जयपुर में 2200 करोड़ की जमीन पर बुलडोजर का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने हटाई रोक

Mukesh Sharma | May 18, 2026, 18:23 IST
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Ashish Bhardwaj - 2026-05-18T182226.280
Photograph: (the sootr)

राजस्थान हाई कोर्ट ने जयपुर के बी-टू बाईपास पर श्रीराम नगर-बी कॉलोनी में अतिक्रमण हटाने पर लगी रोक हटा दी है। इस फैसले के बाद हाउसिंग बोर्ड 2200 करोड़ की इस 42 बीघा जमीन पर कब्जा ले सकेगा। वहां बने 300 मकानों पर बुलडोजर चलने का खतरा मंडरा रहा है।

News In Short

  • हाई कोर्ट ने जयपुर की श्रीराम नगर कॉलोनी-बी में मकानों को हटाकर कब्जा लेने पर लगी रोक को हटाया
  • कोर्ट ने कहा-हाउसिंग बोर्ड पर नाराजगी, मिलीभगत कर कोर्ट से सही फैक्ट्स छिपाए।
  • मामला 87 कॉलोनियों से जुड़ा।
  • बी-टू बाईपास की इस 42 बीघा जमीन को भूमाफियाओं ने रसूखदारों को कौड़ियों के दाम बेचा।
  • जमीन पर 300 परिवार रह रहे, कोर्ट के फैसले के बाद मकानों पर बुलडोजर चलने का खतरा।

News In Detail

जयपुर में बी-टू बाइपास चौराहे से द्रव्यवती नदी तक 42 बीघा से ज्यादा बेशकीमती जमीन है। इस जमीन की कीमत इस समय बाजार में 2200 करोड़ रुपए से ज्यादा है।

हाउसिंग बोर्ड की लापरवाही का हाल देखिए, बोर्ड ने 1989 में इस जमीन को अधिग्रहण करने की प्रकिया शुरू की थी, जो 1991 में पूरी हुई थी। तब बोर्ड ने जमीन पर कब्जा नहीं लिया। इस बीच जमीन पर कुछ भूमाफियाओं ने जवाहरपुरी भवन निर्माण सहकारी समिति के पट्टे के आधार पर कॉलोनी बसा दी और भूखंडों का बेचान दिखा दिया।

समिति का तर्क था कि उसने खातेदारों से यह जमीन 1981 में खरीद ली थी। बताया जा रहा है कि इस कॉलोनी में बड़े रसूख वाले लोगों को भूखंड कौड़ियों के दाम बेचे गए हैं।

पिछली सुनवाई में लगी थी रोक

श्रीराम कॉलोनी-बी विकास समिति की अपील पर पिछली सुनवाई में इस जमीन पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी थी।

सोमवार को एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस आशुतोष कुमार ने समिति की अपील पर सुनवाई करने के बाद यह रोक हटा दी।

मिलीभगत से बोर्ड ने छिपाई जानकारी

हाई कोर्ट में महमूद आलम को मामले में पक्षकार बनाने की अर्जी पर सोमवार को मामले में सुनवाई होनी थी। अर्जी को मंजूरी देते हुए कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि हाउसिंग बोर्ड ने अपील पर 21 अप्रैल को सुनवाई के दौरान श्रीराम नगर बी का मामला 87 कॉलोनियों वाले मामले में शामिल होने की बात छिपाई थी।

कोर्ट ने इसे मिलीभगत बताते हुए 21 अप्रैल को लगाई गई अपनी रोक को हटा लिया है। इस रोक के हटने से हाउसिंग बोर्ड श्रीराम नगर बी की बाकी जमीन पर कब्जा लेने को स्वतंत्र है। इस कॉलोनी के करीब 300 मकानों पर खतरा बढ़ गया है।

2019 में एनओसी देने से किया मना

वर्ष 2019 में कॉलोनी के नियमन को लेकर जेडीए ने एनओसी मांगी। आवासन मंडल के तत्कालीन आयुक्त ने एनओसी देने से इनकार कर दिया।

मंडल ने तर्क दिया कि जब जमीन पर 50 फीसदी निर्माण ही नहीं है तो नियमन क्यों किया जा रहा है? सोसाइटी के खिलाफ FIR भी दर्ज करवाई गई। मामला एसीबी को भेजने के साथ ही नियमन की कार्यवाही को हाई कोर्ट में चुनौती भी दी थी।

कोर्ट ने कहा गैर-कानूनी है कॉलोनी

बोर्ड की याचिका मंजूर करते हुए एकलपीठ ने 9 अप्रैल के आदेश में कहा था कि 42 बीघा जमीन को राजस्थान हाउसिंग बोर्ड की है। सरकार जमीन मालिकों को जमीन के बदले मुआवजा दे चुकी है।

एकलपीठ ने जेडीए की 29 मई 1995 को दी गई योजना स्वीकृति और उसके बाद के आदेशों को अवैध मानते हुए कहा था कि विक्रय पत्र से स्वामित्व हस्तांतरित नहीं होता है।

एकलपीठ ने जमीन पर बने मकानों को अवैध बताते हुए बोर्ड को इन्हें हटाकर जमीन का कब्जा लेने को कहा था। इस आदेश के बाद हाउसिंग बोर्ड ने यहां खाली जमीन सहित कुछ निर्माण हटाकर कब्जा ले भी लिया था।

चार दशक से बसे हैं लोग

एकलपीठ के आदेश को श्रीराम नगर बी कॉलोनी विकास समिति ने खंडपीठ में चुनौती दी। समिति के एडवोकेट आशीष शर्मा ने कोर्ट को बताया कि एकलपीठ ने उन बिंदुओं पर निर्णय दिया है, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट पहले ही तय कर चुका है।

तर्क दिया गया कि इस जमीन पर चार दशक से करीब 300 परिवार रह रहे हैं। उनके वर्ष 1981 के विक्रयों पत्रों को शून्य घोषित करना अन्याय है। इसके अलावा हाउसिंग बोर्ड ने अपीलार्थियों पर धोखाधड़ी के भी आरोप लगाए हैं, जिन्हें पहले ही न्यायिक कार्यवाहियों में खारिज किया जा चुका है। ऐसे में एकलपीठ के आदेश को रद्द किया जाए।

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