मानगढ़ धाम : राजस्थान में भी है एक ‘जलियावाला बाग’, अंग्रेजों की क्रूरता के बारे में जानकर दिल दहल जाएगा
Gyan Chand Patni | Aug 15, 2025, 16:18 IST
shahadat mangadh dham
राजस्थान में बांसवाड़ा के मानगढ़ धाम पर अंग्रेजी हुकूमत ने निहत्थे आदिवासियों पर गोली चलाकर 1500 से अधिक लोगों को मारा था। आज भी यह स्थल शौर्य और बलिदान की गाथा बयां करता है।
राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित मानगढ़ धाम, एक ऐसी जगह है, जहां अंग्रेजी हुकूमत ने निहत्थे भील-आदिवासियों पर गोलियां चलाकर 1500 से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया।
यह स्थान शौर्य और बलिदान की अमिट गाथा को समेटे हुए है।
मानगढ़ पहाड़ी पर 17 नवंबर, 1913 को हजारों आदिवासी एकत्र हुए थे। उनका उद्देश्य आदिवासियों के दमन, शोषण, अत्याचार और बेखौफ टैक्स के खिलाफ आवाज उठाना था।
वे ब्रिटिश शासन के खिलाफ एकजुटता और स्वाभिमान का संदेश देने के लिए इकट्ठा हुए थे, लेकिन अंग्रेजों ने इसे अपने लिए खतरा मानते हुए अचानक गोलियों की बौछार कर दी थी।
मानगढ़ धाम में आदिवासियों के स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व संत और समाज सुधारक गोविंद गुरु ने किया। उन्होंने आदिवासियों को सामाजिक बुराइयों से दूर रहने, आत्मनिर्भर बनने और स्वाभिमानी जीवन जीने का संदेश दिया।
गोविंद गुरु ने 'संप सभा' के माध्यम से 9 बातों पर जोर दिया। इनमें शराब-मांस का त्याग करने के साथ अपराधों से परहेज पर जोर दिया गया। मेहनत से जीवनयापन करने के साथ शिक्षा और धार्मिक आचरण का ध्यान रखने की बात कही।
उन्होंने बच्चें को संस्कारित करने, बेगार और अन्याय का विरोध करने तथा स्वदेशी वस्तुओं का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने पर जोर दिया। साथ ही कहा कि पंचायत के फैसलों को सर्वोपरि मान जाए।
शहीदों के नाम लिखना भूली राजस्थान सरकार, अमर जवान ज्योति स्मारक पर नहीं 12 साल से अपडेट, जानें पूरा मामला
राजस्थान के इतिहास में यह सबसे बड़ा नरसंहार माना जाता है, जो जलियांवाला बाग से भी बड़ा था।
यह घटना भील-आदिवासी आंदोलन की निर्णायक चिंगारी बन गई, जिसने आदिवासियों को यह विश्वास दिलाया कि वे संगठित होकर अन्याय के खिलाफ लड़ सकते हैं।
मानगढ़ धाम की भूमि आज भी इस बलिदान की गवाही देती है, जिसने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी थी। राजस्थान का मानगढ़ धाम राजस्थान का जलियावाला बाग है।
राजस्थान में मास्टर प्लान का विरोध, अपने ही शहर में विरोध झेल रहे UDH मंत्री, जानें पूरा मामला
इतिहास के इस महत्वपूर्ण स्थल और राष्ट्रीय धरोहर के बावजूद, मानगढ़ धाम का विकास अब तक अधूरा है।
वर्षों से घोषणाएं और वादे किए जाते रहे हैं, लेकिन अब तक इसे वह स्वरूप नहीं मिल पाया है, जिसका यह हकदार है। यहां आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु अभी भी बुनियादी सुविधाओं की कमी महसूस करते हैं, जिससे उनका अनुभव काफी हद तक प्रभावित होता है।
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃🤝💬👩👦👨👩👧👧
यह स्थान शौर्य और बलिदान की अमिट गाथा को समेटे हुए है।
अचानक हुई गोलियों की बौछार
वे ब्रिटिश शासन के खिलाफ एकजुटता और स्वाभिमान का संदेश देने के लिए इकट्ठा हुए थे, लेकिन अंग्रेजों ने इसे अपने लिए खतरा मानते हुए अचानक गोलियों की बौछार कर दी थी।
स्वाभिमानी जीवन जीने का संदेश
गोविंद गुरु ने 'संप सभा' के माध्यम से 9 बातों पर जोर दिया। इनमें शराब-मांस का त्याग करने के साथ अपराधों से परहेज पर जोर दिया गया। मेहनत से जीवनयापन करने के साथ शिक्षा और धार्मिक आचरण का ध्यान रखने की बात कही।
उन्होंने बच्चें को संस्कारित करने, बेगार और अन्याय का विरोध करने तथा स्वदेशी वस्तुओं का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने पर जोर दिया। साथ ही कहा कि पंचायत के फैसलों को सर्वोपरि मान जाए।
शहीदों के नाम लिखना भूली राजस्थान सरकार, अमर जवान ज्योति स्मारक पर नहीं 12 साल से अपडेट, जानें पूरा मामला
राजस्थान का सबसे बड़ा नरसंहार
यह घटना भील-आदिवासी आंदोलन की निर्णायक चिंगारी बन गई, जिसने आदिवासियों को यह विश्वास दिलाया कि वे संगठित होकर अन्याय के खिलाफ लड़ सकते हैं।
मानगढ़ धाम की भूमि आज भी इस बलिदान की गवाही देती है, जिसने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी थी। राजस्थान का मानगढ़ धाम राजस्थान का जलियावाला बाग है।
राजस्थान में मास्टर प्लान का विरोध, अपने ही शहर में विरोध झेल रहे UDH मंत्री, जानें पूरा मामला
विकास अधूरा, सुविधाओं का अभाव
वर्षों से घोषणाएं और वादे किए जाते रहे हैं, लेकिन अब तक इसे वह स्वरूप नहीं मिल पाया है, जिसका यह हकदार है। यहां आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु अभी भी बुनियादी सुविधाओं की कमी महसूस करते हैं, जिससे उनका अनुभव काफी हद तक प्रभावित होता है।
FAQ
- 1. मानगढ़ धाम में किस घटना का उल्लेख किया गया है?
ब्रिटिश फौज ने 17 नवंबर 1913 को निहत्थे भील-आदिवासियों पर गोलियां चलाईं, जिसमें 1500 से अधिक लोग मारे गए थे। यह घटना मानगढ़ धाम पर घटित हुई थी। - 2. गोविंद गुरु ने आदिवासियों के लिए क्या संदेश दिया था?
गोविंद गुरु ने आदिवासियों को आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी जीवन जीने का संदेश दिया था। उन्होंने ‘संप सभा’ के माध्यम से सामाजिक बुराइयों से दूर रहने और स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करने की सलाह दी। - 3. क्या मानगढ़ धाम का विकास हुआ है?
नहीं, मानगढ़ धाम का विकास अब तक अधूरा है। वर्षों से वादे किए गए हैं, लेकिन यहां की बुनियादी सुविधाओं में सुधार नहीं हुआ है।
thesootr links
- मध्यप्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- राजस्थान की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक
- जॉब्सऔरएजुकेशन की खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें
- निशुल्क वैवाहिक विज्ञापनऔरक्लासिफाइड देखने के लिए क्लिक करें
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃🤝💬👩👦👨👩👧👧
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava