अफसरों पर क्यों भड़कते हैं बेनीवाल, आदत है या सियासत में धाकड़ दिखने की मजबूरी!

Mukesh Sharma | Jun 01, 2026, 19:49 IST
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Photograph: (the sootr)

राजस्थान में सांसद हनुमान बेनीवाल सीएम के साथ ही सीएस वी श्रीनिवास और एसीएस शिखर अग्रवाल को लेकर विवादित बयानों से चर्चा में है। आखिर बेनीवाल बार-बार अफसर और नेताओं को क्यों निशाने पर लेते हैं? यह उनकी आदत है या मजबूरी, आइए समझते हैं उनका मिजाज

Jaipur: राजस्थान में नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने हाल ही में मुख्य सचिव वी श्रीनिवास और अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल को निशाने पर लिया है। उनका बड़े नेताओं पर विवादित टिप्पणी करना आम बात है, लेकिन इस बार उन्होंने टॉप ब्यूरोक्रेट्स पर हमला बोला है।

बेनीवाल ने मुख्य सचिव के लिए यहां तक कह दिया कि कैसे सीएस लाकर सीट पर बैठा दिया है। इससे बेहतर होता कि पत्थर को सीट पर रख देते। इससे पहले बेनीवाल एसीएस शिखर अग्रवाल को लेकर कई बार सवाल उठा चुके हैं।

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) प्रमुख बेनीवाल ने हाल ही में कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव आईएएस शिखर अग्रवाल को पूरी दुनिया जानती है। दुख की बात है कि ऐसे लोग सीएम भजनलाल को चला रहे हैं। शिखर अग्रवाल, उनकी टीम तथा मंत्री भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबे हैं।

अपशब्दों से बचते रहे नेता

राजस्थान की राजनीति में हालांकि कुछ नेता ऐसे हुए हैं, जो अपने अड़ियल रवैए और क्रोधी स्वभाव के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। लेकिन, इनमें से अधिकांश नेता शायद ही विपक्ष नेताओं और अफसरों के लिए कभी अपशब्दों का इस्तेमाल करते हों। हालांकि राजस्थान में अफसरों के साथ मारपीट की घटनाएं भी हुई हैं।

हाल ही में राजस्थान के सहकारिता मंत्री गौतम दक की पुलिसवालों को भद्दी गालियां देने का मामला चर्चा में है। बावजूद ऐसी घटनाओं के राजस्थान में नेताओं ने अफसरों व प्रतिपक्ष के नेताओं के लिए संयमित और मर्यादित भाषा का ही इस्तेमाल किया है।



ChatGPT Image Jun 1, 2026, 07_29_08 PM
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छात्र राजनीति से निकले

हनुमान बेनीवाल नागौर के रहने वाले हैं। उनके पिता दिवंगत रामदेव बेनीवाल भी मूंडवा से राजस्थान विधानसभा के दो बार विधायक रहे हैं। हनुमान ने छात्र राजनीति से राजनीतिक जीवन में कदम रखा था।

वह 1997 में राजस्थान यूनिवर्सिटी छात्र संघ के अध्यक्ष बने थे। इससे पहले वह राजस्थान कॉलेज और लॉ कॉलेज के अध्यक्ष भी रहे थे। वर्ष 2008 में वह पहली बार भाजपा के टिकट पर खींवसर विधानसभा से विधायक निर्वाचित हुए थे।

छात्र राजनीति से ही जोशीले

छात्र राजनीति के दौरान हनुमान बेनीवाल के साथ काम करने वाले उनके करीबी बताते हैं, बेनीवाल छात्र जीवन में बेहद जोशीले और हंसमुख स्वभाव के हुआ करते थे। लेकिन 2008 में पहली बार भाजपा विधायक बनने के बाद उनके साथ पार्टी में कुछ नेताओं ने अभद्रता की थी।

इसके बाद से बेनीवाल के स्वभाव में बहुत परिवर्तन आया। उन्होंने वसुधंरा राजे के खिलाफ बगावत कर दी थी। वर्ष 2018 में अपनी स्वयं की रालोपा पार्टी बनाने के बाद से उनका सार्वजनिक व्यवहार काफी बदल गया है। उनकी छवि आक्रामक नेता के रूप में बनती चली गई।



Ashish Bhardwaj - 2026-06-01T194504.905
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मजबूरी है अन्यथा...

