आठ मंजिल बनने के बाद जगी रेरा, छुट्टी के दिन बिल्डर पर बरसी मेहरबानी
Mukesh Sharma | Jul 01, 2026, 14:10 IST
8 मंजिला अवैध निर्माण, बनने के बाद RERA ने दी मंजूरी, अवकाश के दिन बिल्डर पर मेहरबानी
जयपुर में एक विवादित प्लॉट पर आठ मंजिला निर्माण होने के बाद प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी गई। रोचक यह कि रेरा ने अवकाश के दिन बिल्डर को फायदा पहुंचाने का आदेश जारी किया।
राजस्थान रियल एस्टेट रेग्यूलेटरी अथॉरिटी (रेरा) और बिल्डर की मिलीभगत का बड़ा मामला सामने आया है। जयपुर में भवानी सिंह मार्ग पर नियमों को ताक पर रखकर 8 मंजिला अवैध निर्माण होने के बाद विवादित प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी गई।
रेरा अधिकारियों की मेहरबानी का आलम यह रहा कि न सिर्फ सरकारी अवकाश के दिन 17 जून को इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी, बल्कि बिल्डर को जारी कारण बताओ नोटिस और बिक्री पर लगी रोक को भी आनन-फानन में रद्द कर दिया।
दरअसल, जेडीए की नाक के नीचे भवानी सिंह मार्ग पर प्लॉट नंबर एसबी-27 व एसबी-28 पर बहुमंजिला आवासीय फ्लैट्स बन रहे हैं। दोनों प्लॉट अलग-अलग हैं। दोनों के मालिक भी अलग-अलग हैं। एसबी-27 के वारिसों में आपसी विवाद चल रहा है। इस प्रोजेक्ट को रिद्वी-सिद्वी प्राईम एस्टेट बना रहा है।
दो अलग-अलग प्लॉट पर बन रहे इस बहुमंजिला प्रोजेक्ट की पार्किंग व अन्य सुविधाएं कॉमन हैं। गंगा कोटेचा ओम रत्नम नाम से यह प्रोजेक्ट बन रहा था।
बिल्डर शुरु से ही अलग-अलग दो प्लॉट पर बन रहे प्रोजेक्ट को एक ही बताकर प्रचारित कर रहा था। ग्राहकों को इसी के अनुरुप बेचने का ऑफर दे रहा था। प्रोजेक्ट के ब्राउशर में भी बिल्डर ने पूरे प्रोजेक्ट को एक बताते हुए रेरा से मंजूरी वाला बता रहा था।
एडवोकेट महेंद्र गौड़ ने 11 मई, 2026 को रेरा, जेडीसी सिद्वार्थ महाजन और जयपुर नगर निगम के सीईओ ओमप्रकाश कसेरा को लिखित में शिकायत दी थी।
शिकायत में बताया कि बिल्डर रिद्वी-सिद्वी प्राइम एस्टेट व प्रमोटर प्लॉट संख्या एसबी-27 पर फर्जी रेरा मंजूरी बता रहे हैं। हकीकत में मंजूरी प्लॉट नंबर एसबी-28 के लिए मिली है।
बिल्डर दोनों प्लॉट पर गंगा कोटेचा ओम रत्नम नाम से बहुमंजिला आवासीय प्रोजेक्ट बना रहा है। साथ ही वह ग्राहकों को फ्लैट खरीदने के लिए आमंत्रित कर रहा है।
रेरा की वेबसाइट पर एसबी-27 पर बनने वाले किसी प्रोजेक्ट के कोई दस्तावेज अपलोड नहीं है। इस प्लॉट के स्वामित्व के संबंध में विवाद चल रहा है।
नगर निगम व जेडीए की मिलीभगत से बिना सभी वारिसों को नोटिस दिए ही एसबी-27 का स्वामित्व बदलने व नक्शे पास करने का भी आरोप लगाया।
शिकायत के आधार पर रेरा ने 26 मई, 2026 को बिल्डर रिद्वी-सिद्वी प्राइम एस्टेट, प्रमोटर राजेश शर्मा व प्रशांत शर्मा को नोटिस जारी कर लिखित में स्पष्टीकरण मांगा। तब तक फ्लैट बेचने व विज्ञापन देने पर भी रोक लगा दी।
रेरा ने सुनवाई की तारीख 11 जून,2026 तय की थी। रेरा के निर्देश के बावजूद बिल्डर ने न तो बोर्ड हटाए और न ही फ्लैट बेचने बंद किए थे।
इस मामले में सुनवाई की तारीख 11 जून को शिकायतकर्ता एडवोकेट महेंद गौड़ सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक रेरा के दफ्तर में बैठे रहे। न तो बिल्डर व प्रमोटर राजेश शर्मा और प्रशांत शर्मा आए और न ही उनका कोई प्रतिनिधि हाजिर हुआ। इस शिकायतकर्ता को अगली तारीख ई-मेल से सूचित करने का आश्चासन देकर चलता कर दिया।
इस बीच, 24 जून को शिकायतकर्ता रेरा ऑफिस गए तो उन्हें पता चला कि उसी दिन यानी 24 जून को ही बिल्डर व प्रमोटर को जारी नोटिस रद्ध कर दिया है।
फाइल दिखाने पर रजिस्ट्रार राजीव जैन ने फाइल के रिकार्ड रुम में जाना बताया। असल में रजिस्ट्रार ने 24 जून को ही बिल्डर व प्रमोटरों को नोटिस रद्ध होने की सूचना दी है। हैरानी की बात है कि फाइल इतनी जल्दी रिकार्ड में कैसे भेजी जा सकती है?
शिकायतकर्ता एडवोकेट महेंद्र गौड़ ने तब खोजबीन की तो बिल्डर और रेरा की मिलीभगत की परतें खुल गईं।
11 मई को शिकायत मिलने के बाद बिल्डर ने रेरा के कर्ताधर्ताओं की मिलीभगत से 18 मई को प्लॉट नंबर एसबी-27 के प्रोजेक्ट की मंजूरी के लिए पैसे जमा करवा दिए।
असलियत यह है कि मौके पर आठ मंजिला निर्माण हो चुका है। मिलीभगत से रजिस्ट्रार ने पैसे जमा होने के बाद 26 मई, 2026 को बिल्डर व दो अन्य को 11 मई की शिकायत पर नोटिस देकर जवाब मांगा था।
11 जून को नोटिस रद्ध करने के बाद रेरा ने प्रोजेक्ट के दस्तावेजों व अन्य कानूनी पहलुओं की जांच किए बिना ही 17 जून को प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी।
प्लॉट नंबर एसबी-27 व एसबी-28 पर बिल्डर रिद्वी-सिद्वी प्राइम एस्टेट गंगा कोटेचा ओम रत्नम नाम से प्रचारित करके बेच रहा था।
रेरा ने 17 जून को एसबी-27 पर प्रोजेक्ट केा गोविंदम नाम से रजिस्टर्ड कर लिया है। जबकि मौके पर दोनों ही प्रोजेक्ट एक ही हैं। एक साल पहले बिल्डर ने गोविंदम नाम से ही प्रोजेक्ट शुरु किया था। लेकिन, रजिस्टर्ड ओम रत्नम नाम से करवाया।
अब शिकायत होने पर एसबी -27 पर आठ मंजिला निर्माण पूरा होने पर गोविंदम नाम से रजिस्टर्ड करवाया है।
एडवोकेट महेंद्र गौड़ का कहना है कि रेरा के नियमों के अनुसार रेरा से मंजूरी लेने के लिए बिल्डर शुरुआत में जानकारी देनी होती है।
इसमें प्रोजेक्ट की नींव खोदने, निर्माण पूरा होने तक का प्रमाण-पत्र लेने व निवासियों की रजिस्टर्ड सोसायटी बनाने तक की समय सारिणी तारीख सहित एडवांस में सूचना देनी होती है।
यह जानकारी बकायदा रेरा की वेबसाइट पर अपलोड होती है। इसके अतिरिक्त बिल्डर को हर तीन महीने में प्रोजेक्ट की प्रगति रिपोर्ट देना जरुरी है। हर चरण के निर्माण में खर्च का ब्यौरा भी देना होता है।
प्लॉट नंबर एसबी-28 पर बन रहे प्रोजेक्ट ओम रत्नम की त्रैमासिक रिपोर्ट रेरा की वेबसाइट पर अपलोड है।
दूसरी तरफ, एसबी-27 पर आठ मंजिला निर्माण पूरा होने के बावजूद गोविंदम नाम के प्रोजेक्ट की ऐसी कोई जानकारी अपलोड नहीं है। वास्तविकता में दोनों एक ही प्रोजेक्ट हैं, जिसे रेरा की मिलीभगत से एक ही बताने की कोशिश कर रहा है।
इस मामले में बड़ा सवाल यह है कि आठ मंजिला निर्माण होने के बाद रेरा प्रोजेक्ट को मंजूरी दे कैसे रहा है?
