इस्तेमाल लिगेचर सामग्री यानी बेल्ट या रस्सी तक पोस्टमार्टम डॉक्टरों को नहीं दिखाई गई। परिवार ने दावा किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई गंभीर विसंगतियां हैं। ये हत्या की आशंका को मजबूत करती हैं।
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याचिका में पोस्टमार्टम रिपोर्ट को अधूरी, अपर्याप्त और अवैज्ञानिक बताया है। साथ ही कई तकनीकी आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
परिवार का कहना है कि ट्विशा के शरीर पर कई एंटी-मार्टम चोटें थीं, लेकिन उनकी गहराई और गंभीरता की विस्तृत जांच नहीं की गई। गर्दन पर भी दो समानांतर लिगेचर मार्क पाए गए, लेकिन गर्दन का एक्स-रे तक नहीं कराया गया।
परिवार ने यह भी कहा कि रिपोर्ट में फेफड़ों, आंखों और चेहरे से जुड़े निष्कर्ष सामान्य फांसी के मामलों से मेल नहीं खाते हैं। ये सभी निशान गला दबाने या घुटन जैसे मामलों की ओर संकेत करते हैं।
मृतका की वास्तविक लंबाई 172-173 सेंटीमीटर बताई गई, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसे 166 सेंटीमीटर दर्ज किया गया। चोटों की उम्र का भी उल्लेख नहीं किया गया।
याचिका में यह भी सवाल उठाया गया कि डीएनए जांच के लिए नाखूनों की स्क्रैपिंग क्यों ली गई। जबकि इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। परिवार का कहना है कि इससे यह संकेत मिलता है कि डॉक्टरों को संघर्ष या प्रतिरोध की आशंका थी।
परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। याचिका में दावा किया गया कि 15 मई को एफआईआर दर्ज होने से पहले ही 14 मई को गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह ने अग्रिम जमानत के लिए आवेदन लगा दिए थे।
पिता का आरोप है कि इससे साफ है कि आरोपियों को पहले से कानूनी स्थिति की जानकारी थी। पूरा सिस्टम उनके प्रभाव में काम कर रहा था।
याचिका के अनुसार गिरिबाला सिंह को 15 मई को ही भोपाल की अदालत से अग्रिम जमानत मिल गई थी। जबकि समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत 18 मई को खारिज कर दी गई।
परिवार ने हाईकोर्ट से मांग की है कि ट्विशा के शव को तुरंत अत्याधुनिक फ्रीजर सुविधा में सुरक्षित रखा जाए। क्योंकि एम्स भोपाल ने खुद पुलिस को बताया है कि शव को सुरक्षित रखने के लिए -80 डिग्री तापमान की जरूरत है जो वहां उपलब्ध नहीं है। याचिका में आरोप लगाया गया कि समय बीतने के साथ साक्ष्य नष्ट होने की स्थिति बनाई जा रही है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि शव को दिल्ली ले जाना संभव न हो तो, एम्स दिल्ली, एम्स जम्मू या किसी समान प्रतिष्ठा वाले संस्थान के फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भोपाल आकर दोबारा पोस्टमार्टम करे।
परिवार ने विशेष रूप से डॉ. दिनेश राव के नेतृत्व में मेडिकल बोर्ड गठित करने की मांग की है।
रिट याचिका में कहा गया है कि निष्पक्ष जांच केवल आरोपी का नहीं बल्कि पीड़ित परिवार का भी संवैधानिक अधिकार है। परिवार ने अनुच्छेद 14 और 21 का हवाला दिया। इसमें कहा गया कि यदि संदिग्ध और प्रभावशाली लोगों के दबाव में जांच होगी तो सच कभी सामने नहीं आएगा।
इसी आधार पर हाईकोर्ट से हस्तक्षेप कर स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड से दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग की गई है।
उन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी की मौत की निष्पक्ष जांच नहीं हो रही है। पहला पोस्टमार्टम प्रभाव और दबाव में किया गया था।
याचिका में मांग की गई है कि ट्विशा के शव को सुरक्षित रखा जाए। साथ ही एम्स दिल्ली या एम्स जम्मू के विशेषज्ञ डॉक्टरों के बोर्ड से दोबारा पोस्टमार्टम कराया जाए।
याचिका में कहा गया है कि 12 मई 2026 को भोपाल स्थित ससुराल में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। पिता का आरोप है कि शादी के बाद से ही ट्विशा को दहेज और पैसों को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा था।
याचिका के अनुसार पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना देते थे। परिवार ने दावा किया कि मृतका ने कई व्हाट्सएप चैट में अपनी घुटन, डर और प्रताड़ना का जिक्र किया था। इन्हें पुलिस ने जब्त भी किया है।
bhopal model twisha sharma death case post mortem report
ट्विशा शर्मा सुसाइड केस में नया मोड़, शरीर पर मिले चोट के निशान, पोस्ट मार्टम रिपॉर्ट ने खोला राज
आखिरी कॉल में सुनाई दी चीख-पुकार
इसी दौरान बैकग्राउंड में पति समर्थ सिंह की तेज आवाज और चिल्लाने की आवाज सुनाई दी थी। इसके तुरंत बाद कॉल कट गई और मोबाइल बंद हो गया।
परिवार ने कई बार कॉल किए लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। करीब आधे घंटे बाद सास गिरिबाला सिंह ने फोन उठाकर केवल इतना कहा कि She is no more और फोन काट दिया।
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ट्विशा शर्मा सुसाइड केस में नया खुलासा, सास ने ड्रग एडिक्ट होने का किया दावा
पुलिस को तुरंत सूचना क्यों नहीं दी गई?
