500 साल पुराने मंदिर में 22 करोड़ का घोटाला, सोना-चांदी का रिकॉर्ड नहीं

Jageshwar prasad | Jul 12, 2026, 13:25 IST
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500 साल पुराने मंदिर में 22 करोड़ का घोटाला, सोना-चांदी का रिकॉर्ड नहीं
500 साल पुराने मंदिर में 22 करोड़ का घोटाला, सोना-चांदी का रिकॉर्ड नहीं

नागौर के बुटाटी स्थित 500 साल पुराने मंदिर में जांच कमेटी ने 22.74 करोड़ के गबन का अनुमान लगाया। अध्यक्ष सहित 11 पदाधिकारियों पर FIR की सिफारिश।

समझें क्या है पूरा मामला

  • नागौर के 500 साल पुराने बुटाटी धाम मंदिर में 22 करोड़ का गबन।
  • सोना-चांदी का हिसाब गायब, भामाशाहों का काम भी जोड़ा खर्च में।
  • 146 दिन की जांच में खुली मंदिर समिति की बड़ी गड़बड़ी।
  • रसोई खर्च एक साल में 335 प्रतिशत बढ़ा, सवालों में समिति।
  • अध्यक्ष सहित 11 पदाधिकारियों पर FIR की सिफारिश हुई।
राजस्थान के नागौर में भी अयोध्या जैसा दान घोटाला सामने आया है। यह मामला बुटाटी स्थित करीब 500 साल पुराने संत चतुरदासजी महाराज मंदिर से जुड़ा है। जिला कलेक्टर के आदेश पर बनी जांच कमेटी ने बड़ी वित्तीय गड़बड़ी पकड़ी है।

कमेटी ने कुल 22.74 करोड़ रुपए के गबन का अनुमान लगाया है। अध्यक्ष सहित 11 पदाधिकारियों के खिलाफ FIR (First Information Report) की सिफारिश की गई है।

सोना-चांदी का हिसाब ही गायब

जांच में सबसे पहला मामला जेवरात से जुड़ा मिला। पुरानी समिति के पास 36 किलो चांदी और 250 ग्राम सोना दर्ज था। नई समिति ने कार्यभार लेते समय 35.5 किलो चांदी और 280 ग्राम सोना बताया। वर्तमान में इस संपत्ति की कीमत करीब 2.60 करोड़ रुपए है। लेकिन यह पूरी संपत्ति खाते में दर्ज ही नहीं मिली।

ग्राम विकास और सीसीटीवी में भी गड़बड़ी

साल 2024-25 में ग्राम विकास पर 31.37 लाख रुपए खर्च दिखाए गए। लेकिन इसका न कोई ठेकेदार रिकॉर्ड मिला, न भौतिक प्रमाण। कंप्यूटर और फर्नीचर के नाम पर 97.48 लाख रुपए बिना बिल और वर्क ऑर्डर के खर्च दिखाए गए।

सीसीटीवी (Closed Circuit Television) कैमरों पर 82.41 लाख रुपए खर्च किए गए। इसके लिए कोई निविदा प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। एम जंक्शन सर्विसेज के नाम 58.14 लाख रुपए का भुगतान दर्ज मिला, जबकि वाउचर रानाबाई ट्रेडर्स के नाम पर पाए गए।

दान पेटी और खातों में अंतर

दान पेटी की आय ऑडिट रिपोर्ट और रोकड़ बही में अलग-अलग दर्ज मिली। साल 2023-24 और 2024-25 की आय में भी स्पष्ट अंतर पाया गया। ग्राम सेवा सहकारी बैंक खाते में 3.40 लाख और ग्रामीण बैंक खाते में 1.75 लाख रुपए का अंतर मिला।

रसोई में सबसे बड़ी गड़बड़ी

भोजनशाला निर्माण पर 49.49 लाख रुपए खर्च दिखाए गए। जबकि ग्राउंड फ्लोर का पूरा निर्माण एक भामाशाह ने अपने खर्च से करवाया था। आरोप है कि समिति ने फर्जी बिल लगाकर मंदिर निधि से यह राशि निकाल ली। रसोई खर्च एक साल में 335 प्रतिशत तक बढ़ गया।



गोशाला और सुरक्षा व्यवस्था में भी सवाल

सुलभ कॉम्प्लेक्स से मिले 18.12 लाख रुपए के किराए का हिसाब मुख्य लेखा पुस्तकों में दर्ज नहीं मिला। गोशाला रखरखाव के नाम पर 17.87 लाख रुपए खर्च दिखाए गए। समिति ने ऐसी कोई राशि मिलने से इनकार किया है। सुरक्षा व्यवस्था पर 31.33 लाख रुपए खर्च दर्शाए गए।

जांच का पूरा गणित

समिति ने 146 दिन की पड़ताल के बाद 23 जून 2026 को रिपोर्ट सौंपी। 2023-24 और 2024-25 में 15.16 करोड़ रुपए का प्रमाणित गबन सामने आया। साल 2025-26 का रिकॉर्ड जांच दल को नहीं दिया गया। इसी आधार पर 7.58 करोड़ रुपए का अतिरिक्त अनुमान जोड़ते हुए कुल 22.74 करोड़ रुपए का आकलन किया गया।

13 सदस्यीय जांच समिति का गठन

तत्कालीन कलेक्टर अरुण कुमार पुरोहित ने 29 जनवरी 2026 को छह सदस्यीय जांच समिति बनाई थी। बाद में सात और सदस्य जोड़े गए, जिससे समिति 13 सदस्यीय हो गई। डेगाना के तत्कालीन एसडीएम (Sub Divisional Magistrate) मोहन चौधरी ने यह रिपोर्ट कलेक्टर देवेंद्र कुमार को सौंपी।

अध्यक्ष सहित 11 पर FIR की सिफारिश

एसडीएम ने रिपोर्ट में अध्यक्ष देवेंद्र सिंह सहित 11 तत्कालीन और वर्तमान पदाधिकारियों के खिलाफ सिफारिश की है। इसमें आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, खातों के मिथ्याकरण और साक्ष्य नष्ट करने जैसी धाराएं शामिल हैं। रिपोर्ट में आरोपियों की निजी संपत्ति कुर्क करने की भी मांग की गई है।

मंदिर समिति ने क्या कहा?

मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि समिति ने हमेशा दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराए हैं। आगे भी दस्तावेज मांगे जाने पर देने को तैयार होने की बात कही गई है।

मंदिर से जुड़ी गहरी आस्था

यह मंदिर करीब 500 साल पहले संत चतुरदासजी महाराज ने स्थापित किया था। मान्यता है कि उन्हें लकवा रोगियों को ठीक करने की सिद्धि प्राप्त थी। इसी आस्था के चलते श्रद्धालु सात दिनों तक समाधि की परिक्रमा और आरती में शामिल होते हैं।

परिक्रमा के बाद भभूत दी जाती है, जिसे शरीर पर लगाने से लाभ की भी मान्यता है। मंदिर समिति मरीजों और परिजनों को निशुल्क ठहरने की सुविधा भी देती है।

FAQ

  1. राजस्थान का बुटाटी धाम कितना पुराना है और किसके लिए प्रसिद्ध है?
    यह मंदिर करीब 500 साल पुराना है और संत चतुरदासजी महाराज ने इसकी स्थापना की थी। मान्यता है कि यहां लकवा रोगियों को लाभ मिलता है। इसी वजह से श्रद्धालु सात दिनों तक यहां ठहरते हैं।

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