IPS मनीष अग्रवाल पर चलेगा केस, 11 साल बाद मिली अनुमति, तीन लाख रुपए की घूसखोरी का मामला
The Sootr | Apr 15, 2026, 13:11 IST
Photograph: (the sootr)
तीन लाख रुपए की घूस लेने के मामले में आईपीएस मनीष अग्रवाल के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी मिल गई है। इस मंजूरी को मिलने में 11 साल का लंबा समय लग गया।
News In Short
- आईपीएस मनीष अग्रवाल के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी मिली।
- उधमपुर पोस्टिंग के समय तीन लाख रुपए की घूस लेने का है आरोप।
- अभियोजन की मंजूरी को मिलने में 11 साल का लंबा समय लगा।
- मनीष अग्रवाल का कैडर 2014 में कश्मीर से चेंज कर राजस्थान हो गया।
- अब ACB आईपीएस के खिलाफ कोर्ट में पूरक चालान करेगी पेश।
News In Detail
क्या है पूरा मामला?
मामले की जांच जम्मू-कश्मीर की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), जिसे पहले विजिलेंस ऑर्गेनाइजेशन जम्मू (VOJ) के नाम से जाना जाता था, ने की थी। जांच के बाद ब्यूरो ने पाया कि मनीष अग्रवाल पर लगाए गए रिश्वत के आरोप सही थे। इस संबंध में मार्च 2015 में एफआईआर (नंबर 10/2015) दर्ज की गई थी। विजिलेंस टीम ने रीडर युद्धवीर को शिक्षक से रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था।
फाइलों में दबी रही इंसाफ की गुहार
राज्य की मंजूरी के बाद फाइल केंद्र सरकार को भेजी गई, जहां इसे मंजूरी मिलने में 7 साल और लग गए। कुल मिलाकर 11 साल बाद अब जाकर चालान पेश करने का रास्ता साफ हुआ है।
Ashish Bhardwaj (34)
मनीष का राजस्थान से संबंध
राजस्थान में भी भ्रष्टाचार का मामला
उन पर आरोप था कि उन्होंने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे बना रही कंपनी के अधिकारियों से बिचौलियों के जरिए लाखों रुपये की रिश्वत मांगी थी।
राजस्थान एसीबी ने इस मामले की गहन जांच के बाद साल 2021 में उन्हें गिरफ्तार किया था। इस मामले में उनके खिलाफ पहले ही चालान पेश किया जा चुका है और वे जेल भी जा चुके हैं।
Ashish Bhardwaj (35)
अब पेश होगा पूरक चालान
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी लंबी देरी के बावजूद चालान की मंजूरी मिलना यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार के मामलों में कानून का हाथ अंततः आरोपी तक पहुंच ही जाता है।
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