धौलपुर में नन्हे घड़ियालों और बाटागुर कछुओं का जन्म, गुलजार हुई चंबल

Jageshwar prasad | Jun 08, 2026, 13:59 IST
Share
चंबल में संरक्षण की सफलता
चंबल में संरक्षण की सफलता

चंबल नदी में करीब 1500 घड़ियाल और ढाई से तीन हजार दुर्लभ बाटागुर कछुओं के बच्चों ने अंडों से बाहर आकर प्राकृतिक जन्म लिया है। राजस्थान वन विभाग ने नेस्टिंग साइटों पर सुरक्षा बढ़ा दी है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • चंबल में जन्मे 1500 नन्हे घड़ियाल और दुर्लभ बाटागुर कछुए।
  • बाटागुर कछुए भी हजारों की संख्या में अंडों से बाहर आए।
  • 3 साल तक इंसानी बच्चों जैसी होती है घड़ियाल की देखरेख।
  • 98 फीसदी घड़ियाल बच्चे बाढ़ में बह जाते हैं, फिर भी जारी है जंग।
  • चंबल में 2938 घड़ियाल, 155 डॉल्फिन और दुर्लभ कछुओं का संसार।
राजस्थान के धौलपुर और मध्य प्रदेश के मुरैना के बीच बहने वाली चंबल नदी में इस मौसम में जीवन का नया अध्याय शुरू हुआ है। करीब 1500 नन्हे घड़ियाल और ढाई से तीन हजार दुर्लभ बाटागुर कछुओं के बच्चों ने अंडों से निकलकर प्राकृतिक जन्म लिया है।

वन विभाग ने नेस्टिंग साइटों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है। धौलपुर की नेस्टिंग साइटों पर प्राकृतिक जन्म के साथ-साथ मध्य प्रदेश के देवरी केंद्र में कृत्रिम हैचिंग भी चल रही है। संरक्षण केंद्र में नन्हे घड़ियालों को तीन साल तक इंसानी बच्चों की तरह पाला जाता है।

चंबल के किनारों पर जीवन का उत्सव

धौलपुर के अंडवापुरैनी, शंकरपुरा, कठुमरा और बसई डांग इलाकों में घड़ियाल और कछुए हर साल हजारों की संख्या में अंडे देते हैं। इस बार भी नेस्टिंग साइटों पर यही नजारा है।

नेशनल चंबल घड़ियाल सेंचुरी (National Chambal Gharial Sanctuary) के डीएफओ (DFO) डॉ. आशीष व्यास और क्षेत्रीय वन अधिकारी दीपक कुमार मीणा की देखरेख में नेस्टिंग साइटों पर फेंसिंग कराई गई है। नदी में नर और मादा घड़ियाल अपने बच्चों की रखवाली कर रहे हैं जबकि जमीन पर वन विभाग के गार्ड तैनात हैं।

कछुओं के अंडों को सियार जैसे जानवरों से बचाने के लिए वन कर्मियों ने अंडों को सुरक्षित गड्ढों में दबाया था। अब वहां से कछुए निकलकर सीधे नदी में जा रहे हैं।

तस्करों के निशाने पर है बाटागुर कछुआ

डीएफओ डॉ. आशीष व्यास ने बताया कि चंबल नदी में दो दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं - बाटागुर कछुआ और बाटागुर धोंनकोगा। दोनों बेहद संकटग्रस्त हैं।

बाटागुर कछुआ एक बार में 18 से 22 अंडे और बाटागुर धोंनकोगा 25 से 28 अंडे देता है। ये मीठे पानी के कछुए तंत्र-मंत्र विद्या और शौकिया पालतू बनाने के लिए तस्करी का शिकार होते रहे हैं। वर्तमान में चंबल नदी इन कछुओं का सबसे बड़ा और सुरक्षित गढ़ है।

देवरी केंद्र में 30 डिग्री तापमान में कृत्रिम हैचिंग

धौलपुर की नेस्टिंग साइटों पर प्राकृतिक जन्म के साथ-साथ मध्य प्रदेश के देवरी घड़ियाल पालन केंद्र में कृत्रिम हैचिंग (Artificial Hatching) भी चल रही है।

