मध्य प्रदेश का पहला एक्सेस कंट्रोल फोर लेन हाईवे, उज्जैन-जावरा हाईवे से अब 10 घंटे में पहुंचेंगे उज्जैन से दिल्ली- मुंबई
Pratibha ranaa | Aug 28, 2024, 08:46 IST
उज्जैन-जावरा हाईवे
मध्य प्रदेश का पहला एक्सेस कंट्रोल फोर लेन उज्जैन-जावरा हाईवे बनने जा रहा है, जिससे उज्जैन से दिल्ली और मुंबई का सफर सिर्फ 10 घंटे में पूरा होगा। यह हाईवे सिंहस्थ महाकुंभ 2028 के लिए महत्वपूर्ण है। इसके निर्माण से औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि होगी।
उज्जैन से दिल्ली और मुंबई का सफर अब मात्र 10 घंटों में पूरा हो सकेगा। मध्य प्रदेश सरकार ने उज्जैन- जावरा हाईवे ( Ujjain-Jaora Highway ) पर राज्य का पहला एक्सेस कंट्रोल फोर लेन बनाने का निर्णय लिया है। यह सड़क मार्ग न केवल यात्रा को सरल बनाएगा, बल्कि औद्योगिक गतिविधियों में भी वृद्धि करेगा, जिससे उज्जैन के साथ-साथ जावरा की भी कनेक्टिविटी में सुधार होगा।
इस हाईवे का निर्माण वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ ( Simhastha Mahakumbh 2028 ) को ध्यान में रखकर किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को आवागमन में सहूलियत होगी।
मध्य प्रदेश का पहला एक्सेस कंट्रोल फोर लेन हाईवे उज्जैन और जावरा के बीच बनने जा रहा है। इससे दिल्ली और मुंबई के बीच की यात्रा समय में भारी कमी आएगी। इस हाईवे के निर्माण से उज्जैन का हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से सीधा संपर्क हो जाएगा। जिससे इन राज्यों के लोग भी आसानी से उज्जैन पहुंच सकेंगे।
ये खबर भी पढ़िए...उज्जैन-गरोठ फोरलेन हाईवे बनने से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर, जनता को मिलेंगी ये सुविधाएं
औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ-साथ यह हाईवे दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को भी जोड़ेगा। इस 102 किलोमीटर लंबे एक्सेस कंट्रोल फोर लेन पर कई जगहों पर अंडरपास (सब-वे) बनाए जाएंगे, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका भी कम हो जाएगी।
इस परियोजना की कुल लागत 5,017 करोड़ रुपए है। जल्द ही सर्वे और भू-अर्जन की प्रक्रिया शुरू होगी। सड़क निर्माण को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि भविष्य में इसे आठ लेन तक विस्तारित किया जा सके। यह हाईवे हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) पर आधारित होगा। जिसमें 10 मीटर चौड़ा पेव्हड शोल्डर ग्रीनफील्ड फोर लेन शामिल है। इस मार्ग पर 7 बड़े पुल, 26 छोटे पुल, 270 पुलिया, पांच फ्लाई ओवर और दो रेलवे ओवरब्रिज बनाए जाने का फैसला लिया गया है।
ये खबर भी पढ़िए...सिंहस्थ महाकुंभ 2028 : प्रदेश सचिव ने की 11 विभागों के मुख्य अधिकारियों की समीक्षा, कहा लंबे समय के कार्य तत्काल शुरू करें
इसके अलावा गरोठ में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे का जंक्शन भी बनाया जाएगा, जो देश का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे है। इस एक्सप्रेस-वे की कुल लंबाई 1,350 किमी है। जिसमें से 245 किमी मध्य प्रदेश के तीन जिलों- मंदसौर, रतलाम और झाबुआ से होकर गुजरता है। उज्जैन-जावरा हाईवे इस एक्सप्रेस-वे को उज्जैन से जोड़ने का काम करेगा, जिससे यात्री सुविधाओं में भी इजाफा होगा। सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए, इंदौर-उज्जैन रोड को भी सिक्स लेन किया जाएगा, जिस पर 1,692 करोड़ रुपए की लागत आएगी।
एक्सेस कंट्रोल फोर लेन (Access-Controlled Four-Lane) एक ऐसा सड़क मार्ग है, जिसे विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है ताकि यातायात की सुरक्षा और सुगमता को सुनिश्चित किया जा सके।
![pratibha rana]()
द सूत्र की खबरें आपको कैसी लगती हैं? Google my Business पर हमें कमेंट के साथ रिव्यू दें। कमेंट करने के लिए इसी लिंक पर क्लिक करें
इस हाईवे का निर्माण वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ ( Simhastha Mahakumbh 2028 ) को ध्यान में रखकर किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को आवागमन में सहूलियत होगी।
प्रदेश का पहला एक्सेस कंट्रोल फोर लेन हाईवे
ये खबर भी पढ़िए...उज्जैन-गरोठ फोरलेन हाईवे बनने से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर, जनता को मिलेंगी ये सुविधाएं
फोरलेन हाईवे बनने से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
इस परियोजना की कुल लागत 5,017 करोड़ रुपए है। जल्द ही सर्वे और भू-अर्जन की प्रक्रिया शुरू होगी। सड़क निर्माण को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि भविष्य में इसे आठ लेन तक विस्तारित किया जा सके। यह हाईवे हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) पर आधारित होगा। जिसमें 10 मीटर चौड़ा पेव्हड शोल्डर ग्रीनफील्ड फोर लेन शामिल है। इस मार्ग पर 7 बड़े पुल, 26 छोटे पुल, 270 पुलिया, पांच फ्लाई ओवर और दो रेलवे ओवरब्रिज बनाए जाने का फैसला लिया गया है।
ये खबर भी पढ़िए...सिंहस्थ महाकुंभ 2028 : प्रदेश सचिव ने की 11 विभागों के मुख्य अधिकारियों की समीक्षा, कहा लंबे समय के कार्य तत्काल शुरू करें
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे का जंक्शन गरोठ में
एक्सेस कंट्रोल फोर लेनएक्सेस कंट्रोल फोर लेन क्या है
- नियंत्रित प्रवेश और निकास: एक्सेस कंट्रोल हाईवे पर केवल निर्धारित स्थानों से ही प्रवेश और निकास की अनुमति होती है। इससे सड़क पर अनावश्यक ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो जाती है।
- अलग-अलग लेन: यह हाईवे चार लेन (दो लेन हर दिशा में) से युक्त होता है, जिससे वाहनों की अधिकतम गति सुनिश्चित होती है और ओवरटेकिंग के लिए पर्याप्त जगह मिलती है।
- अंडरपास और फ्लाईओवर: एक्सेस कंट्रोल फोर लेन हाईवे पर अक्सर अंडरपास, फ्लाईओवर और सब-वे का निर्माण किया जाता है ताकि यातायात बाधित न हो और दुर्घटनाओं की संभावना भी कम हो।
- सीमित क्रॉसिंग्स: ऐसे हाईवे पर पैदल यात्री या वाहन चालकों के लिए सड़क पार करने के बहुत ही सीमित अवसर होते हैं, जिससे ट्रैफिक दुर्घटनाओं का जोखिम घट जाता है।
- तेज गति की अनुमति: इस प्रकार की सड़कों पर उच्च गति सीमा होती है, क्योंकि ट्रैफिक नियंत्रण के माध्यम से सड़क पर होने वाली गतिविधियों को सीमित कर दिया जाता है।
pratibha rana
thesootr links
- मध्य प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक
द सूत्र की खबरें आपको कैसी लगती हैं? Google my Business पर हमें कमेंट के साथ रिव्यू दें। कमेंट करने के लिए इसी लिंक पर क्लिक करें
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava