दिवाली पर भी नहीं सुधरीं जयपुर की सड़कें, झोटवाड़ा से सांगानेर तक गड्ढों से लोग परेशान
Nov 02, 2026, 20:37 IST
जयपुर में दिवाली पर भी टूटी सड़कें, झोटवाड़ा, विद्याधर नगर और सांगानेर में लोग परेशान
जयपुर में दिवाली की तैयारियों के बीच सड़कों की बदहाली सामने आई है। The Sootr की ग्राउंड पड़ताल में झोटवाड़ा, विद्याधर नगर और सांगानेर के कई हिस्सों में सड़कें टूटी मिलीं। गड्ढों और उखड़ी सड़कों से लोगों की आवाजाही मुश्किल हो रही है। नगर निगम ने अक्टूबर में सड़क मरम्मत की शिकायतों के लिए विशेष शिविर भी लगाए थे। इसके बावजूद स्थिति नहीं सुधरी।
राजधानी जयपुर में दिवाली की तैयारियां चल रही हैं। बाजार सज रहे हैं और त्योहार की खरीदारी के लिए सड़कों पर लोगों की आवाजाही बढ़ रही है। लेकिन शहर की कई सड़कों की हालत अब भी खराब है। कहीं डामर उखड़ा हुआ है तो कहीं गड्ढों के बीच से वाहन निकालना मुश्किल हो रहा है।
The Sootr की ग्राउंड पड़ताल में झोटवाड़ा, विद्याधर नगर और सांगानेर के कई हिस्सों में टूटी सड़कें सामने आई हैं। इन इलाकों में सड़क की खराब स्थिति वाहन चालकों के लिए परेशानी बनी हुई है। सवाल यह है कि जब दिवाली से पहले शहर की सफाई, रोशनी और सौंदर्यीकरण के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, तब लोगों के रोजाना इस्तेमाल वाली सड़कों की मरम्मत समय पर क्यों नहीं हो सकी?
जयपुर नगर निगम ने 7 से 16 अक्टूबर के बीच सेवा सेतु अभियान के तहत अलग-अलग जोन में शिविर लगाए थे। इनमें सड़क, नाली और स्ट्रीट लाइट जैसी समस्याओं से जुड़ी शिकायतें लेने की व्यवस्था थी। इस अभियान के तहत 7 अक्टूबर को सांगानेर, 9 अक्टूबर को विद्याधर नगर और मुरलीपुरा तथा 13 अक्टूबर को झोटवाड़ा और वैशाली नगर में शिविर निर्धारित किए गए थे।
इन शिविरों में डामर और सीसी सड़कों की मरम्मत तथा पेचवर्क से जुड़ी शिकायतें भी शामिल थीं। अब सवाल उठता है कि इन इलाकों से कितनी शिकायतें आईं, कितनी सड़कों की मरम्मत हुई और कितने मामले अब भी लंबित हैं? क्योंकि जिन इलाकों में लोगों को राहत मिलनी थी, वहां आज भी कई जगह सड़कें खराब नजर आ रही हैं।
जयपुर में दिवाली के मौके पर भी लोगों को टूटी सड़कों से राहत नहीं मिली है। झोटवाड़ा, विद्याधर नगर और सांगानेर के अलावा कालवाड़ रोड, सिरसी रोड, खिरणी फाटक, मानसरोवर और गुर्जर की थड़ी जैसे इलाकों में भी सड़कों की बदहाली की शिकायतें सामने आती रही हैं। कहीं डामर उखड़ा हुआ है तो कहीं सड़क पर गड्ढे वाहन चालकों की परेशानी बढ़ा रहे हैं।
मानसरोवर के किरण पथ और न्यू आतिश मार्केट के आसपास सड़क धंसने तथा सिरसी रोड और खिरणी फाटक क्षेत्र में सड़क क्षतिग्रस्त होने के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। सवाल यह है कि मानसून खत्म होने के बाद भी राजधानी की सड़कों को दुरुस्त करने में इतनी देरी क्यों हो रही है?
शहर के बाहरी इलाकों में भी सड़कें परेशानी का सबब बनी हुई हैं। गोनेर से पदमपुरा मार्ग, जगतपुरा के सेक्टर-50 से मथुरावाला जाने वाली सड़क और सीतापुरा-सांगानेर क्षेत्र में खराब सड़कों की शिकायतें सामने आई हैं। वहीं, सांगानेर के अग्रवाल फार्म बी-2 बाइपास चौराहे पर हाल में बनाई गई सड़क महज आठ दिन में उखड़ने का मामला सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है।
सांगानेर में केवल पुरानी सड़कों की खराब हालत ही चिंता का विषय नहीं है। अग्रवाल फार्म बी-2 बाइपास क्षेत्र में हाल में बनाई गई एक सड़क के कुछ ही दिनों में उखड़ने का मामला भी सामने आया था। इस मामले में JDA के अधिशासी अभियंता मनीष रोतवाल ने सड़क को अस्थायी बताते हुए नुकसान की जांच कराने की बात कही थी।
ऐसे में सवाल केवल मरम्मत में देरी का नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता का भी है। यदि सड़क बनाने के कुछ ही दिनों में उसका डामर उखड़ने लगे तो निर्माण सामग्री, निगरानी और ठेकेदार की जवाबदेही की जांच जरूरी हो जाती है।
दिवाली के दौरान जयपुर के बाजारों और प्रमुख मार्गों पर वाहनों की संख्या बढ़ने की संभावना है। यातायात पुलिस ने भी भीड़ को देखते हुए 3 से 9 नवंबर तक बसों के संचालन में बदलाव किया है। लेकिन ट्रैफिक व्यवस्था बदलने के साथ सड़कों का ठीक होना भी जरूरी है। गड्ढों और उखड़े हुए डामर के कारण दोपहिया वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है।
खराब सड़क पर अचानक ब्रेक लगाने या गड्ढे से बचने के लिए वाहन मोड़ने से दुर्घटना का जोखिम बढ़ सकता है। त्योहार पर खरीदारी के लिए निकलने वाले परिवारों और रोजाना काम पर जाने वाले लोगों के लिए यह परेशानी और बढ़ सकती है।
जयपुर में सड़क निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी अलग-अलग क्षेत्रों में JDA, नगर निगम और सार्वजनिक निर्माण विभाग के पास है। सवाल यह है कि झोटवाड़ा, विद्याधर नगर और सांगानेर में पिछले एक साल में सड़क मरम्मत के लिए कितना बजट स्वीकृत हुआ? कितने काम पूरे हुए? किन सड़कों पर ठेकेदारों को भुगतान किया गया और कितनी सड़कें अभी गारंटी अवधि में हैं?