यदि यह अलग प्रोजेक्ट है तो इसके लिए पैसा कहां से आया? रेरा के पास प्लॉट नंबर एसबी-27 पर बन रहे गोविंदम नाम के आवासीय प्रोजेक्ट के आठ मंजिलों के निर्माण का शिड्यूल व खर्चे की कोई जानकारी क्यों नहीं है? रोचक यह है कि बिल्डर को चार्टेड एकाउंटेंट से प्रमाणित खर्चों का ब्यौरा देना होता है।
'द सूत्र' ने रेरा रजिस्ट्रार राजीव जैन को मोबाइल पर फोन कर उनका पक्ष जानना चाहा, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। इसके बाद उन्हें मैसेज भी भेजा गया लेकिन कोई रिप्लाई नहीं मिला।
![Message to Rajeev Jain to clarify the issue]()
बिल्डर का पक्ष जानने के लिए भी रेरा वेबसाइट पर दिए उनके नाम व नंबर पर लगातार फोन किए गए। पार्टनर संतोष जैन ने कहा कि वह कोलकाता रहते हैं, उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने दूसरे पार्टनर से बात करने को कहा।
इसके बाद अमित कोटेचा के नंबर पर फोन किया गया तो उन्होंने उठाया नहीं। फिर कुलदीप कोटेचा को फोन किया तो उन्होंने भी इस मामले में जानकारी होने से इनकार कर दिया।
'रेरा ने प्लाट नंबर एसबी-27 पर आठ मंजिला प्रोजेक्ट निर्माण पूरा होने के बाद 17 जून को मंजूरी दी है। पहले एसबी-27 व एसबी-28 बन रहे प्रोजेक्ट को एक ही प्रचारित कर रहे थे। जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद चल रहा है। प्रोजेक्ट की मंजूरी देने से पूर्व जमीन पर किसी प्रकार का विवाद नहीं होने की पुष्टि करना रेरा की ड्यूटी है। रेरा ने एसबी-27 पर प्रोजेक्ट को 17 जून को मंजूरी दी है जबकि सिविल कोर्ट में मुकदमा मई में ही दायर हो गया था। रेरा मूलत:ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए है ना कि बिल्डर के गैर-कानूनी कार्यां को कानूनी जामा पहनाने के लिए।'
-महेंद्र गौड़,एडवोकेट
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रेरा अधिकारियों की मेहरबानी का आलम यह रहा कि न सिर्फ सरकारी अवकाश के दिन 17 जून को इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी, बल्कि बिल्डर को जारी कारण बताओ नोटिस और बिक्री पर लगी रोक को भी आनन-फानन में रद्द कर दिया।
पहले बताया एक,अब बता रहे अलग
दो अलग-अलग प्लॉट पर बन रहे इस बहुमंजिला प्रोजेक्ट की पार्किंग व अन्य सुविधाएं कॉमन हैं। गंगा कोटेचा ओम रत्नम नाम से यह प्रोजेक्ट बन रहा था।
बिल्डर शुरु से ही अलग-अलग दो प्लॉट पर बन रहे प्रोजेक्ट को एक ही बताकर प्रचारित कर रहा था। ग्राहकों को इसी के अनुरुप बेचने का ऑफर दे रहा था। प्रोजेक्ट के ब्राउशर में भी बिल्डर ने पूरे प्रोजेक्ट को एक बताते हुए रेरा से मंजूरी वाला बता रहा था।
शिकायत होते ही शुरु हुआ खेल
शिकायत में बताया कि बिल्डर रिद्वी-सिद्वी प्राइम एस्टेट व प्रमोटर प्लॉट संख्या एसबी-27 पर फर्जी रेरा मंजूरी बता रहे हैं। हकीकत में मंजूरी प्लॉट नंबर एसबी-28 के लिए मिली है।
बिल्डर दोनों प्लॉट पर गंगा कोटेचा ओम रत्नम नाम से बहुमंजिला आवासीय प्रोजेक्ट बना रहा है। साथ ही वह ग्राहकों को फ्लैट खरीदने के लिए आमंत्रित कर रहा है।
रेरा की वेबसाइट पर एसबी-27 पर बनने वाले किसी प्रोजेक्ट के कोई दस्तावेज अपलोड नहीं है। इस प्लॉट के स्वामित्व के संबंध में विवाद चल रहा है।
नगर निगम व जेडीए की मिलीभगत से बिना सभी वारिसों को नोटिस दिए ही एसबी-27 का स्वामित्व बदलने व नक्शे पास करने का भी आरोप लगाया।
रेरा ने मांगा जवाब व लगाई रोक
रेरा ने सुनवाई की तारीख 11 जून,2026 तय की थी। रेरा के निर्देश के बावजूद बिल्डर ने न तो बोर्ड हटाए और न ही फ्लैट बेचने बंद किए थे।
शिकायतकर्ता से बोला झूठ
इस बीच, 24 जून को शिकायतकर्ता रेरा ऑफिस गए तो उन्हें पता चला कि उसी दिन यानी 24 जून को ही बिल्डर व प्रमोटर को जारी नोटिस रद्ध कर दिया है।
फाइल दिखाने पर रजिस्ट्रार राजीव जैन ने फाइल के रिकार्ड रुम में जाना बताया। असल में रजिस्ट्रार ने 24 जून को ही बिल्डर व प्रमोटरों को नोटिस रद्ध होने की सूचना दी है। हैरानी की बात है कि फाइल इतनी जल्दी रिकार्ड में कैसे भेजी जा सकती है?
