चपरासी भर्ती में जीरो नंबर वालों को हाई कोर्ट से राहत, 6 हफ्ते में मांगा जवाब
Ashish Bhardwaj | Jul 25, 2026, 15:39 IST
राजस्थान हाई कोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने चतुर्थ श्रेणी भर्ती में जीरो नंबर लाने वाले अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट रद्द करने के सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगा दी है। सभी पक्षों से 6 हफ्ते में जवाब मांगा गया है।
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान हाई कोर्ट ने चतुर्थ श्रेणी भर्ती-2024 में जीरो मेरिट लिस्ट रद्द करने के आदेश पर अंतरिम रोक।
- आरएसएसबी और राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर 6 हफ्ते में जवाब मांगा।
- अपील में कहा गया कि भर्ती नियमों और विज्ञापन में न्यूनतम अंक तय नहीं थे, फिर भी नई शर्त लागू कर दी गई।
- सिंगल बेंच ने पहले जीरो कटऑफ वाली मेरिट लिस्ट रद्द कर न्यूनतम अंक तय करना जरूरी बताया था।
- मामला अभी हाईकोर्ट में विचाराधीन है और भर्ती पर अंतिम फैसला आना बाकी है।
खंडपीठ ने अब एकलपीठ के 22 मई के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर 6 हफ्ते में जवाब मांगा है। यह मामला अभी अदालत में विचाराधीन है, अंतिम फैसला नहीं आया है।
हाईकोर्ट ने क्यों लगाई रोक
अपील में कहा गया कि भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद एकलपीठ ने अपने 22 मई के आदेश से एक नई शर्त लागू कर दी। जबकि न तो नियमों में और न ही विज्ञापन की शर्तों में न्यूनतम अंक तय किए गए थे।
अपील के अनुसार सिंगल बेंच के आदेश से कई चयनित अभ्यर्थी प्रभावित हुए, जो इस मामले में पक्षकार भी नहीं थे। इसी आधार पर खंडपीठ ने आदेश पर रोक लगाई और सभी पक्षों से जवाब मांगा।
सिंगल बेंच ने क्या कहा था
कोर्ट के अनुसार बिना न्यूनतम अंक तय किए भर्ती करना गैर-संवैधानिक माना जाएगा। कोर्ट ने कर्मचारी चयन बोर्ड को न्यूनतम अंक तय करने की छूट भी दी थी।
एकलपीठ ने यह भी कहा था कि भले ही पद ग्रेड फोर्थ का हो, लेकिन सरकारी सेवा में एक बेसिक स्टैंडर्ड होना जरूरी है।
जीरो और माइनस नंबर में क्या फर्क
याचिकाकर्ता के अनुसार उसकी कैटेगरी में बोर्ड को उपयुक्त अभ्यर्थी नहीं मिल रहे, जबकि भर्ती में सैकड़ों पद अब भी खाली हैं। उसकी दलील थी कि माइनस में नंबर लाने वालों को भी नियुक्ति दी जानी चाहिए, क्योंकि भर्ती विज्ञप्ति और सेवा नियमों में न्यूनतम अंक तय ही नहीं किए गए थे।
याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि कई कैटेगरी में कट ऑफ 0.0033 यानी लगभग जीरो तक गई थी, फिर भी उन कैटेगरी में अभ्यर्थियों का चयन हुआ। उनका तर्क था कि जीरो नंबर लाने वाले अभ्यर्थी न मिलने पर माइनस नंबर वालों को भी नियुक्ति मिलनी चाहिए, क्योंकि दोनों की योग्यता में कोई फर्क नहीं है।
ये खबर भी पढे़:-
अब नहीं होगी डॉक्टर की लिखावट समझने में परेशानी, लागू होगी नई व्यवस्था
जग्गी वासुदेव के भक्त IAS अंबरीश एपीओ, बिना मंजूरी गए थे विदेश
असफलताओं से मिला कामयाबी का सूत्र, फिर आईएएस जसमीत सिंह संधू बन गए टॉपर
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman
अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब
By VINAY VERMA
RCA चुनाव में बड़ा उलटफेर, राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह ने छोड़ा मैदान
By Ashish Bhardwaj
वेदांता ग्रुप को जल्द नया और युवा नेतृत्व मिलेगा: प्रिया अग्रवाल हेब्बर हो सकती हैं उत्तराधिकारी, कौन सी जिम्मेदारी मिलेगी?
By Arohi Raj
हाईकोर्ट की फटकार से जागा स्वास्थ्य विभाग: सचिव अमित कटारिया पर लगा जुर्माना, लापरवाही में कांकेर CMHO सस्पेंड
By Umeshwari Baghel