विधानसभा में ‘ गायब ’ हुआ सवाल : सिस्टम के खेल में दबी विधायक की आवाज
Ravi Awasthi | May 29, 2025, 16:23 IST
VIS
मध्य प्रदेश विधानसभा लोकतंत्र का मंदिर है। यहां पूछे जाने वाले सवाल उस मंदिर की घंटियां हैं। जिन्हें दबा देने की कोशिश खुद लोकतंत्र की आत्मा को घायल करती है।
भोपाल।
मध्य प्रदेश विधानसभा सिर्फ एक इमारत नहीं, लोकतंत्र का पवित्र मंदिर है। इसमें पूछे जाने वाले विधायकों के सवाल इस मंदिर की वह घंटियां हैं, जिनकी गूंज से जनता की आवाज़ सत्ता के कानों तक पहुंचती है।
सोचिए,अगर मंदिर से ही घंटियां गायब हो जाएं तो फरियाद की गूंज कैसे पहुंचेगी? ऐसा ही कुछ हुआ है वारासिवनी से कांग्रेस विधायक विवेक विक्की पटेल के साथ, जिनकी आवाज़ पिछले बजट सत्र में उस वक्त दबा दी गई जब उनके द्वारा पूछे गए मान्यता प्राप्त सवाल ही सदन की प्रश्नोत्तरी से गायब हो गए।
ये कोई साधारण चूक नहीं । यह उस लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल है, जो जनता के प्रतिनिधियों को जवाब मांगने का अधिकार देती है। जब सवाल ही मिटा दिए जाएं, तो जवाबदेही की उम्मीद महज एक छलावा बनकर रह जाती है।
मप्र विधानसभा सचिवालय की ऐसी ही एक कारगुजारी से पीड़ित विधायक पटेल ने हाल ही में विधानसभा के प्रमुख सचिव अवधेश प्रताप सिंह को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर की। पटेल पहली बार के विधायक हैं। उनका संसदीय कार्य अनुभव कम है,लेकिन अपने अधिकारों के प्रति वह जागरूक हैं।
यह भी पढ़ें.. 🔴 Sootrdhar Live | अजब MP में गजब कारनामे | इधर सरकारी भर्ती स्थगित, उधर विधानसभा से सवाल गायब !
पटेल ने अपने पत्र में लिखा कि उन्होंने विधानसभा सचिवालय की निर्धारित प्रक्रिया के तहत बजट सत्र में एक निजी विश्वविद्यालय से जुड़े दो अलग-अलग सवाल तय समयावधि में आनलाइन जमा किए।
दोनों ही सवालों के ग्राह्य यानी स्वीकृत होने की लिखित सूचना भी उन्हें सचिवालय से मिली। पटेल ने लिखा कि दोनों ही प्रश्न 11 मार्च को लिए जाने थे,लिहाजा इनकी पूरी तैयारी कर वह सदन में पहुंचे,लेकिन वह उस वक्त अंचभित रह गए जब उनका एक अहम सवाल क्रमांक 504 प्रश्नोत्तरी में शामिल ही नहीं किया गया। जाहिर है,जब सवाल गोल था तो उत्तर भी गोल ही रहा और इस तरह निजी विश्वविद्यालय की कारगुजारी सामने नहीं आ सकी।
यह भी पढ़ें.. कोलारस विधायक की चुनावी चाल, निजी खर्च से ट्रांसफॉर्मर रखवाए, अब सरकार से बदलवाए
विधायक के इस पत्र के बाद राज्य विधानसभा सचिवालय में हड़कंप मचा हुआ है। हाल ही में विधायक पटेल ने प्रमुख सचिव सिंह से व्यक्तिगत मुलाकात भी की और मामले की जांच की मांग रखी। विधानसभा प्रमुख सचिव एपी सिंह स्वयं भी इस प्रकरण को लेकर हतप्रभ हैं। उन्होंने कहा-वह दिखवाते हैं कि चूक कहां हुई।
विधानसभा सचिवालय में प्रश्नों का इस तरह गायब होना। इन्हें अग्राह्याय यानी अस्वीकृत कर देना या फिर प्रश्नकाल के लिए सवालों का चयन। सचिवालय की ऐसी तमाम अपारदर्शी प्रक्रिया,आमतौर पर सवालों के दायरे में रही है। सवाल सदन में दिए गए आश्वासन,विभागों से जवाब पाने वाले लंबित प्रश्नों को लेकर भी उठते रहे हैं। इन सब मामलों में विधानसभा सचिवालय के अमले का रोल बेहद महत्वूपर्ण होता है।
यह भी पढ़ें.. महर्षि वैदिक विश्वविद्यालय में मनमाने तरीके से चांसलर की नियुक्ति
सदन में गहन चर्चा के बाद मंत्रियों की ओर से दिए गए आश्वासनों पर त्वरित कार्रवाई को लेकर न तो विधानसभा सचिवालय गंभीर है, न सरकार। सचिवालय से संबंधित दस्तावेज तय समय में विभागों को नहीं भेजे जाते और विभागीय अफसर तो इनसे बचना ही चाहते हैं।
सदन में दिए गए आश्वासन से जुड़े कुछ मामले ऐसे भी सामने आए,जिन्हें सरकार सात साल बाद भी पूरे नहीं कर सकी।
मप्र विधानसभा के पिछले स्थापना दिवस पर हुई चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि विधायकों के करीब एक हजार से अधिक ऐसे सवाल जिनके उत्तर अब तक नहीं मिल सके।