ऐसे हुई बिल्डर से मिलीभगत
11 मई को शिकायत मिलने के बाद बिल्डर ने रेरा के कर्ताधर्ताओं की मिलीभगत से 18 मई को प्लॉट नंबर एसबी-27 के प्रोजेक्ट की मंजूरी के लिए पैसे जमा करवा दिए।
असलियत यह है कि मौके पर आठ मंजिला निर्माण हो चुका है। मिलीभगत से रजिस्ट्रार ने पैसे जमा होने के बाद 26 मई, 2026 को बिल्डर व दो अन्य को 11 मई की शिकायत पर नोटिस देकर जवाब मांगा था।
11 जून को नोटिस रद्ध करने के बाद रेरा ने प्रोजेक्ट के दस्तावेजों व अन्य कानूनी पहलुओं की जांच किए बिना ही 17 जून को प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी।
नाम भी बदल डाला
रेरा ने 17 जून को एसबी-27 पर प्रोजेक्ट केा गोविंदम नाम से रजिस्टर्ड कर लिया है। जबकि मौके पर दोनों ही प्रोजेक्ट एक ही हैं। एक साल पहले बिल्डर ने गोविंदम नाम से ही प्रोजेक्ट शुरु किया था। लेकिन, रजिस्टर्ड ओम रत्नम नाम से करवाया।
अब शिकायत होने पर एसबी -27 पर आठ मंजिला निर्माण पूरा होने पर गोविंदम नाम से रजिस्टर्ड करवाया है।
यह कहता है नियम?
इसमें प्रोजेक्ट की नींव खोदने, निर्माण पूरा होने तक का प्रमाण-पत्र लेने व निवासियों की रजिस्टर्ड सोसायटी बनाने तक की समय सारिणी तारीख सहित एडवांस में सूचना देनी होती है।
यह जानकारी बकायदा रेरा की वेबसाइट पर अपलोड होती है। इसके अतिरिक्त बिल्डर को हर तीन महीने में प्रोजेक्ट की प्रगति रिपोर्ट देना जरुरी है। हर चरण के निर्माण में खर्च का ब्यौरा भी देना होता है।
प्रोजेक्ट तो एक ही है लेकिन...
दूसरी तरफ, एसबी-27 पर आठ मंजिला निर्माण पूरा होने के बावजूद गोविंदम नाम के प्रोजेक्ट की ऐसी कोई जानकारी अपलोड नहीं है। वास्तविकता में दोनों एक ही प्रोजेक्ट हैं, जिसे रेरा की मिलीभगत से एक ही बताने की कोशिश कर रहा है।
सुलगते सवाल, कहां है यह जानकारी?
यदि यह अलग प्रोजेक्ट है तो इसके लिए पैसा कहां से आया? रेरा के पास प्लॉट नंबर एसबी-27 पर बन रहे गोविंदम नाम के आवासीय प्रोजेक्ट के आठ मंजिलों के निर्माण का शिड्यूल व खर्चे की कोई जानकारी क्यों नहीं है? रोचक यह है कि बिल्डर को चार्टेड एकाउंटेंट से प्रमाणित खर्चों का ब्यौरा देना होता है।
नहीं दिया कोई जवाब
Message to Rajeev Jain to clarify the issue
बिल्डर का पक्ष जानने के लिए भी रेरा वेबसाइट पर दिए उनके नाम व नंबर पर लगातार फोन किए गए। पार्टनर संतोष जैन ने कहा कि वह कोलकाता रहते हैं, उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने दूसरे पार्टनर से बात करने को कहा।
इसके बाद अमित कोटेचा के नंबर पर फोन किया गया तो उन्होंने उठाया नहीं। फिर कुलदीप कोटेचा को फोन किया तो उन्होंने भी इस मामले में जानकारी होने से इनकार कर दिया।
'रेरा ने प्लाट नंबर एसबी-27 पर आठ मंजिला प्रोजेक्ट निर्माण पूरा होने के बाद 17 जून को मंजूरी दी है। पहले एसबी-27 व एसबी-28 बन रहे प्रोजेक्ट को एक ही प्रचारित कर रहे थे। जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद चल रहा है। प्रोजेक्ट की मंजूरी देने से पूर्व जमीन पर किसी प्रकार का विवाद नहीं होने की पुष्टि करना रेरा की ड्यूटी है। रेरा ने एसबी-27 पर प्रोजेक्ट को 17 जून को मंजूरी दी है जबकि सिविल कोर्ट में मुकदमा मई में ही दायर हो गया था। रेरा मूलत:ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए है ना कि बिल्डर के गैर-कानूनी कार्यां को कानूनी जामा पहनाने के लिए।'
-महेंद्र गौड़,एडवोकेट
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