केंद्र की प्रभारी ज्योति डंडोतिया के अनुसार हर साल चंबल से 200 अंडे लाकर विशेष चैंबर में 30 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान बनाए रखकर रखे जाते हैं। इस बार 200 में से 100 बच्चे सुरक्षित बाहर आ चुके हैं।

15 दिन क्वारंटीन, 3 साल देखरेख

अंडे से निकलते ही बच्चों को केमिकल से नहलाया जाता है और 15 दिन के क्वारंटीन (Quarantine) पूल में रखा जाता है। शुरुआती 15 दिन का पोषण बच्चे के पेट में ही रहता है इसलिए बाहर से खाना नहीं देना होता।

इसके बाद इन बच्चों की देखरेख ठीक वैसे ही होती है जैसे इंसानी शिशुओं की। जब इनकी लंबाई 1.2 मीटर हो जाती है तब सर्दी के मौसम में इन्हें चंबल नदी में छोड़ दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में करीब तीन साल लगते हैं।

बाढ़ है सबसे बड़ा दुश्मन

घड़ियाल फरवरी में मेटिंग करते हैं, अप्रैल में अंडे देते हैं और मई-जून में बच्चे बाहर आते हैं। मादा घड़ियाल रेत में 30 से 40 सेंटीमीटर का गड्ढा खोदकर 18 से 50 तक अंडे देती है। करीब एक महीने बाद बच्चे अंडों के अंदर से आवाज लगाते हैं जिसे मदर कॉल कहा जाता है। इसके बाद मां रेत हटाकर उन्हें बाहर निकालती है।

लेकिन प्राकृतिक रूप से पैदा होने वाले 98 फीसदी बच्चे मानसून की बाढ़ में बहकर मारे जाते हैं। सिर्फ एक से दो फीसदी ही जीवित बच पाते हैं। बाज, कौवे और मगरमच्छ भी इन्हें निशाना बनाते हैं।

इसी खतरे से निपटने के लिए सवाई माधोपुर के पालीघाट पर एक विशेष केंद्र बनाया गया है जो बाढ़ आने तक इन बच्चों को संरक्षित रखता है और बाढ़ उतरने के बाद नदी में छोड़ता है।

चंबल में नन्हे घड़ियालों और बाटागुर कछुओं का जन्म
चंबल में नन्हे घड़ियालों और बाटागुर कछुओं का जन्म


चंबल में जलीय जीवों का समृद्ध संसार

साल 1978 में भारत सरकार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के प्रयासों का नतीजा आज दिख रहा है। वर्तमान में चंबल नदी में 2,938 घड़ियाल, 1,512 मगरमच्छ, 155 डॉल्फिन और बाटागुर कछुओं की तमाम प्रजातियां हैं। यह आंकड़ा दशकों की मेहनत और संरक्षण की सफलता की कहानी कहता है।

FAQ

  1. घड़ियाल और मगरमच्छ में क्या फर्क होता है?
    घड़ियाल एक अलग प्रजाति है जिसकी थूथन लंबी और पतली होती है। यह मुख्य रूप से मछली खाता है और इंसानों के लिए खतरनाक नहीं होता। मगरमच्छ की थूथन चौड़ी होती है और वह अधिक आक्रामक होता है। घड़ियाल विलुप्तप्राय प्रजाति है।
  2. बाटागुर कछुआ इतना दुर्लभ क्यों है?
    बाटागुर कछुए की तस्करी तंत्र-मंत्र और पालतू जानवर के रूप में रखने के लिए बड़े पैमाने पर होती रही है। इससे इनकी संख्या बहुत कम हो गई। चंबल नदी अब इनका सबसे सुरक्षित प्राकृतिक आवास बचा है।

ये भी पढ़ें:-

बस की तलाशी में निकला करोड़ों का सोना-चांदी, तीन गिरफ्तार

हरियाणा से राजस्थान में नकली नोटों की सप्लाई, पकड़ा गया मुख्य आरोपी

सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रशासन अलर्ट, धार्मिक स्थलों पर होगी कार्रवाई, नेट बंद

मेडिकल प्रैक्टिस के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा, तीन डॉक्टर गिरफ्तार



Tags:
  • नेशनल चंबल घड़ियाल सेंचुरी
  • चंबल नदी
  • धौलपुर
  • राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य
  • बाटागुर कछुआ
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग