सात समंदर पार से बरसेगा पिता का प्यार, कोर्ट ने कहा-बच्ची को पिता के प्यार से नहीं रखा जा सकता दूर

Ashish Bhardwaj | May 27, 2026, 14:41 IST
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Ashish Bhardwaj - 2026-05-27T143652.543
Photograph: (the sootr)

जयपुर की फैमिली कोर्ट के एक फैसले से विदेश में बैठा पिता अपनी बेटी पर ममता की धारा बहा सकेगा। कोर्ट ने लंदन में रह रहे पिता को अपनी बेटी से वीडियो कॉल पर मुलाकात की अनुमति दे दी है।

News In Short

  • जयपुर फैमिली कोर्ट ने पिता को बेटी से वीडियो कॉल पर बात करने की अनुमति दी।
  • पिता हर महीने के दूसरे और चौथे रविवार को अपनी बेटी से बात कर सकेंगे।
  • मां को हर महीने हेल्थ और एजुकेशन रिपोर्ट पिता को भेजने का आदेश।
  • कोर्ट ने कहा, किसी भी बच्ची को पिता के स्नेह से वंचित नहीं किया जा सकता।
  • पिता पोलैंड मूल के और वर्तमान में लंदन में रहते हैं।

News In Detail

Jaipur: दूरी चाहे सात समंदर की हो, लेकिन एक पिता का अपनी संतान के लिए प्रेम और तड़प किसी भी सरहद या कानूनी बंदिशों से बहुत ऊपर होती है। राजस्थान में जयपुर की फैमिली कोर्ट-4 से एक ऐसा ही भावुक कर देने वाला फैसला सामने आया है, जिसने दूर देश में बैठे एक बेबस पिता की सूनी आंखों को उम्मीद की रोशनी दी है।

अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि किसी भी मासूम को उसके पिता के प्यार और वात्सल्य से महरूम नहीं किया जा सकता। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब लंदन में रह रहा एक पिता जयपुर में अपनी साढ़े तीन साल की बेटी से न सिर्फ बात कर पाएगा, बल्कि उसके चेहरे की मुस्कान भी देख सकेगा।

गोवा में शुरू हुआ था सफर, विवादों ने बढ़ाईं दूरियां

यह कहानी केवल कानूनी दांव-पेंचों की नहीं, बल्कि बिखरते रिश्तों के बीच पिसते एक मासूम बचपन की भी है। पोलैंड के मूल निवासी और वर्तमान में लंदन में रह रहे एक युवक की मुलाकात साल 2022 में जयपुर की रहने वाली एक युवती से गोवा की खूबसूरत वादियों में हुई थी।

दोनों के बीच प्यार हुआ और वे लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे। इस खूबसूरत सफर के बीच 16 दिसंबर 2022 को उनके आंगन में एक नन्हीं परी की किलकारी गूंजी।

​बेटी के जन्म ने उनके जीवन को खुशियों से भर दिया था, लेकिन वक्त की करवट के साथ दोनों के रिश्तों में कड़वाहट घुलने लगी। विवाद इस हद तक बढ़ा कि मां अपनी मासूम बेटी को लेकर पिता से अलग हो गई।

दर्द तब और गहरा हो गया जब मां ने पिता को अपनी ही बेटी की आवाज सुनने और उससे बात करने तक पर पाबंदी लगा दी। एक पिता के लिए अपनी ही संतान से बात करने के लिए तरसना किसी मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं था।

पिता का साया जरूरी

​बेटी से बात करने और उसकी कस्टडी पाने के लिए व्याकुल पिता ने आखिरकार अदालत का दरवाजा खटखटाया। पिता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता सुनील शर्मा और गौरव सिंघल ने अदालत में तार्किक दलील पेश की।

वकीलों ने कहा कि इतनी छोटी बच्ची को यदि उसके पिता के प्रेम और साए से दूर रखा गया, तो इसका सीधा और नकारात्मक असर उसके शारीरिक व मानसिक विकास पर पड़ेगा। एक बच्चे के संपूर्ण विकास के लिए माता और पिता दोनों का प्यार बेहद जरूरी है।

​हालांकि, मां ने इन तमाम दलीलों को आधारहीन बताते हुए याचिका को खारिज करने की मांग की थी। लेकिन अदालत ने मां के तर्कों को दरकिनार करते हुए बच्ची के सुनहरे भविष्य और उसकी भावनात्मक जरूरतों को सर्वोपरि रखा।

​महीने में दो बार स्क्रीन पर बहेगी ममता की धारा

​फैमिली कोर्ट ने पिता को एक बड़ी अंतरिम राहत देते हुए आदेश दिया कि मां को हर महीने के दूसरे और चौथे रविवार को दोपहर 12:00 बजे से 1:30 बजे तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए पिता की अपनी बेटी से बात करवानी होगी।

भले ही यह मुलाकात डिजिटल होगी, लेकिन एक पिता के लिए अपनी बेटी को स्क्रीन पर देखना और उसकी तुतली आवाज सुनना किसी वरदान से कम नहीं है।

कोर्ट ने मां को यह भी पाबंद किया है कि वह हर महीने बच्ची की शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी प्रोग्रेस रिपोर्ट पिता को भेजेगी, ताकि सात समंदर पार बैठा पिता अपनी जिम्मेदारी और जुड़ाव को महसूस कर सके।

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