दिवाली पर शहर को सजाने के अभियान अपनी जगह हैं, लेकिन आम लोगों के लिए सुरक्षित और चलने लायक सड़कें भी उतनी ही जरूरी हैं। राजधानी के कई इलाकों की मौजूदा स्थिति बताती है कि सड़क मरम्मत के काम की जमीनी समीक्षा की जरूरत है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दिवाली से पहले जिन सड़कों की मरम्मत होनी चाहिए थी, वे कब तक ठीक होंगी और इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
The Sootr की ग्राउंड पड़ताल में झोटवाड़ा, विद्याधर नगर और सांगानेर के कई हिस्सों में टूटी सड़कें सामने आई हैं। इन इलाकों में सड़क की खराब स्थिति वाहन चालकों के लिए परेशानी बनी हुई है। सवाल यह है कि जब दिवाली से पहले शहर की सफाई, रोशनी और सौंदर्यीकरण के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, तब लोगों के रोजाना इस्तेमाल वाली सड़कों की मरम्मत समय पर क्यों नहीं हो सकी?
अक्टूबर में लगाए मरम्मत के शिविर, फिर भी सड़कों पर गड्ढे
इन शिविरों में डामर और सीसी सड़कों की मरम्मत तथा पेचवर्क से जुड़ी शिकायतें भी शामिल थीं। अब सवाल उठता है कि इन इलाकों से कितनी शिकायतें आईं, कितनी सड़कों की मरम्मत हुई और कितने मामले अब भी लंबित हैं? क्योंकि जिन इलाकों में लोगों को राहत मिलनी थी, वहां आज भी कई जगह सड़कें खराब नजर आ रही हैं।
झोटवाड़ा से मानसरोवर तक बदहाल सड़कें, गड्ढों के बीच निकल रहे वाहन
मानसरोवर के किरण पथ और न्यू आतिश मार्केट के आसपास सड़क धंसने तथा सिरसी रोड और खिरणी फाटक क्षेत्र में सड़क क्षतिग्रस्त होने के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। सवाल यह है कि मानसून खत्म होने के बाद भी राजधानी की सड़कों को दुरुस्त करने में इतनी देरी क्यों हो रही है?
दिवाली पर जयपुर रोशनी से जगमगाने की तैयारी में है, लेकिन झोटवाड़ा, विद्याधर नगर, मानसरोवर, मुरलीपुरा और सांगानेर समेत कई इलाकों की सड़कें गड्ढों से बदहाल हैं।आखिर राजधानी की जनता कब तक टूटी सड़कों पर सफर करेगी? मरम्मत के जिम्मेदार अधिकारी कहां हैं?#Jaipur #BrokenRoads https://t.co/qhFHjW8POu
— Raghavendra Rathore (@raghavendra__) November 2, 2026
दिवाली पर भी अधूरी मरम्मत, सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
सांगानेर में सड़क की गुणवत्ता भी सवालों में
ऐसे में सवाल केवल मरम्मत में देरी का नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता का भी है। यदि सड़क बनाने के कुछ ही दिनों में उसका डामर उखड़ने लगे तो निर्माण सामग्री, निगरानी और ठेकेदार की जवाबदेही की जांच जरूरी हो जाती है।
दिवाली पर बढ़ेगी आवाजाही, खराब सड़कों से परेशानी
खराब सड़क पर अचानक ब्रेक लगाने या गड्ढे से बचने के लिए वाहन मोड़ने से दुर्घटना का जोखिम बढ़ सकता है। त्योहार पर खरीदारी के लिए निकलने वाले परिवारों और रोजाना काम पर जाने वाले लोगों के लिए यह परेशानी और बढ़ सकती है।
अब जवाब चाहिए, मरम्मत का बजट कहां खर्च हुआ?
दिवाली पर शहर को सजाने के अभियान अपनी जगह हैं, लेकिन आम लोगों के लिए सुरक्षित और चलने लायक सड़कें भी उतनी ही जरूरी हैं। राजधानी के कई इलाकों की मौजूदा स्थिति बताती है कि सड़क मरम्मत के काम की जमीनी समीक्षा की जरूरत है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दिवाली से पहले जिन सड़कों की मरम्मत होनी चाहिए थी, वे कब तक ठीक होंगी और इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
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