इसके बावजूद पुलिस को सूचना देने के बजाय मृतका को सीधे एम्स भोपाल ले जाया गया। याचिका में कहा गया कि आरोपियों ने दावा किया कि ट्विशा ने तीसरी मंजिल पर फांसी लगाई थी। फिर भी न एम्बुलेंस बुलाई गई और न ही तत्काल पुलिस को जानकारी दी गई।
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CBI करेगी एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा केस की जांच, MP सरकार ने की सिफारिश
आरोपी और उनके डॉक्टर रिश्तेदार
उनके साथ उनकी बहन डॉ. राजबाला सिंह भदौरिया और रिश्तेदार डॉ. यशवीर जे.के. भी मौजूद थे। परिवार का आरोप है कि इन प्रभावशाली लोगों की मौजूदगी ने डॉक्टरों पर दबाव बनाया। इससे पोस्टमार्टम की निष्पक्षता प्रभावित हुई।
याचिका में यह भी कहा गया कि कथित फांसी में इस्तेमाल लिगेचर सामग्री यानी बेल्ट या रस्सी तक पोस्टमार्टम डॉक्टरों को नहीं दिखाई गई। परिवार ने दावा किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई गंभीर विसंगतियां हैं। ये हत्या की आशंका को मजबूत करती हैं।
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ट्विशा शर्मा केस : फरार पति हाईकोर्ट पहुंचा, सास गिरबाला पर एक्शन की तैयारी
पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर उठाए सवाल
परिवार का कहना है कि ट्विशा के शरीर पर कई एंटी-मार्टम चोटें थीं, लेकिन उनकी गहराई और गंभीरता की विस्तृत जांच नहीं की गई। गर्दन पर भी दो समानांतर लिगेचर मार्क पाए गए, लेकिन गर्दन का एक्स-रे तक नहीं कराया गया।
परिवार ने यह भी कहा कि रिपोर्ट में फेफड़ों, आंखों और चेहरे से जुड़े निष्कर्ष सामान्य फांसी के मामलों से मेल नहीं खाते हैं। ये सभी निशान गला दबाने या घुटन जैसे मामलों की ओर संकेत करते हैं।
मृतका की वास्तविक लंबाई 172-173 सेंटीमीटर बताई गई, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसे 166 सेंटीमीटर दर्ज किया गया। चोटों की उम्र का भी उल्लेख नहीं किया गया।
याचिका में यह भी सवाल उठाया गया कि डीएनए जांच के लिए नाखूनों की स्क्रैपिंग क्यों ली गई। जबकि इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। परिवार का कहना है कि इससे यह संकेत मिलता है कि डॉक्टरों को संघर्ष या प्रतिरोध की आशंका थी।
एफआईआर से पहले लग गई अग्रिम जमानत
पिता का आरोप है कि इससे साफ है कि आरोपियों को पहले से कानूनी स्थिति की जानकारी थी। पूरा सिस्टम उनके प्रभाव में काम कर रहा था।
याचिका के अनुसार गिरिबाला सिंह को 15 मई को ही भोपाल की अदालत से अग्रिम जमानत मिल गई थी। जबकि समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत 18 मई को खारिज कर दी गई।
एम्स दिल्ली में दूसरा पोस्टमार्टम हो
याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि शव को दिल्ली ले जाना संभव न हो तो, एम्स दिल्ली, एम्स जम्मू या किसी समान प्रतिष्ठा वाले संस्थान के फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भोपाल आकर दोबारा पोस्टमार्टम करे।
परिवार ने विशेष रूप से डॉ. दिनेश राव के नेतृत्व में मेडिकल बोर्ड गठित करने की मांग की है।
निष्पक्ष जांच पीड़ित परिवार का भी मौलिक अधिकार
इसी आधार पर हाईकोर्ट से हस्तक्षेप कर स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड से दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग की गई है।
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