हनुमान बेनीवाल को पता है कि नागौर जाट राजनीति का गढ़ है। नागौर की जनता ने दिवंगत नाथूराम मिर्धा जैसे खांटी देशज व्यक्ति को अपना नेता माना है। उनके अलावा नागौर में ऐसे कई नेता हुए हैं, जिन्हें जनता ने उनकी धाकड़ छवि के कारण ही नेता के रुप में स्वीकार किया है।

राजस्थान में कांग्रेस और भाजपा ही प्रमुख दल हैं। बेनीवाल ने इन दोनों से अलग हटकर अपनी पार्टी बनाई। नागौर और अन्य स्थान पर जाट समाज की युवा पीढ़ी उनकी समर्थक ही इसलिए है कि वह खुलेआम दूसरी पार्टी के नेताओं के साथ ही अफसरों को खुली चुनौती देते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में बेनीवाल को पता है कि कांग्रेस-भाजपा से अलग रास्ता अख्तियार किए बिना उनका कोई महत्व नहीं है। इसलिए उन्हें मजबरी में उस तरीके से राजनीति करनी पड़ती है, जिसे उनकी समर्थक युवा पीढ़ी पसंद करती है, फिर भले ही आम जनता उनकी शैली और भाषा की समर्थक हो या नहीं।

संसद में उनके संयमित व्यवहार से भी यह स्पष्ट है कि सार्वजनिक रुप से दूसरे नेताओं और अफसरों को गरियाना कुछ तो उनकी राजनीतिक मजबूरी है और कुछ आदत।

सीएम और अफसरों पर विवादित बोल

सांसद हनुमान बेनीवाल हाल ही में राज्य के मुख्समंत्री व मंत्रियों के साथ ही मुख्य सचिव वी श्रीनिवास और रीको के सीएमडी शिखर अग्रवाल के लिए विवादित बातें बोलने के कारण चर्चा में हैं। भाजपा नेताओं ने उनकी भाषा को लेकर उनके खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है।

पिछले दिनों फेसबुक पर लिखे गए एक लेख पर एक वरिष्ठ पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने वाले मुख्य सचिव इस बार हनुमान बेनीवाल के बोल पर चुप्पी साधे हैं।

दूसरी ओर बेनीवाल की सीएम पर की गई टिप्पणी से खफा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ चित्तौड़गढ़ जिले में पुलिसवालों को सरेआम गालियां देने वाले सहकारिता मंत्री गौतम दक को क्लीन चिट दे रहे हैं।

बगावत का झंडा किया था बुलंद

भाजपा विधायक होने के बावजूद हनुमान बेनीवाल ने तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुधंरा राजे सहित कुछ दूसरे भाजपा नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर बागी तेवर अपना लिए थे। इस पर उन्हें भाजपा से निष्कासित कर दिया था।

बेनीवाल पूर्व सीएम वसुधंरा राजे पर अशोक गहलोत के मिलीभगत के आरोप लगाते रहे हैं। 2013 में वह खींवसर विधानसभा से निर्दलीय जीत कर विधायक बने थे।

अक्टूबर 2018 में उन्होंने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की नींव रखी और खींवसर से तीसरी बार विधायक बने। 2019 में भाजपा के साथ गठबंधन करके वह नागौर से पहली बार सांसद बने। इसके बाद हुए उप-चुनाव में उनके भाई नारायण बेनीवाल खींवसर से विधायक बने।

2023 में हनुमान बेनीवाल चौथी बार खींवसर से अपनी पार्टी रालोपा के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए। 2024 में बेनीवाल ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया और दूसरी बार नागौर के सांसद बने। इसके बाद 2024 में हुए खींवसर उप-चुनाव में भाजपा उम्मीदवार रेवंतराम डागा ने हनुमान बेनीवाल की पत्नी कनिका बेनीवाल को हरा दिया और चुनाव जीता।



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IAS व IPS के पड़ चुके हैं थप्पड़

ऐसा नहीं है कि राजस्थान में ऐसा पहली बार हुआ है। इससे पहले मंत्री रहते हुए भाजपा नेता देवीसिंह भाटी ने IAS अधिकारी पीके देव के चांटा मार दिया था।

इसके बाद केकड़ी से तत्कालीन विधायक बाबूलाल सिंगारिया ने एक बैठक में अजमेर के तत्कालीन एसपी IPS आलोक त्रिपाठी के चांटा मारा था।

वर्तमान सरकार में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा का तो पूरा राजनीतिक जीवन ही ऐसी घटनाओं से भरा रहा है। 1996 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने भी एक IPS अधिकारी के चांटा मार दिया था।

कांग्रेस विधायक अशोक चांदना का अधिकारियों को धमकी देता हुआ वीडियो हाल ही में सामने आया है। नरेश मीणा का देवली-उनियारा उप-चुनाव में एसडीएम के चांटा मारने और उसके बाद हुए हंगामे की घटना भी कोई पुरानी नहीं है।

सहकारिता मंत्री गौतम दक ने सरेआम पुलिस वालों को भद्धी-भद्धी गालियां दी हैं। इस पर उनके खिलाफ थानाधिकारी ने एफआईआर भी दर्ज कर ली है।

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