दूसरे राज्यों के SC, ST, OBC छात्रों को नहीं मिलेगा आरक्षण, हाई कोर्ट का आया फैसला
thesootr Desk | Apr 15, 2026, 16:59 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि दूसरे राज्यों के SC, ST, OBC छात्रों को प्रदेश में आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। उन्हें केवल सामान्य श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करनी होगी।
News In Short
- दूसरे राज्यों के आरक्षित छात्रों को राज्य में आरक्षण का लाभ न देने काराजस्थान हाईकोर्ट का फैसला।
- बाहर के आरक्षित वर्ग के छात्रों को पीजी मेडिकल सीटों पर सामान्य श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करनी होगी।
- फेडरेशन ऑफ प्राइवेट मेडिकल एंड डेंटल कॉलेज ने हाई कोर्ट दायर की थी याचिका।
- याचिका में खाली सीटों को भरने के लिए कम परसेंटाइल का तर्क दिया गया था।
- कोर्ट ने कहा कि आरक्षण नीतियां राज्य-विशिष्ट होती हैं, दूसरे राज्य में लागू नहीं हो सकतीं।
News In Detail
यह फैसला राजस्थान के प्राइवेट मेडिकल एंड डेंटल कॉलेजों संगठन की याचिका को खारिज करते हुए सुनाया गया। जस्टिस संजीत पुरोहित की एकलपीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि आरक्षण नीतियां राज्य-विशिष्ट होती हैं और उन्हें राज्य की सीमाओं के पार नहीं ले जाया जा सकता।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता का तर्क था कि केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार नीट-पीजी (NEET-PG) के क्वालीफाइंग परसेंटाइल (पात्रता प्रतिशत) को कम करने का उद्देश्य खाली सीटों को भरना था। यदि बाहरी राज्यों के आरक्षित छात्रों को कम परसेंटाइल का लाभ नहीं दिया जाता तो यह लक्ष्य पूरा नहीं होगा।
काउंसलिंग के बीच में नियम बदलना खेल के नियम बदलने जैसा है। यह नीति अप्रत्यक्ष रूप से 100 फीसदी डोमिसाइल (मूल निवास) आधारित आरक्षण लागू करने के समान है, जो असंवैधानिक है।
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरक्षित वर्ग के लिए तय किए गए कम परसेंटाइल एक विशेष सुविधा है। यह सुविधा केवल उसी राज्य के आरक्षित छात्रों के लिए है जिसने उन्हें पिछड़ा घोषित किया है। दूसरे राज्य के आरक्षित अभ्यर्थी इस शिथिल मानक का उपयोग करके राजस्थान की आरक्षित श्रेणी की सीटों पर अधिकार नहीं जता सकते।
अदालत ने यह भी कहा कि प्रशासनिक लक्ष्य (खाली सीटें भरना) निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन यह कानूनी और संवैधानिक मानकों पर हावी नहीं हो सकता। सिर्फ इसलिए कि सीटें खाली रह जाती हैं, असंवैधानिक तरीके से सीटें नहीं भरी जा सकतीं।
याचिकाकर्ता के इस तर्क को भी खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि बाहरी राज्यों के अभ्यर्थी सामान्य/अनारक्षित पूल की सीटों पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। उन पर कोई प्रतिबंध नहीं है। बस उन्हें वह अतिरिक्त लाभ (कम परसेंटाइल) नहीं दिया जा रहा जो सिर्फ राजस्थान के मूल निवासियों के लिए है। इसे 100% डोमिसाइल आरक्षण कहना गलत होगा।
दिया सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला
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