भाषा की दिक्कत नार्को टेस्ट में बाधा नहीं, निचली कोर्ट का आदेश रद्द
Jageshwar prasad | May 31, 2026, 08:07 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि किसी व्यक्ति को केवल इसलिए नार्को टेस्ट से मना नहीं किया जा सकता कि वह हिंदी भाषा धाराप्रवाह नहीं बोलता। अदालत ने कहा कि जरूरत पड़ने पर दुभाषिये की सेवाएं ली जा सकती हैं।
News In Short
- हाईकोर्ट ने कहा - भाषा न आने के आधार पर नार्को टेस्ट से मना करना उचित नहीं।
- जरूरत पड़ने पर नार्को टेस्ट के दौरान दुभाषिये की सेवाएं ली जा सकती हैं।
- कोर्ट ने आईओ द्वारा केवल भाषा का हवाला देकर नार्को टेस्ट न करवाने को गलत ठहराया।
- हाईकोर्ट ने निचली कोर्ट के उस आदेश को रद्द किया जिसमें पुलिस की एफआर को मंजूरी दी गई थी।
- अदालत ने मामले की जांच डिप्टी स्तर के अधिकारी से कराने के निर्देश दिए हैं।
News In Detail
जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने यह आदेश फेलीराम की आपराधिक याचिका पर दिया। कोर्ट ने इस मामले में पुलिस की एफआर (फाइनल रिपोर्ट) को मंजूर करने वाले निचली कोर्ट के आदेश को भी रद्द कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
इसी आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया कि जांच अधिकारी ने प्रार्थी का नार्को टेस्ट करने के लिए प्रार्थना पत्र तो दिया था, लेकिन बाद में उस पर आगे कोई कार्रवाई नहीं की गई।
हाई कोर्ट ने क्यों रद्द किया निचली कोर्ट का आदेश?
कोर्ट ने अचरज जताते हुए कहा कि प्राधिकारी ने इस आधार पर नार्को टेस्ट से मना कर दिया कि संबंधित व्यक्ति को हिंदी भाषा धाराप्रवाह नहीं आती है।
नार्को टेस्ट के लिए दुभाषिया की सुविधा
कोर्ट ने साफ किया कि केवल भाषा की जानकारी न होने पर नार्को टेस्ट से मना नहीं किया जा सकता। अगर किसी व्यक्ति को हिंदी नहीं आती तो उसकी मातृभाषा या कोई अन्य भाषा के माध्यम से भी यह टेस्ट करवाया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर दुभाषिए की मदद ली जा सकती है।
विशेषज्ञ की राय
हालांकि नार्को टेस्ट के लिए व्यक्ति की सहमति जरूरी होती है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि जबरन नार्को टेस्ट करवाना व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
इस केस में क्या गलत हुआ?
अब क्या होगा?
FAQ
- राजस्थान हाई कोर्ट ने किस आधार पर नार्को टेस्ट को रोकने वाले प्रशासनिक निर्णय को पूरी तरह गलत ठहराया है?
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि एक्सपर्ट को गवाह की भाषा न आने या गवाह को हिंदी धाराप्रवाह न आने के आधार पर नार्को टेस्ट से विधिक रूप से मना नहीं किया जा सकता। - सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार नार्को टेस्ट के दौरान भाषाई बाधा को दूर करने के लिए किसे शामिल किया जा सकता है?
न्यायालय के अनुसार, नार्को टेस्ट के मेडिकल पैनल में आवश्यकता पड़ने पर एक दुभाषिया (Interpreter) शामिल किया जा सकता है।
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FAQ
- राजस्थान हाई कोर्ट ने किस आधार पर नार्को टेस्ट को रोकने वाले प्रशासनिक निर्णय को पूरी तरह गलत ठहराया है?
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि एक्सपर्ट को गवाह की भाषा न आने या गवाह को हिंदी धाराप्रवाह न आने के आधार पर नार्को टेस्ट से विधिक रूप से मना नहीं किया जा सकता। - सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार नार्को टेस्ट के दौरान भाषाई बाधा को दूर करने के लिए किसे शामिल किया जा सकता है?
न्यायालय के अनुसार, नार्को टेस्ट के मेडिकल पैनल में आवश्यकता पड़ने पर एक दुभाषिया (Interpreter) शामिल किया जा सकता है। - नार्को टेस्ट क्या है?
नार्को टेस्ट (Narco Test) एक फोरेंसिक और जांच प्रक्रिया है जिसका उपयोग पुलिस और जांच एजेंसियां किसी अपराधी या संदिग्ध से सच्चाई उगलवाने के लिए करती हैं। इस टेस्ट में संदिग्ध व्यक्ति को सोडियम पेंटोथल (Sodium Pentothal), सोडियम एमाइटल' (Sodium Amytal) या स्कोपोलामाइन (Scopolamine) जैसी दवाएं दी जाती हैं।
FAQ
- राजस्थान हाई कोर्ट ने किस आधार पर नार्को टेस्ट को रोकने वाले प्रशासनिक निर्णय को पूरी तरह गलत ठहराया है?
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि एक्सपर्ट को गवाह की भाषा न आने या गवाह को हिंदी धाराप्रवाह न आने के आधार पर नार्को टेस्ट से विधिक रूप से मना नहीं किया जा सकता। - सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार नार्को टेस्ट के दौरान भाषाई बाधा को दूर करने के लिए किसे शामिल किया जा सकता है?
न्यायालय के अनुसार, नार्को टेस्ट के मेडिकल पैनल में आवश्यकता पड़ने पर एक दुभाषिया (Interpreter) शामिल किया जा सकता है। - नार्को टेस्ट क्या है?
नार्को टेस्ट (Narco Test) एक फोरेंसिक और जांच प्रक्रिया है जिसका उपयोग पुलिस और जांच एजेंसियां किसी अपराधी या संदिग्ध से सच्चाई उगलवाने के लिए करती हैं। इस टेस्ट में संदिग्ध व्यक्ति को सोडियम पेंटोथल (Sodium Pentothal), सोडियम एमाइटल (Sodium Amytal) या स्कोपोलामाइन (Scopolamine) जैसी दवाएं दी जाती हैं।
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