कैश पॉलिटिक्स की एंट्री, स्कूटी या यूनिफॉर्म की बजाय सीधे बैंक खाते में डाली जाएगी राशि
Mukesh Sharma | May 11, 2026, 17:17 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में कैश पॉलिटिक्स का अध्याय शुरू हो रहा है। इसकी शुरुआत स्कूटी और यूनिफॉर्म वितरण योजनाओं से होगी। लाभार्थियों को सामान देने की बजाय उनके बैंक खातों में सीधे राशि डाली जाएगी।
News In Short
- राजस्थान में कैश पॉलिटिक्स का अध्याय शुरू हो रहा है।
- इसकी शुरुआत स्कूटी और यूनिफॉर्म वितरण योजनाओं से होगी।
- लाभार्थियों को सामान देने की बजाय बैंक खातों में सीधे राशि डाली जाएगी।
- सरकार का तर्क कि टेंडर, खरीद, भंडारण और वितरण में अधिक समय लगता है।
- अधिकारियों का कहना है कि कैश हस्तांतरण से योजना में पारदर्शिता आएगी
News In Detail
इन योजनाओं के लाभार्थियों को सामान देने के बजाय सीधे उनके बैंक खातों में नकदी डालने की तैयारी हो रही है। शिक्षा विभाग से शुरू होने वाले इस प्रयोग ने प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।
स्कूटी का सपना अब कैश में
सूत्रों की मानें तो अब मेधावी छात्राओं के घर के बाहर स्कूटी नहीं खड़ी होगी, बल्कि इसके बदले उनके बैंक खातों में 70,000 रुपए की एंट्री होगी। सरकार का तर्क है कि वह टेंडर, खरीद, भंडारण और वितरण की झंझट से मुक्ति चाहती है।
इतनी छात्राओं को मिलेगा फायदा
बड़ा सवाल यह है कि क्या वह राशि वास्तव में छात्रा की शिक्षा और आवागमन के लिए इस्तेमाल होगी? क्या ग्रामीण इलाकों में एक छात्रा उस पैसे से स्कूटी ही खरीदेगी या वह पैसा परिवार की अन्य जरूरतों या कर्ज चुकाने की भेंट चढ़ जाएगा? इस बारे में विभाग ने फिलहाल कुछ स्पष्ट नहीं किया है।
तीन साल में वितरण की गति धीमी
उच्च शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि टेंडर प्रक्रिया में होने वाली देरी और भ्रष्टाचार की शिकायतों से बचने के लिए लाभार्थी को सीधे कैश का रास्ता चुना है। उनका कहना है कि इससे पारदर्शिता आएगी, लेकिन आलोचकों का मानना है कि यह जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने जैसा है। 350 करोड़ रुपए का वित्तीय भार तो सरकार उठाएगी, लेकिन क्या उन 26,000 छात्राओं को वह गौरव महसूस होगा जो एक पुरस्कार के रूप में स्कूटी मिलने पर होता था?
यूनिफॉर्म का 'जनाधार' और DBT का पेंच
यहां सबसे बड़ी बाधा जनाधार ऑथेंटिकेशन है। सरकार ने शाला दर्पण पोर्टल पर मॉड्यूल तो लाइव कर दिया है, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी दूर-दराज के क्षेत्रों में हजारों विद्यार्थियों के जनाधार कार्ड या तो बने नहीं हैं, या उनमें तकनीकी त्रुटियां हैं। पांच दिन के भीतर डेटा फैच करने का फरमान तो जारी हो गया, लेकिन क्या धरातल पर सिस्टम इतना दुरुस्त है?
कैश का जोखिम
यदि पैसा सीधा खाते में जाता है और उसका उपयोग किसी अन्य कार्य में होता है, तो योजना का उद्देश्य (छात्राओं को शिक्षा के लिए आवागमन में मदद करना) पूरी तरह विफल हो जाएगा।
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