IAS संदीप वर्मा का वेतन रुकेगा, दर्ज होगी FIR, लेबर कोर्ट का आदेश
Mukesh Sharma | Aug 20, 2026, 18:54 IST
ओवरटाइम रोका था अब कटेगी सैलरी
जयपुर लेबर कोर्ट ने आरएसआरटीसी कंडक्टर सीताराम के बकाया ओवरटाइम भुगतान मामले में आईएएस संदीप वर्मा और एमडी पुरुषोत्तम शर्मा का वेतन रोकने, संदीप वर्मा पर एफआईआर दर्ज करने तथा अवमानना व अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
- ओवरटाइम और विश्राम वेतन भुगतान न करने का विवाद।
- बकाया राशि वसूली और अधिकारियों का वेतन रोकने के आदेश।
- आईएएस संदीप वर्मा पर संगीन धाराओं में एफआईआर के निर्देश।
- हाई कोर्ट में अवमानना रेफरेंस और डीओपीटी को विभागीय कार्रवाई की सिफारिश।
जज दिनेश गुप्ता ने बकाया राशि की वसूली के साथ दोनों अधिकारियों का वेतन रोकने के निर्देश दिए हैं। वहीं, संदीप वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने और विभागीय कार्रवाई शुरू करने को भी कहा है।
क्या है पूरा मामला?
30 जून 2026 को कोर्ट ने ब्याज और मुकदमे के खर्च समेत 1,09,740 रुपए की राशि तय की थी। इसके बाद RSRTC ने 30 जुलाई को सिर्फ 13076 रुपए का भुगतान किया।
कोर्ट ने भुगतान में गड़बड़ी मानी
कोर्ट ने अब बाकी राशि 96664 रुपए की वसूली के निर्देश दिए हैं। इसके साथ 2 जुलाई 2018 से 30 जून 2023 तक 18% सालाना ब्याज, 25 हजार रुपए मुकदमे का खर्च और 3 हजार रुपए क्षतिपूर्ति भी वसूली जाएगी। जिला कलेक्टर, जयपुर को यह रकम भू-राजस्व की बकाया राशि की तरह RSRTC से वसूलने का आदेश दिया गया है।
IAS संदीप वर्मा का वेतन रोकने के निर्देश
आरएसआरटीसीके एमडी पुरुषोत्तम शर्मा से भी 6% सालाना अतिरिक्त ब्याज की व्यक्तिगत वसूली के निर्देश दिए गए हैं। यह राशि पूरी होने तक उनका वेतन रोकने को कहा गया है।
संदीप वर्मा पर FIR के निर्देश
कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 166, 219, 374, 384, 385, 406, 409 और 307-308 के साथ धारा 36 व 37, संविधान के अनुच्छेद 23 और मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 30 के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
विभागीय कार्रवाई और अवमानना की सिफारिश भी की
आदेश की प्रतियां राजस्थान के मुख्य सचिव और केंद्र सरकार के कार्मिक एवं लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के सचिव को भी भेजी जाएंगी।
संदीप वर्मा के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने और भारतीय राज्य चिन्ह (अनुचित प्रयोग का निषेध) अधिनियम, 2005 के तहत अभियोजन की मंजूरी पर विचार करने के निर्देश दिए गए हैं।
हाई कोर्ट को भेजा जाएगा रेफरेंस
कोर्ट ने टिप्पणी की कि किसी कर्मचारी से तय मजदूरी दिए बिना ओवरटाइम काम कराना संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत बेगार और जबरन श्रम के समान है। मामले की पालना रिपोर्ट के लिए अगली सुनवाई 1 सितंबर 2026 को होगी।
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