यह भी पढ़ें.. मूंग पर MSP की मांग तेज, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सीएम मोहन यादव को लिखा पत्र
कुछ विधायक ऐसे भी हैं जो अब भूतपूर्व हो गए,लेकिन सदन में पूछे गए अपने सवालों के जवाब नहीं पा सके।
सदन के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बीते दिनों विधानसभा सचिवालय से कुछ अहम दस्तावेज गायब होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा-हमने बीना विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता को लेकर मय दस्तावेज शिकायत विधानसभा सचिवालय में दर्ज कराई,लेकिन ये विधानसभा से गुम होने की बात कही जा रही है।
मध्य प्रदेश विधानसभा सिर्फ एक इमारत नहीं, लोकतंत्र का पवित्र मंदिर है। इसमें पूछे जाने वाले विधायकों के सवाल इस मंदिर की वह घंटियां हैं, जिनकी गूंज से जनता की आवाज़ सत्ता के कानों तक पहुंचती है।
सोचिए,अगर मंदिर से ही घंटियां गायब हो जाएं तो फरियाद की गूंज कैसे पहुंचेगी? ऐसा ही कुछ हुआ है वारासिवनी से कांग्रेस विधायक विवेक विक्की पटेल के साथ, जिनकी आवाज़ पिछले बजट सत्र में उस वक्त दबा दी गई जब उनके द्वारा पूछे गए मान्यता प्राप्त सवाल ही सदन की प्रश्नोत्तरी से गायब हो गए।
ये कोई साधारण चूक नहीं । यह उस लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल है, जो जनता के प्रतिनिधियों को जवाब मांगने का अधिकार देती है। जब सवाल ही मिटा दिए जाएं, तो जवाबदेही की उम्मीद महज एक छलावा बनकर रह जाती है।
मप्र विधानसभा सचिवालय की ऐसी ही एक कारगुजारी से पीड़ित विधायक पटेल ने हाल ही में विधानसभा के प्रमुख सचिव अवधेश प्रताप सिंह को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर की। पटेल पहली बार के विधायक हैं। उनका संसदीय कार्य अनुभव कम है,लेकिन अपने अधिकारों के प्रति वह जागरूक हैं।
यह भी पढ़ें.. 🔴 Sootrdhar Live | अजब MP में गजब कारनामे | इधर सरकारी भर्ती स्थगित, उधर विधानसभा से सवाल गायब !
स्वीकृत,अदृश्य सवाल एक मूक मजाक !
दोनों ही सवालों के ग्राह्य यानी स्वीकृत होने की लिखित सूचना भी उन्हें सचिवालय से मिली। पटेल ने लिखा कि दोनों ही प्रश्न 11 मार्च को लिए जाने थे,लिहाजा इनकी पूरी तैयारी कर वह सदन में पहुंचे,लेकिन वह उस वक्त अंचभित रह गए जब उनका एक अहम सवाल क्रमांक 504 प्रश्नोत्तरी में शामिल ही नहीं किया गया। जाहिर है,जब सवाल गोल था तो उत्तर भी गोल ही रहा और इस तरह निजी विश्वविद्यालय की कारगुजारी सामने नहीं आ सकी।
यह भी पढ़ें.. कोलारस विधायक की चुनावी चाल, निजी खर्च से ट्रांसफॉर्मर रखवाए, अब सरकार से बदलवाए
विधायक के पत्र से मचा हड़कंप
सवालों के चयन में पारदर्शिता का संकट
यह भी पढ़ें.. महर्षि वैदिक विश्वविद्यालय में मनमाने तरीके से चांसलर की नियुक्ति
आश्वासनों की फाइलों पर जमी धूल
सदन में दिए गए आश्वासन से जुड़े कुछ मामले ऐसे भी सामने आए,जिन्हें सरकार सात साल बाद भी पूरे नहीं कर सकी।
मप्र विधानसभा के पिछले स्थापना दिवस पर हुई चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि विधायकों के करीब एक हजार से अधिक ऐसे सवाल जिनके उत्तर अब तक नहीं मिल सके।
यह भी पढ़ें.. मूंग पर MSP की मांग तेज, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सीएम मोहन यादव को लिखा पत्र
भूतपूर्व हुए लेकिन नहीं मिल सके जवाब
सदन के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बीते दिनों विधानसभा सचिवालय से कुछ अहम दस्तावेज गायब होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा-हमने बीना विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता को लेकर मय दस्तावेज शिकायत विधानसभा सचिवालय में दर्ज कराई,लेकिन ये विधानसभा से गुम होने की बात कही जा रही है।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman