17 साल कोर्ट के लगाए चक्कर, 90 दिन की मिली नौकरी, अप्रैल में रिटायर

Manya Jain | Feb 04, 2026, 16:21 IST
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vidisha teacher gets job after 17 years struggle
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विदिशा के महेश कुमार ने 17 साल तक कोर्ट के चक्कर काटे। अब जाकर उन्हें प्राइमरी टीचर की नौकरी मिली है। विडंबना यह है कि वह सिर्फ 3 महीने नौकरी कर पाएंगे। अप्रैल 2026 में उनका रिटायरमेंट है।

NEWS IN SHORT

  • महेश कुमार ने 17 साल कोर्ट में लड़कर शिक्षक की नौकरी हासिल की।
  • सिस्टम की सुस्ती के कारण उन्हें जॉइनिंग के लिए 2026 तक रुकना पड़ा।
  • महेश कुमार सिर्फ 3 महीने नौकरी कर अप्रैल 2026 में रिटायर हो जाएंगे।
  • प्रशासन ने कोर्ट के कड़े आदेश के बाद 26 शिक्षकों को नियुक्ति दी है।
  • शिक्षक अब 5 हजार सैलरी और हर्जाने के लिए फिर कोर्ट जाएंगे।
vidisha news
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NEWS IN DETAIL

MP News:विदिशा से न्याय और संघर्ष की एक अनोखी कहानी आई है। यह मामला सरकारी तंत्र की सुस्ती को उजागर करता है। महेश कुमार और उनके साथियों ने लंबी लड़ाई लड़ी। उन्हें शिक्षक बनने के लिए 17 साल इंतजार करना पड़ा। उन्होंने इतने साल कोर्ट के चक्कर काटने में बिता दिए। अब जाकर उन्हें प्राइमरी टीचर की नौकरी मिली है।

लेकिन विडंबना देखिए कि उनके पास समय बहुत कम है। महेश कुमार अब सिर्फ तीन महीने ही नौकरी कर पाएंगे। वह 30 अप्रैल 2026 को रिटायर हो जाएंगे। इतने लंबे संघर्ष के बाद यह जीत अधूरी सी लगती है। यह कहानी धैर्य और सिस्टम की खामियों को दिखाती है।

2008 की परीक्षा और 15 साल लंबी कानूनी लड़ाई

यह पूरा मामला साल 2008 में शुरू हुआ था। तब अनुदेशकों और पर्यवेक्षकों ने पात्रता परीक्षा पास की थी। उन्होंनेसंविदा शिक्षक वर्ग 3 की भर्ती के लिए योग्यता साबित की। फिर भी प्रशासनिक कारणों से उनकी नियुक्ति रुक गई। कुल 26 अभ्यर्थियों को नौकरी नहीं मिल पाई थी। इन लोगों ने हार मानने के बजाय कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

उन्होंने ग्वालियर खंडपीठ और जबलपुर हाई कोर्ट में केस लड़ा। यह कानूनी लड़ाई कई सालों तक चलती रही। कोर्ट की तारीखों के बीच उनका संघर्ष जारी रहा। आखिरकार हाई कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट के आदेश से अब उन्हें उनका हक मिलेगा।

दो चरणों में जारी हुए नियुक्ति आदेश

हाई कोर्ट के कड़े रुख के बाद, जिला पंचायत सीईओ ओपी सनोडिया ने दो चरणों में नियुक्तियां प्रदान की।

  1. प्रथम चरण: 19 मई 2025 को 14 शिक्षकों की नियुक्ति के आदेश।
  2. द्वितीय चरण: 14 जनवरी 2026 को शेष 12 शिक्षकों को स्कूल आवंटित किए गए।
इन आदेशों के बाद जिले के लटेरी, नटेरन, सिरोंज और कुरवाई जैसे ब्लॉकों में ये 26 शिक्षक पदस्थ हो चुके हैं।

जीत का मीठा स्वाद या कड़वी हकीकत?

लटेरी ब्लॉक के परवरिया गांव के रहने वाले महेश कुमार विश्वकर्मा 23 जनवरी 2026 को अपने ही गांव के सरकारी स्कूल में शिक्षक बन गए। लेकिन उनकी इस जीत में एक टीस भी है। 17 साल तक सिस्टम से लड़ने के बाद उन्हें केवल 100 दिनों से भी कम समय की नौकरी मिली है।

  • पात्रता परीक्षा: 2008 में उत्तीर्ण।
  • नियुक्ति: 23 जनवरी 2026 को पदभार ग्रहण।
  • रिटायरमेंट: 30 अप्रैल 2026।
  • कुल संघर्ष: लगभग 17 वर्ष।
  • सैलरी विसंगति: वर्तमान में मात्र 5 हजार रुपए मासिक (पुरानी सैलरी)।
महेश की तरह ही भगवानसिंह जाट को भी 25 साल लंबे संघर्ष (2000 से जारी केस) के बाद नटेरन ब्लॉक में नियुक्ति मिली है।

सैलरी और हर्जाने की समस्या

लंबी कानूनी लड़ाई जीतकर शिक्षक (Vidisha) तो बन गए, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। नवनियुक्त शिक्षकों का कहना है कि जहां पुराने शिक्षकों को 50 हजार रुपए रुपए से अधिक सैलरी मिल रही है, वहीं इन्हें मात्र 5 हजार रुपए प्रति माह में गुजारा करना पड़ रहा है। कोर्ट में हुए भारी खर्च और इतने वर्षों के मानसिक तनाव का कोई हर्जाना (Compensation) भी इन्हें नहीं मिला है। कई शिक्षक अब इस आर्थिक विसंगति के खिलाफ दोबारा कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।

विदिशा के नवनियुक्त 26 शिक्षकों की सूची

इस संघर्ष में विदिशा के विभिन्न क्षेत्रों के जांबाज शामिल थे।

  • लटेरी: महेश कुमार, ज्ञानचंद जैन, पवनकुमार श्रीवास्तव, रामबाबू लोधी।
  • सिरोंज: राजारामसिंह, वंशीलाल ओझा, रमेश कुमार, पप्पूसिंह यादव।
  • नटेरन: भगवानसिंह जाट, अमित चौकसे, कमलदास बैरागी।
  • कुरवाई/अन्य: अखिलेश श्रीवास्तव, तिलकसिंह दांगी, शेर सिंह, भंवरलाल शर्मा।
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