हाथी मोहन की कस्टडी सरकार के पास सुरक्षित, कोर्ट ने महावत को सौंपने पर लगाई रोक

Mukesh Sharma | Jun 17, 2026, 08:30 IST
Share
हाथी मोहन की कस्टडी
Photograph: (the sootr)

राजस्थान हाई कोर्ट ने फर्जी परमिट के जरिए असम से जयपुर लाए गए हाथी मोहन की कस्टडी सरकारी नियंत्रण में रखने का आदेश दिया है। अदालत ने निचली कोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए सरकार को हाथी की सेहत का विशेष ख्याल रखने का निर्देश दिया।

समझें क्या है पूरा मामला

  • कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए कि हाथी के खानपान और स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाए।
  • असम से जयपुर लाने के लिए दिखाए गए ट्रांजिट परमिट और परिवहन वाहन का नंबर जांच में पूरी तरह फर्जी मिले।
  • वन विभाग की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने एडीजे कोर्ट द्वारा महावत के पक्ष में दिए आदेश पर रोक लगाई।
  • सरकार ने दलील दी कि असम के आर्द्र मौसम से जयपुर की शुष्क जलवायु में हाथी को लाना जैविक क्रूरता है।
आसाम से जयपुर पहुंचे 16 साल के हाथी मोहन की कस्टडी सरकार के पास ही रहेगी। राजस्थान हाई कोर्ट ने सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाथी की कस्टडी महावत को देने के आदेश पर रोक लगा दी हैं। जस्टिस बिपिन गुप्ता ने अपने आदेश में सरकार को हाथी की समुचित देखभाल करने के निर्देश भी दिए।

अदालत ने राजस्थान सरकार से कहा है कि वह हाथी के खानपान और स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखे। कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी करते हुए सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी। दरअसल, हाथी मोहन को मार्च में आसाम से जयपुर लाया गया था।

वन विभाग ने हाथी को फर्जी ट्रांजिट परमिट से जयपुर लाने पर कार्रवाई करते हुए उसे जब्त कर लिया था।

एडीजे कोर्ट ने महावत के पक्ष में दिया था फैसला

दरअसल, आसाम के रहने वाले लोकनाथ बोहरा हाथी को लेकर जयपुर लाए थे। इन्होने जयपुर में सलीम खान के यहां हाथी को रखा। जिसके बाद वन विभाग की टीम ने फर्जी ट्रांजिट परमिट के आरोप में हाथी को अपने कब्जे में ले लिया।

सलीम खान ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर करके कहा कि हाथी मालिक ने उसे पावर ऑफ अर्टोनी दी हैं। ऐसे में उसे हाथी लौटाया जाए। लेकिन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उसके प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। उसके बाद सलीम खान ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के खिलाफ अपील की।

अपील पर सुनवाई करते हुए एडीजे-7 ने 29 अप्रेल को सलीम खान के पक्ष में फैसला देते हुए हाथी की कस्टडी उसे देने के आदेश दिए।

हाथी का ट्रांसफर जैविक क्रूरता

इस फैसले के खिलाफ वन विभाग के सहायक वन संरक्षक लेखराम ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। जिस पर वन विभाग की ओर से बहस करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश चौधरी और मानवेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि हाथी को असम से बिना वैध दस्तावेजों के राजस्थान लाया गया और अवैध रूप से रखा गया।

जांच के दौरान प्रस्तुत ट्रांजिट परमिट फर्जी पाए गए तथा जिस वाहन संख्या से हाथी को लाने का दावा किया गया, वह परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में अस्तित्व में ही नहीं मिला।

सरकार ने दलील दी कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत हाथी सरकारी संपत्ति के रूप में निहित हो चुका है। वहीं असम की आर्द्र जलवायु से जयपुर के शुष्क वातावरण में हाथी का स्थानांतरण जैविक क्रूरता के समान है। ऐसे में हाथी की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए उसकी कस्टडी सरकार को दी जाए।

ये खबर भी पढे़:-

8 मौतों का मुख्य आरोपी कयूम खान अलीगढ़ से गिरफ्तार, याकूब-फिरोज अब भी फरार

राहुल की कोटा यात्रा से पहले कांग्रेस ने लगाए आरोप, हटाए जा रहे बैनर

NEET री-एग्जाम से पहले एक और छात्र ने की सुसाइड, परिवार ने लगाए आरोप

पानी को लेकर किसानों का आंदोलन तेज, दिल्ली-मुंबई ट्रैक एक घंटे रोकी ट्रेन

Tags:
  • राजस्थान सरकार
  • राजस्थान हाई कोर्ट
  • वन विभाग
  • असम
  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि

By Neel Tiwari

20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

By Sandeep Kumar

मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

By Arun Tiwari

पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच

By Jitendra Shrivastava

भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच